हरदा जनक्रांति न्याय आंदोलन की ऐतिहासिक विजय से चन्द्रशेखर ने बैतूल का मान प्रदेश-देश में बढाया

हरदा जनक्रांति न्याय आंदोलन की ऐतिहासिक विजय से चन्द्रशेखर ने बैतूल का मान प्रदेश-देश में बढाया

चन्द्रशेखर सिंह ने सर्वसमाज का माना आभार

करणी सैनिक गौरवशाली पल महसूस कर रहे

बैतूल। उस समय बैतूल की धरा ओर गौरवान्वित हो गई, जब आमला के ठा. चन्द्रशेखर शेखर सिंह चंदेल को प्रभारी बनाकर हरदा के जनक्रांति आंदोलन का बड़ा दायित्व सौंपा गया और जनक्रांति आंदोलन ऐतिहासिक बनकर प्रदेश व देश में अमिट और अविस्मरणीय बना। आज चंदू दादा को आंदोलन में दी बड़ी जिम्मेदारी और सफलतम ऐतिहासिक आंदोलन बनने से बैतूल का एक-एक करणी सैनिक और आंदोलन में पहुंचे सर्वसमाज के जन गौरवशाली पल को महसूस कर रहे है। समूचे प्रदेश में करणी सेना परिवार प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर के जनहितों में उठाएं बड़े कदम और प्रदेश उपाध्यक्ष चन्द्रशेखर सिंह चन्देल ने हरदा आंदोलन में विशाल जन समूह के लिए बनाई चाक-चौबंद व्यवस्थाएं और ऐतिहासिक जीत में निभाई साहसिक भूमिका की प्रशंसा सुनने को मिल रही है। बता दे कि आमला के करणी सेना परिवार प्रदेश उपाध्यक्ष चन्द्रशेखर सिंह चन्देल हरदा में हुई लाठीचार्ज से लेकर ऐतिहासिक जनक्रांति आंदोलन बनने तक संगठन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े थे। वे हरदा जनक्रांति आंदोलन के कई दिनों पूर्व से ही करणी सेना परिवार प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर के साथ सफलतम और ऐतिहासिक आंदोलन का सारांश बुनने का काम कर रहे थे। इनके अलावा प्रभारी बने पंकज राज सिंह पुरनी की भी आंदोलन में महत्ती भूमिका रही है।

चंदेल ने हरदा की कमान संभाल कर बढ़ाया बैतूल का मान

बता दे कि बैतूल जिले के आमला के चन्द्रशेखर सिंह चन्देल (चंदू दादा) को जनक्रांति न्याय आंदोलन की मुख्य धरा हरदा का प्रभारी बनाकर कर बड़ी कमान सौंपी गई थी। वही जब जनक्रांति न्याय आंदोलन को राजपूत समाज व सर्वसमाज ने सर्मथन कर बड़ी संख्या में उपस्थिती दर्ज कराकर ऐतिहासिक बनाया, तो आंदोलन मप्र ही नही वरन देश में विशेष स्थान बनाने में सफल हुआ। ऐसे में महीनों पूर्व से आंदोलन के सफल और ऐतिहासिक सारांश बुनने वाले प्रत्येक पदाधिकारी का सराहना और प्रशंसा के हकदार है। ऐसे ही आमला के चन्द्रशेखर सिंह चंदेल ने आंदोलन की मुख्य धरा हरदा की संभाल कर और आंदोलन को ऐतिहासिक पहचान मिलने के बाद पूरे बैतूल जिले का मान प्रदेश ही नही अपुति देश भर में बढाने का काम करके दिखाया है।

पुरनी व चंदेल की व्यवस्थाओं में कही नही दिखा अव्यवस्थाएं

आंदोलन के दो प्रभारी पंकज राज सिंह पुरनी एवं चंद्रशेखर सिंह चंदेल को जीवन सिंह शेरपुर द्वारा नियुक्त किए गए थे। दोनों प्रभारियों ने हरदा जिला अध्यक्ष सुनील सिंह एवं उनकी समस्त तहसील अध्यक्षों एवं उनकी टीम के साथ आंदोलन की व्यवस्थित-व्यस्था की। जिससे हरदा जिले में विशाल संख्या में सर्वसमाज के लोगो के पहुंचने पर भी कही भी अव्यवस्था नहीं देखी गई। दोनों प्रभारियों के साथ संगठन मंत्री अजीत सिंह डोडिया, पूर्व संगठन मंत्री शैलेन्द्र सिंह झाला, प्रदेश संयोजक यादवेंद्र सिंह ने भी प्रमुखता हरदा जिले के समस्त करणी सैनिकों के साथ आंदोलन को संचालित किया। तब जाकर 21 दिसंबर का जनक्रांति आंदोलन प्रदेश-देश में ऐतिहासिक पहचान बना पाया।

चंदेल ने माना करणी सैनिकों और सर्वसमाज का आभार

जनक्रांति न्याय आंदोलन हरदा के प्रभारी चंद्रशेखर सिंह चंदेल ने सर्वसमाज का आभार एवं धन्यवाद प्रकट किया। जनक्रांति न्याय आंदोलन हरदा में जीवन सिंह शेरपुर के नेतृत्व में करणी सेना परिवार की ऐतिहासिक विजय के पश्चात के अपने गृह ग्राम आमला पहुंचे आंदोलन प्रभारी चंद्रशेखर सिंह चंदेल ने बताया कि यह आंदोलन सर्वसमाज के लोगो के सानिध्य में संपन्न हुआ। जिसमें तत्काल प्रभाव से प्रमुख 2 मांगे सरकार ने मांग ली है। आगे की मांगों को पूरी करने की लड़ाई अब करणी सेना परिवार संसद एवं विधानसभा में पहुंच कर लड़ेगी। 3 करणी सेना का आपस में विलय हुआ है, जिसका नेतृत्व महिपाल सिंह मकराना राष्ट्रीय स्तर पर करेंगे।

ललन ने पदयात्रा कर किया था जनजागरण

नर्मदापुरम के बाबई निवासी करणी सेना परिवार संभाग प्रवक्ता ललन सिंह राजपूत ने नर्मदापुरम संभाग में हजारों ग्रामों की पदयात्रा कर जनक्रांति न्याय आंदोलन का जनजागरण किया था। आंदोलन को लेकर लोगों में चेतना और आंदोलन की प्रमुख मांगो की वास्तविक स्थितियों, अधिकारों और
अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने गांव-कस्बे तक पद यात्रा कर सर्वसमाज जनों को महीनों तक जागरूक करने का काम किया था।

क्षत्राणियों ने भी बढ-चढकर सहभागिता निभाई

आंदोलन में विशाल संख्या में मातृ शक्ति प्रदेश अध्यक्ष ममता जितेंद्र सिंह सोलंकी के नेतृत्व में पहुंची थी। नर्मदापुरम संभाग से नर्मदापुरम जिला अध्यक्ष अंजू राजपूत के नेतृत्व में, बैतूल जिला अध्यक्ष हेमा चौहान एवं हरदा जिला अध्यक्ष गायत्री राजपूत नेतृत्व में महिलाओं की प्रमुख सहभागिता रही। यह आंदोलन जनमानस का आंदोलन था। जिसमें सैकड़ों भाईयों ने पद यात्रा कर आंदोलन की पवित्रता बढ़ाई।