एस हैंडलिंग प्लांट सारणी में मेल्को कंपनी को मिला काम, मगर अब तक कंपनी ने नहीं दिया श्रमिकों को जॉइनिंग लेटर

–बालाजी इंटरप्राइजेज पर श्रमिकों के शोषण का मामला दर्ज, उसे ही पेटी पे काम मिलने की संभावना

बीएमएस नेता मैदान में, विधायक पंडाग्रे ने लेबर विभाग से लिया संज्ञान

सारनी। सतपुड़ा ताप विद्युत गृह की यूनिट क्रमांक 10 और 11 के एश हैंडलिंग सिस्टम के संचालन व अनुरक्षण (O&M) कार्य के लिए मेल्को इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को ₹9.86 करोड़ का अनुबंध मिलने के बाद, अब इस पूरे मामले में चर्चा और संशय का माहौल बन गया है। चर्चाएं हैं कि कंपनी द्वारा यह कार्य स्वयं न करके स्थानीय स्तर पर एक प्रभावशाली ठेकेदार को सौंपने की तैयारी की जा रही है, जिससे मजदूरों में भारी असमंजस और आक्रोश है।

पुरानी कहानी की पुनरावृत्ति की आहट

श्रमिकों की चिंता का मुख्य कारण यह है कि पूर्व में क्रांति कंपनी के साथ ऐसी ही स्थिति बनी थी, जब शुरुआत में पारदर्शी भुगतान हुआ, और कुछ ही समय बाद कार्य एक अन्य एजेंसी को हस्तांतरित कर दिया गया।
अब एक बार फिर, मेल्को कंपनी द्वारा शुरुआती दो माह तक सीधे कार्य संभालने की चर्चा है, जिसके बाद काम को सब-कॉन्ट्रैक्ट में दिए जाने की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं।

जबलपुर से बिल पास, चर्चाओं में ‘ऊँची पहुँच’

स्थानीय श्रमिकों और प्लांट से जुड़े सूत्रों की माने तो, मेल्को का एक महत्वपूर्ण भुगतान बिल जबलपुर मुख्यालय से पास कराया गया है। चर्चाओं में एक स्थानीय ठेकेदार का नाम आ रहा है, जिसने अपनी ऊँची पहुँच के जरिए यह कार्य संभव कराया।
इस चर्चा ने आशंकाओं को और बल दे दिया है कि श्रमिकों के अधिकारों को फिर से बायपास किया जा सकता है, और कार्य का वास्तविक नियंत्रण कंपनी के बजाय स्थानीय ठेकेदारों के हाथों में जा सकता है।

बीएमएस नेता हुए सक्रिय, मजदूर हितों की खुलकर पैरवी

इस पूरे घटनाक्रम में अब भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के वरिष्ठ पदाधिकारी भी सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने कंपनी और प्रबंधन के सामने श्रमिकों की सीधी भर्ती, पारदर्शी भुगतान और ईपीएफ की गारंटी की मांग उठाई है।
बीएमएस ने यह स्पष्ट किया कि यदि कार्य फिर से बिचौलियों या अप्रत्यक्ष एजेंसियों को सौंपा गया, तो मजदूर हितों के साथ अन्याय होगा, और इसका संगठित विरोध किया जाएगा।

विधायक योगेश पंडाग्रे ने लिखा पत्र, लेबर विभाग को दिए निर्देश

मामले की गंभीरता को देखते हुए विधायक श्री योगेश पंडाग्रे ने भी विषय पर संज्ञान लेते हुए, जिला श्रम पदाधिकारी को आवश्यक जांच व कार्रवाई हेतु पत्र लिखा है।
विधायक जी ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि स्थानीय श्रमिकों को बायपास करके ठेकेदारों को लाभ देना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि लेबर विभाग इस मामले की गहनता से समीक्षा करे और यह सुनिश्चित करे कि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा हो।
असमंजस में मजदूर, स्पष्टता की मांग

वर्तमान स्थिति में मजदूरों के सामने कई सवाल हैं –

उनका असली नियोक्ता कौन होगा?

क्या मेल्को सीधे वेतन और ईपीएफ देगा या किसी एजेंसी के माध्यम से काम करवाएगा?

यदि कार्य ट्रांसफर हुआ तो उनके हितों का क्या होगा?

यह सब सवाल फिलहाल अनुत्तरित हैं, जिससे श्रमिकों में भ्रम और बेचैनी का माहौल बना हुआ है।

 

यह रिपोर्ट श्रमिक समुदाय, सामाजिक संगठनों, और प्लांट परिसर में चल रही सार्वजनिक चर्चाओं पर आधारित है। इसमें उल्लिखित विषयों की अधिकारिक पुष्टि संबंधित प्राधिकरणों द्वारा नहीं की गई है। रिपोर्ट का उद्देश्य केवल जन भावना और संभावित परिदृश्यों को दर्शाना है, न कि किसी पर सीधा आरोप लगाना।)