बैतूल,सतपुड़ाचल में बसे मध्यप्रदेश – महाराष्ट्र का सीमावर्ती आदिवासी बाहुल्य बैतूल जिला अपने देशी महुआ और उसकी पहली धार की महुआ की शराब के लिए जाना जाता था। थोड़ी पहचान मिली जब दूर परदेश में बैतूल के महुआ के फलो से बनी काफी – चाय – पेय प्रदार्थ को लेकर गोरे अग्रेंजो में उत्सुकता देखने को मिली। बीते कुछ महीनो से बैतूल जिला नशा के कारोबार का केन्द्र बनते जा रहा था। अचानक जिले में अफीम की खेती का भाड़ा फूटना सबसे बड़ा चौकान्ने वाला घटनाक्रम है। जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के खेतो में गंाजा के पौधो की जगह अफीम के डोडे दिखाई पडऩे लगे है। मंगलवार को सारणी थाना क्षेत्र के धंसेड गांव में करीब एक एकड़ जमीन पर अफीम के पौधे मिले हैं। पुलिस ने एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने धंसेड में कार्रवाई की। यहां मिली खेती में कुछ छोटे और कुछ बड़े पौधे पाए गए हैं। इससे पहले रानीपुर थाना क्षेत्र के सड़कवाड़ा में भी एक एकड़ में अफीम की खेती पकड़ी गई थी। इस घटना के बाद पुलिस ने सभी थाना क्षेत्रों में कोटवारों और मुखबिर तंत्र को सक्रिय कर दिया था। उन्हें इस तरह की गतिविधियों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए थे।
ऐसा पहली बार नहीं हुआ है और न हो रहा है कि जिले में माफिया चाहे वह देशी महुआ शराब , विदेशी मदीरा से जुड़ा हुआ हो या फिर अफीम – गांाजा – हीरोइन – जैसे मादक नशा से जुड़ा माफिया अपने काम – काज में तीन फेक्टर को प्राथमिकता देता है। जानकार सूत्रो का कहना है कि नशे के कारोबार में त्रिपल एम फेक्टर काम कर रहा है। जिले में अनुसूचित जन जाति – अनुसूचित जाति की महिला – पुरूष को आगे करके माफिया सगगना जो कि एम फैक्टर का सबसे बड़ा सरगना है उसके द्वारा अपने पूरे कारोबार(गैंग) में ऐसे लोगो को जोड़ता है,जो मरने – मारने को उतारू रहते है। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के ग्रामीणों (महिला – पुरूषो) को अच्छा – खासा प्रलोभन देकर उनकी ही जमीन पर अफीम जैसे मादक प्रदार्थो की खेती के लिए राजी करते हैं। इसके लिए वे प्रति एकड़ एक मुश्त बड़ी राशि भी दी जा रही है। आशंका है कि घोड़ाडोंगरी सारणी क्षेत्र में कई और जगह भी अफीम की खेती मिल सकती है। फिलहाल इस मामले में पुलिस ने एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है और मामले की जांच की जा रही है।
उल्लेखनीय है कि बैतूल में पुलिस ने अवैध अफीम की बड़ी खेती का भंडाफोड़ किया है। रानीपुर थाना क्षेत्र के सड़कवाड़ा गांव में मुखबिर की सूचना पर की गई कार्रवाई में एक एकड़ जमीन पर अफीम के लाखों पौधे मिले हैं। खेत मालिक भिखारीलाल धुर्वे और एक अन्य को हिरासत में लिया गया है। एएसपी कमला जोशी और एसडीओपी सारणी रोशन जैन के नेतृत्व में की गई इस कार्रवाई में बैतूल कोतवाली समेत कई थानों की पुलिस टीम शामिल थी। मौके पर पाई गई अफीम की फसल में कुछ पौधों में फल लग चुके हैंए जबकि कुछ अभी फूल की स्थिति में हैं। वर्तमान में इस खेती की कीमत दस लाख रुपए से अधिक आंकी गई है, लेकिन मार्च तक फसल के पूरी तरह पकने पर यह कीमत करोड़ों रुपए तक पहुंच सकती थी। पुलिस ने मजदूर लगवा कर फसल उचकवाना शुरू कर दिया है। पौधों के 20 – 20 के बंडल बनवाए । राजस्व विभाग की टीम भी मौके पर पहुंचकर जमीन का सर्वे कर रही है और फसली दस्तावेजों की जांच कर रही है।पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है कि वह कब से यह अवैध खेती कर रहा था और इस नशीले पदार्थ की खरीद – बिक्री के लिए किन – किन लोगों से उसका संपर्क था।
प्रारंभिक तौर पर जानकारी मिली है कि खेत मालिक ने यह खेत चोपना इलाके के किसी व्यक्तिको ठेके पर दिया हुआ है। पुलिस उसकी भी तलाश कर रही है। जानकारों के मुताबिक अफीम की खेती के लिए ठंडा मौसम चाहिए। जब फसल में डोडा आ जाता है, उस समय हल्की गर्मी की जरूरत पड़ती है। गर्मी से डोडे को चीरा लगाकर दूध निकाला जाता है। यह दूध जब रात भर में जम जाता है, तब डोडे के आसपास उसे कलेक्ट कर लेते हैं। इस दौरान एक डोडे से सौ से डेढ़ सौ ग्राम अफीम निकल जाती है। किसी – किसी पौधे में यह वजन 200 ग्राम भी हो जाता है। आमतौर पर यह मंदसौर, नीमच, राजस्थान के चित्तौडग़ढ़ क्षेत्र, मध्यप्रदेश के मालवा बेल्ट में उगाई जाती है, जिसके लिए सरकार की अफीम नीति बनी हुई है। जबकि खुले बाजार में यह 80 हजार रुपए से डेढ़ से तीन लाख रुपए किलो तक बिकती है। पंजाब के तस्कर इसे कालाबाजार में भी खरीदते हैं। हाल ही में अफीम की खेतीबाड़ी के बहुचर्चित प्रकरण में पुलिस ने खेत मालिक भिखारी लाल को पकड़ा। जबकि, पुलिस को फरार आरोपी सोनू बंगाली की तलाश है।







