रानीपुर (जिला बैतूल)।
गौ ग्राम संस्कृति संरक्षण समिति, रानीपुर के तत्वावधान में आयोजित पंच परिवर्तन पदयात्रा की इस वर्ष की अंतिम यात्रा मंगलवार 17 मार्च 2026 को श्रद्धा, उत्साह और भक्ति के वातावरण में धूमधाम से निकाली गई। यह पदयात्रा पूज्य तपस्वी संत श्री श्री 1008 निक्कुदास जी महाराज की सूक्ष्म उपस्थिति, माता रेणुका की असीम कृपा तथा संतों के दिव्य संरक्षण में पिछले छह माह से निरंतर संचालित हो रही थी। गौ ग्राम संस्कृति संरक्षण समिति के संस्थापक श्री वीरेंद्र बिलगैया जी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार यह पदयात्रा अश्विन शुक्ल अष्टमी (30 सितंबर 2025, मंगलवार) को प्रारंभ हुई थी और लगभग छह माह तक निरंतर चलने के बाद चैत्र कृष्ण चतुर्दशी (17 मार्च 2026, मंगलवार) को इस वर्ष की अंतिम पदयात्रा संपन्न हुई। इस अवसर पर पंकज मुनि जी महाराज, श्री काले जी महाराज, गिरि जी महाराज सहित अनेक संतों का सान्निध्य प्राप्त हुआ। यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, ग्रामीणजन, माताएँ-बहनें, युवक तथा धर्मप्रेमी नागरिक शामिल हुए।
40 किलोमीटर की पावन यात्रा
लगभग 40 किलोमीटर लंबी यह पावन यात्रा बोरी वाले बाबा जी की तपस्थली संत निक्कुदास आश्रम, रानीपुर से प्रारंभ होकर विभिन्न ग्रामों से होते हुए माता रानी के पावन छावल धाम तक पहुँचती रही। पदयात्रा का मार्ग रानीपुर से प्रारंभ होकर कुही, भोपाली, डंगवा, जामखोदर, बैलूड और बोरी ग्रामों से होकर गुजरता है। लगभग छह माह तक चलने वाली इस पदयात्रा को श्रद्धालु भक्ति, साहस, समर्पण, त्याग और समाज परिवर्तन का अद्भुत संगम मानते हैं।
इस यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, युवाओं और श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्म, संस्कृति और जनजागरण का संदेश जन-जन तक पहुँचाया।
बैतूल नगर के गंज स्थित प्राचीन माँ संतोषी माता मंदिर से सनातन धर्म की पताका लेकर ध्वज यात्रा भी निकाली जाती रही। संत श्री काले महाराज के आशीर्वाद से यह ध्वज यात्रा प्रत्येक सोमवार को माँ संतोषी माता मंदिर से प्रारंभ होकर मंगलवार को रानीपुर आश्रम से निकलने वाली पंच परिवर्तन पदयात्रा में सम्मिलित होती थी और पूरे क्षेत्र में सनातन संस्कृति और धार्मिक जागरण का संदेश देती थी।
19 मार्च को होगा भव्य समापन समारोह
समिति के अनुसार इस वर्ष की पंच परिवर्तन पदयात्रा का भव्य समापन समारोह 19 मार्च 2026, गुरुवार (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा – हिंदू नववर्ष, गुड़ी पड़वा) के पावन अवसर पर आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर धर्मध्वज स्थापना तथा रामचरितमानस महायज्ञ का शंखनाद किया जाएगा। यह कार्यक्रम बाबा जी की तपस्थली माधव गौशाला, हनुमान जी महाराज की सिद्ध कुटी, रानीपुर में संपन्न होगा, जिसमें संतों के आशीर्वचन, धार्मिक आयोजन तथा समाज जागरण से जुड़े विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
पंच परिवर्तन का संदेश
गौ ग्राम संस्कृति संरक्षण समिति के प्रतीक राठौर जी के अनुसार पंच परिवर्तन पदयात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि समाज जागरण का एक व्यापक अभियान है। इसके माध्यम से समाज में सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन, स्व आधारित जीवन तथा नागरिक कर्तव्यबोध जैसे पाँच महत्वपूर्ण मूल्यों को स्थापित करने का संदेश दिया जा रहा है।
समिति का मानना है कि समयानुकूल सकारात्मक परिवर्तन ही समाज और राष्ट्र को सशक्त बनाते हैं और पंच परिवर्तन पदयात्रा उसी दिशा में समाज को जागरूक करने का एक सतत प्रयास है।
देशभर से संतों की सहभागिता
इस पदयात्रा में पंजाब, गुजरात, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश सहित अनेक प्रांतों से संतों की सहभागिता रही। वहीं बैतूल जिले के लगभग 300 ग्रामों से श्रद्धालु इस यात्रा में सम्मिलित हुए। इसके साथ ही भारत के विभिन्न अखाड़ों ने भी इस यात्रा को सफल बनाने के लिए आशीर्वाद और शुभकामनाएँ प्रदान कीं।
“चले गाय की ओर, चले ग्राम की ओर, चले प्रकृति की ओर”
समिति के “चले गाय की ओर, चले ग्राम की ओर, चले प्रकृति की ओर” के उद्घोष के साथ प्रत्येक ग्राम में धर्मध्वजा की स्थापना कर समाज को जागरूक करने का संकल्प लिया गया।
समिति ने बताया कि पंच परिवर्तन पदयात्रा का यह अभियान आगामी वर्ष भी अश्विन मास से पुनः प्रारंभ किया जाएगा, जिससे धर्म, संस्कृति और समाज जागरण का यह संदेश निरंतर आगे बढ़ता रहे।







