*ब्रेकअप के बाद ब्लैकमेल और सोशल बदनामी के मामले बढ़े*

*एक बार वायरल हुआ कंटेंट हमेशा नियंत्रण में नहीं रहता: डॉ. संदीप गोहे*

*ब्रेकअप के बाद ब्लैकमेल और सोशल बदनामी के मामले बढ़े*

डिजिटल दौर में रिश्तों में नजदीकी और खुलापन बढ़ा है, लेकिन इसके साथ एक खतरनाक प्रवृत्ति भी सामने आ रही है। कई कपल निजी फोटो और वीडियो बनाकर इसे भरोसे का प्रतीक मान रहे हैं, जबकि विशेषज्ञ इसे जोखिम भरा कदम बता रहे हैं।
मनोवैज्ञानिक डॉ. संदीप गोहे के अनुसार लोग भावनात्मक लगाव, पार्टनर को खोने के डर या प्यार साबित करने के दबाव में ऐसे फैसले लेते हैं, जो आगे चलकर गंभीर समस्या बन सकते हैं। उनका कहना है कि जब तक रिश्ता ठीक रहता है, तब तक परेशानी नहीं होती, लेकिन ब्रेकअप या विवाद के बाद यही निजी कंटेंट ब्लैकमेल, बदला लेने या बदनामी का कारण बन जाता है।

तकनीकी गलती, हैकिंग या भरोसा टूटने की स्थिति में भी यह कंटेंट लीक होकर तेजी से फैल सकता है। एक बार इंटरनेट पर आने के बाद इसे पूरी तरह हटाना मुश्किल हो जाता है, जिससे व्यक्ति के सामाजिक और पारिवारिक जीवन पर गहरा असर पड़ता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार मध्यप्रदेश सहित देशभर में साइबर अपराध के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इनमें निजी डेटा का दुरुपयोग, ऑनलाइन उत्पीड़न और निजी वीडियो लीक से जुड़े मामलों की संख्या तेजी से बढ़ी है।

ऐसे मामलों का सबसे अधिक असर मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। डॉ. गोहे के मुताबिक इससे चिंता, अवसाद, अपराधबोध और सामाजिक अलगाव जैसी समस्याएं सामने आती हैं। कई बार लोग इस तनाव को साझा नहीं कर पाते, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।
कानूनी रूप से बिना सहमति किसी का निजी कंटेंट साझा करना अपराध है और इसके लिए सजा का प्रावधान है। हालांकि प्रक्रिया लंबी और मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण होती है, इसलिए बचाव को ही सबसे बेहतर उपाय माना गया है।

डॉ. गोहे ने सलाह दी है कि किसी भी स्थिति में निजी कंटेंट रिकॉर्ड या साझा करने से बचें, भरोसा साबित करने के लिए निजता से समझौता न करें और डिजिटल सीमाएं तय रखें। उनका कहना है कि रिश्ते भरोसे से चलते हैं, सबूत से नहीं, और डिजिटल कंटेंट कभी पूरी तरह नियंत्रण में नहीं रहता।