इन प्रकरणों पर हुई चर्चा
कार्यक्रम में उमेश फरकाडे अपनी माता जी के साथ एसआईएफ के आयोजन में पहुंचे और बताया कि पिछले कोर्ट की तारीख पर उनकी पत्नी और सास के बीच मारपीट हो गई थी जिसका उल्लेख स्थानीय अखबारों में भी हुआ था। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में ऐसा माहौल नहीं होना चाहिए जो तनाव और मानसिक दबाव बढ़ाए।
वहीं दूसरे मामले में एक वृद्ध दंपत्ति ने अपनी बहू द्वारा लगाए गए झूठे केस के कारण अपनी परेशानी साझा की। उन्होंने बताया कि उनका बेटा डिप्रेशन में है और अकेले रहता है क्योंकि वह नौकरी में व्यस्त है। माता-पिता ने कहा, हमें दिन-रात उसकी चिंता रहती है और उसकी मानसिक स्थिति के कारण हम बहुत परेशान हैं। दोनों ही मामलों ने झूठे आरोपों के कारण होने वाले मानसिक तनाव और परिवारों पर पड़ने वाले गहरे प्रभाव को उजागर किया।







