*अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोए रखना बेहद जरूरी*…….

शासकीय महाविद्यालय घोड़ाडोंगरी में भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के अंतर्गत शासन एवं उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी त्रैमासिक कैलेंडर के अनुसार 19 अगस्त को वसुधैवकुटुंबकम के अवधारणा पर केंद्रित कार्यक्रम का आयोजन किया गया

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. देवी सिंह सिसोदिया ने वसुधैव कुटुंबकम की भारतीय अवधारणा विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि पूरी वसुंधरा पर निवास करने वाला प्रत्येक जीव एक है और सबको मिल-जुलकर घर परिवार जैसा रहना चाहिए भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के नोडल अधिकारी डॉ.अजय कुमार चौबे ने बताया की अपनी सांस्कृतिक विरासत की पहचान और उसके संरक्षण के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ का गठन किया है जिसके तहत वसुधैव कुटुंबकम पर कार्यक्रम आयोजित किया जा रहे हैं कार्यक्रम में स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ के प्रभारी डॉ. साहेब राव झरबडे ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत विविधताओं में एकता का देश रहा है यहां विभिन्न धर्म जाति के लोग एक साथ रहते हैं यह एक बहुत ही अच्छा उदाहरण है

कार्यक्रम में महाविद्यालय के मीडिया प्रभारी प्रो.हेमंत कुमार निरापुरे,क्रीड़ा अधिकारी डॉ.नंद किशोर पवार, राष्ट्रीय सेवा योजना की महिला इकाई की अधिकारी डॉ. यासमीन जिया, भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के अधिकारी डॉ अजाब खातरकर, डॉ भूपेंद्र पाटनकर, डॉ.राजेश आर्य डॉ.दामोदर झारे, डॉ. खेमराज महाजन, श्री मोहित भोपते, श्री आकाश प्रजापति, श्री सौरभ कहार श्रीमती भूमिका भोपते, शोभा मगरदे,श्री आशीष काजोडे,मनीष मालवीय, श्री राम भगत यादव,श्री प्रेम सिंह ठाकुर सहित छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे