फ्रंट लाईन योद्धाओं के लिए पहुंचेगी बैतूल से दुआ

राखियों के रुप में देश के फ्रंट लाईन योद्धाओं के लिए पहुंचेगी बैतूल से दुआएं भी
अंतरराष्ट्रीय भारत पाक सीमा पर तैनात सैनिकों के लिए किन्नरों ने बनाई राखियां
बैतूल। कविता, लक्ष्मी, रुपा, सुमन और बाकी सभी ने बड़े उत्साह से अपने घर में कुछ ही घंटों में सैकड़ों राखियां बनाई। उन्होंने कहा भी कि यह राखियां बनाते वक्त उन्हें गर्व भी है और खुशी भी क्योंकि उनके हाथ से बनाई राखियां देश की रक्षा करने वाले सैनिकों की कलाईयों पर बांधी जाएगी। यह पहला मौका है जब किन्नरों ने अपने हाथों से राखियां बनाकर बैतूल सांस्कृतिक सेवा समिति के राष्ट्र रक्षा मिशन दल को सौंपी। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी बैतूल से देश की अंतराष्ट्रीय सीमा पर पहुंचकर बैतूल सांस्कृतिक सेवा समिति का राष्ट्र रक्षा मिशन फ्रंट लाईन योद्धाओं की कलाई पर राखियां बांधेगा। यह 26वां वर्ष है जब बैतूल की बेटियां रक्षाबंधन के अवसर 9 अगस्त को सरहद पर पहुंचेगी और सैनिकों की कलाई पर राखी बांधकर उनके प्रति देशवासियों की ओर से कृतज्ञता जाहिर करेगी।
किन्नर बोले राखियां बनाकर हो रहा है गर्व
बैतूल नगर के खंजनपुर क्षेत्र में खुशी विला में रहने वाली किन्नरों की प्रमुख शोभा की मौजूदगी में लक्ष्मी, कविता, रुपा, सुमन, दीपा, सरिता, पायल, बबली, मंजू, पूनम और कविता ने बुधवार को तिरंगा राखियां बनाई। यह राखियां देश की भारत पाक सीमा पर तैनात सैनिकों को बांधी जाएगी।

किन्नरों ने दो घंटों में सैकड़ों राखियां बनाकर राष्ट्र रक्षा मिशन प्रमुख गौरी बालापुरे पदम एवं कोषाध्यक्ष जमुना पंडाग्रे को सौंपी। कविता और लक्ष्मी ने बताया कि उनके लिए यह पहला मौका है जब वे देश के सैनिकों के लिए कुछ कर रही है। यह राखियां नहीं उनकी तरफ से उन सैनिकों के लिए दुआएं है जो देश की रक्षा के लिए अपने घर परिवार से दूर रहते है। उन्होंने कहा कि बैतूल से हर साल बहने बार्डर पर जाती है यह जानकारी तो उन्हें है, कभी मौका मिले तो वह स्वयं भी देश के अंतिम छोर पर पहुंचकर सरहद को देखना चाहेंगी। वे भी सैनिकों की कलाई पर प्रत्यक्ष रुप से राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र की कामना करना चाहती है। कविता किन्नर कहती है कि भले ही वे बार्डर पर नहीं जा सकती लेकिन उनकी राखी बार्डर पर तैनात सेना के लिए जाएगी यह सुनकर ही उन्हें खुशी हो रही है।
राष्ट्र रक्षा मिशन 26 वर्षों से कर रहा सेना की हौसलाअफजाई
बैतूल सांस्कृतिक सेवा समिति की अध्यक्ष गौरी पदम बताती है कि देश की सीमाओं पर तैनात सैनिक अपने सेवा काल में वर्ष में सम्भवत: एक ही त्यौहार घर परिवार के साथ मना पाता है। यदि दीवाली घर पर मनाई तो होली नहीं मना पाता। ईद मना ली तो दूसरा त्यौहार छूट जाता है। रक्षाबंधन जैसे त्यौहार पर कई बार सैनिक भाईयों को समय पर राखी नही मिल पाती, कई बार राखी मिल जाती है तो बांधने के लिए बहन पास नहीं होती, ऐसे में जवान साथी ही एक दूसरे को राखी बांध लेते है। कारगिल युद्ध के बाद से उनकी संस्था देश की

अलग-अलग अंतराष्ट्रीय सीमाओं पर पहुंचकर रक्षा बंधन मनाती रही है। हर बार सेना की हौसलअफजाई के लिए अलग-अलग उपक्रम किए जाते है। इस बार किन्नरों की दुआएं भी वे सेना के लिए साथ लेकर जा रही है। इस अवसर पर समिति की कोषाध्यक्ष जमुना पंडागे्र, सहसचिव ईश्वर सोनी, सदस्य हर्षित पंडाग्रे, लता नागले, छाया प्रजापति, कल्पना मालवीय, सोनल खोब्रागड़े भी प्रमुख रुप से मौजूद थी।