नए साल में क्यों ज़रूरी है हेल्थ रीसेट : डॉ नवीन वागद्रे
हर नया साल केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं बदलता, बल्कि यह जीवनशैली पर पुनर्विचार करने का अवसर देता है। डॉ नवीन वागद्रे
बताते हैं कि हम हर वर्ष नए लक्ष्य तय करते हैं, लेकिन अपने शरीर को नया बनाने की दिशा में ठोस कदम कम ही उठाते हैं। आज के समय में स्वास्थ्य को टालना भविष्य की बीमारियों को आमंत्रण देने जैसा है।
आधुनिक जीवनशैली और बिगड़ता स्वास्थ्य
तेज़ रफ्तार ज़िंदगी, देर रात तक स्क्रीन का उपयोग, जंक फूड, शारीरिक निष्क्रियता और लगातार तनाव ने शरीर के प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ दिया है। इसके परिणामस्वरूप मोटापा, डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर, गैस-एसिडिटी, त्वचा रोग, नींद की समस्या और मानसिक अशांति तेजी से बढ़ रही हैं।
बीमारी अचानक नहीं आती डॉ नवीन वागद्रे के अनुसार कोई भी रोग एक दिन में नहीं होता। वर्षों तक गलत जीवनशैली, गलत भोजन और अंदर जमा होती “अदृश्य गंदगी” धीरे-धीरे बीमारी का रूप ले लेती है। शरीर संकेत देता रहता है, लेकिन हम उन्हें अनदेखा करते रहते हैं।
शरीर: एक स्वयं-उपचार करने वाली प्रणाली
मानव शरीर कोई मशीन नहीं है जिसे केवल दवाइयों से चलाया जा सके। यह एक जीवित, बुद्धिमान और स्वयं को ठीक करने वाली प्रणाली है। जब शरीर को सही वातावरण, सही भोजन और सही दिनचर्या मिलती है, तो वह खुद ही संतुलन में आने लगता है।
नेचुरोपैथी: बीमारी नहीं, कारण पर काम
नेचुरोपैथी बीमारी को दबाने के बजाय उसके कारण को समझने और सुधारने की चिकित्सा पद्धति है। यह मानती है कि प्रकृति सबसे बड़ा चिकित्सक है और दवा से पहले जीवनशैली सुधार सबसे प्रभावी उपचार है।
डिटॉक्स: सिर्फ ट्रेंड नहीं, जैविक आवश्यकता
डिटॉक्स का अर्थ केवल कुछ दिनों का जूस या उपवास नहीं है। यह शरीर की आंतरिक सफाई की वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसमें आंतों, लिवर, त्वचा और कोशिकाओं में जमा विषैले तत्व बाहर निकलते हैं।
नेचुरोपैथी में डिटॉक्स कैसे होता है
जल चिकित्सा, मिट्टी चिकित्सा, उपवास, हल्का सात्त्विक भोजन, सूर्य स्नान, योग और प्राणायाम के माध्यम से शरीर की प्राकृतिक डिटॉक्स प्रणाली सक्रिय होती है। इससे सूजन कम होती है, मेटाबॉलिज़्म सुधरता है और ऊर्जा स्तर बढ़ता है।
रिसर्च क्या कहती है
अनेक वैज्ञानिक अध्ययनों में यह पाया गया है कि नेचुरोपैथिक लाइफस्टाइल इंटरवेंशन से ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और तनाव स्तर में सकारात्मक सुधार देखा गया है। योग और ध्यान से हार्मोनल संतुलन और नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है।
शरीर साफ, तो मन साफ
डॉ नवीन वागद्रे बताते हैं कि जब शरीर भीतर से साफ होता है, तो उसका सीधा असर मानसिक स्थिति पर पड़ता है। व्यक्ति अधिक शांत, स्पष्ट और सकारात्मक महसूस करता है। इसलिए नेचुरोपैथी को आज होलिस्टिक हीलिंग कहा जाता है।
नेचुरोपैथी क्यों तेजी से बढ़ रही है
आज लोग केवल इलाज नहीं, बल्कि दीर्घकालिक स्वास्थ्य चाहते हैं। साइड इफेक्ट्स से मुक्त, सुरक्षित और प्राकृतिक पद्धतियों की ओर लोगों का झुकाव लगातार बढ़ रहा है।
डॉ नवीन वागद्रे का योगदान
प्राकृतिक चिकित्सा को जन-जन तक पहुँचाने के लिए डॉ नवीन वागद्रे
लगातार प्रयासरत हैं। वे अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से स्वास्थ्य शिक्षा देते हैं, नियमित रूप से न्यूज़ आर्टिकल्स लिखते हैं और अपनी पुस्तकों के ज़रिये लोगों को प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं। डॉ नवीन बतातें है कि किसी भी नेचुरोपैथी हॉस्पिटल सेंटर या नेचुरोपैथी वातावरण में समय बिताने से शरीर स्वयं को साफ़ करने और पुनः ऊर्जावान बनने का अवसर मिलता है। इस नए साल पर संकल्प लें कि दवा से पहले जीवनशैली सुधार को प्राथमिकता देंगे, शरीर की आवाज़ सुनेंगे और प्रकृति के साथ तालमेल बनाएंगे। नया साल तभी वास्तव में नया कहलाएगा जब हमारा शरीर, मन और जीवनशैली भी नई होगी। डॉ नवीन वागद्रे के शब्दों में, नेचुरोपैथी कोई ट्रेंड नहीं बल्कि प्रकृति की ओर वापसी का विज्ञान है। क्योंकि जब शरीर शुद्ध होता है, तो जीवन अपने आप संतुलित, ऊर्जावान और सुंदर हो जाता है।







