*श्रद्धापूर्वक मनाया गया* *गुरु अर्जुन देव का शहीदी पर्व*

*गुरु अर्जुन देव का शहीदी पर्व*
*घोड़ाडोंगरी*: घोड़ाडोंगरी में सिखों के पांचवें गुरु अर्जुन देव जी का शहीदी पर्व शुक्रवार को श्रद्धापूर्वक मनाया गया. कई जगह मीठे शरबत की छबील लगाई गई |
गुरुद्वारे में कीर्तन दरबार सजाया गया |
20 मई को गुरुद्वारा सिंह सभा में श्री सुखमनी साहिब पाठ का शुभारम्भ हुआ था | जो प्रतिदिन समाज की महिलाओ के द्वारा किया जा रहा था |
शुक्रवार सुबह श्री सुखमनी साहिब के पाठ की समाप्ति हुई | इसके बाद कीर्तन दरबार सजाया गया | ज्ञानी योगेश सिंह ने रूहानी कीर्तन से संगत को जोड़ा | तत्पश्चात अरदास हुई और गुरु का अटूट लंगर बरताया गया | सभी समाज के लोगों ने लंगर का प्रसाद ग्रहण किया |
गुरुद्वारे के बाहर रोड पर मीठे शरबत की छबील लगाई गई एवं चने का प्रसाद वितरित किया गया |
नगर के मुख्य मार्ग दुर्गा चौक, हॉस्पिटल चौक, सेंट्रल चौक पर मीठे शरबत की छबील लगाई गयी |
वाहन चालकों को रोककर ठंडा शरबत पिलाया गया | गुरुद्वारा सिंह सभा घोड़ाडोंगरी के प्रधान सुमित सिंह सलूजा ने बताया कि गुरु अर्जुन देव जी का शहीदी पर्व बड़े ही श्रद्धा भाव से मनाया जा रहा है |
सिख धर्म में सभी पर्व को श्रद्धा और आस्था से मनाया जाता है | सिख मर्यादा कहती है की चढ़दी कला में रहकर जीना है |

इसलिए चढ़दी कला में प्रकाश पर्व और शहीदी पर्व मनाते हैं |
उन्होंने कहा कि गुरु अर्जुन देव जी की शहादत अतुलनीय है | मानवता के सच्चे सेवक, धर्म के रक्षक, शांत और गंभीर स्वभाव के स्वामी गुरु अर्जुन देव सर्वमान्य लोकनायक थे |

उन्होंने दिन रात जनता की सेवा में लगाए थे. उनके मन में सभी धर्मों के प्रति अथाह सम्मान था | सिख धर्म में सबसे पहले गुरु अर्जुन देव जी की शहादत हुई थी. मुगल बादशाह जहांगीर ने गुरु अर्जुन देव जी को यातनायें देकर शहीद किया |
उन्हें गरम तवे पर शहीद किया गया था | इस अवसर पर गुरु सिंह सभा के सेवादार अवतार सिंह सलूजा,सुमित सिंह सलूजा, रमन सिंह खनुजा,
ईशान पोपली, बाबू सपरा एवं नगर के सभी सामाजिक बंधु एवं महिलाए उपस्थित हुई |