संजीवनी बनकर उभरी जिला अस्पताल में डॉक्टर शिल्पा यूट्रस से निकाली 800 ग्राम की गॉठ,

संजीवनी बनकर उभरी जिला अस्पताल में डॉक्टर शिल्पा
यूट्रस से निकाली 800 ग्राम की गॉठ, जिला अस्पताल में डॉ. शिल्पा हुरमाड़े ने किया ऑपरेशन
बैतूल। वैसे तो जिला अस्पताल में मामूली सीजर के लिए आए दिन प्रसुताओं को भोपाल रिफर किया जाता है। कुछ डॉक्टर तो नार्मल ऑपरेशन के लिए भी मरीजों को रिफर कर देते हैं, लेकिन सोमवार को जिला अस्पताल में पदस्थ महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. शिल्पा हुरमाड़े ने एक गरीब महिला का ऑपरेशन कर उसके यूट्रस से लगभग ८०० ग्राम की गांठ निकाली। २५ वर्षीय महिला के सफल ऑपरेशन में यूट्रस (बच्चादानी) पूरी तरह सुरक्षित है और महिला चाहे तो मातृत्व सुख भी ले सकती है। गरीब महिला और उसके परिजन डॉ. शिल्पा हुरमाड़े की तारीफ कर रहे है।

डब्ल्यूसीएल पाथाखेड़ा में प्रायवेट गार्ड के रूप में कार्यरत गौतम वर्मा की पत्नी रिंकू वर्मा (२५) का विगत १९ जुलाई २०२४ को जिला अस्पताल में सीजर हुआ था। सीजर के समय रिंकू के यूट्रस (बच्चेदानी) में एक छोटी गांठ थी। जिसे सीजर के समय निकालना संभव नहीं था। उस समय जिला अस्पताल में सीजर कर सुरक्षित प्रसव करवाया गया था।

८०० ग्राम की हो गई गांठ
९ माह पूर्व दिखी छोटी गांठ का आकार लगातार बढ़ रहा था। जिससे महिला के पेट का साईज भी बढ़ रहा था और गर्भवती महिला जैसे दिखने लगी थी। इससे रिंकू वर्मा को काम करने में भी परेशानी हो रही थी। दो दिन पूर्व महिला जिला चिकित्सालय पहुंची जहां महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. शिल्पा हुरमाड़े ने महिला की जांच की। सोनोग्राफी करने पर पता चला कि महिला के यूट्रस में १६&१५ सेंमी की फेब्रिक गांठ थी।

जिला अस्पताल में ही किया ऑपरेशन
आमतौर पर इस प्रकार के केस आने पर डॉक्टर सीधे मरीज का रेफर पर्चा काट देते है, लेकिन महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. शिल्पा ने महिला के परिवार की माली हालत देखते हुए जिला अस्पताल में ही ऑपरेशन करने का निश्चय किया। मंगलवार को लगभग एक घंटे तक चले ऑपरेशन में डॉ. शिल्पा हुरमाड़े, एनेस्थिसिया विशेषज्ञ डॉ. चित्रलेखा पाटील ने लगभग एक घंटे तक चले इस सफल ऑपरेशन के बाद महिला की बच्चादानी सुरक्षित रखते हुए १५&१६ सेमी की लगभग ८०० ग्राम की गांठ निकाली। ऑपरेशन के बाद महिला पूरी तरह स्वस्थ्य है और भविष्य में फिर से प्रेग्रेंसी प्लान कर सकती है।

इनका कहना

आमतौर पर महिलाओं के पेट में इस प्रकार की गांठ होने पर यूट्रस रिमूव कर गांठ निकाली जाती है, लेकिन २५ वर्षीय महिला के यूट्रस को सुरक्षित रखते हुए गांठ निकालकर डॉ. शिल्पा हुरमाड़े और ऑपरेशन में शामिल डॉ. चित्रलेखा पाटील एवं टीम ने सराहनीय कार्य किया है।

डॉ. जगदीश घोरे

सिविल सर्जन, जिला अस्पताल बैतूल

 

महिला की उम्र मात्र २५ साल थी और उनका एक ही बेटा था। ऐसे में यूट्रस सुरक्षित रखते हुए गांठ निकालना बड़ी चुनौती था। ऑपरेशन सफल रहा और महिला चाहे तो भविष्य में गर्भधारण कर सकती है। ५ दिन बाद महिला जिला अस्पताल से डिस्चार्ज हो जाएगी।

डॉ. शिल्पा हुरमाड़े

महिला रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल बैतूल

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मेरा पति गार्ड की नौकरी करता है। हमारा परिवार गरीब वर्ग से है। यदि प्रायवेट अस्पताल में यह ऑपरेशन करवाते तो लगभग एक लाख रूपए लग जाता जो हमारी हैसियत के बाहर था। डॉ. शिल्पा मेडम ने जिला अस्पताल में बड़ा ऑपरेशन कर हमे राहत दी है।

रिंकू वर्मा

मरीज घोड़ाडोंगरी, जिला-बैतूल