तहसीलदार ने दिया आदेश आबादी भूमि शासकीय भूमि की श्रेणी में आती है जिसका अंतरण नहीं किया जा सकता : फिर भी घोड़ाडोंगरी में धड़ल्ले से बिक रही आबादी भूमि
तहसीलदार घोड़ाडोंगरी ने आबादी भूमि 667 के एक केस में फैसला दिया है कि आबादी भूमि शासकीय भूमि की श्रेणी में आती है जिसका अंतरण नहीं किया जा सकता। अतः आबादी मद की आवेदित भूमि पर नामांतरण किया जाना संभव नहीं है। तहसीलदार ने नियमों का हवाला देते हुए नामांतरण के आवेदन को निरस्त कर दिया।
इस मामले में उच्च अधिकारी को अपील करने जब आवेदक पहुंचा तो अधिकारी ने समझाया कि आबादी भूमि शासकीय भूमि की श्रेणी में आती है जिसका क्रय विक्रय नहीं किया जा सकता हम विक्रेताओं पर एफ आई आर करने वाले हैं।
इस केस में अगर अधिकारियों के निर्णय को देखा जाए तो यह स्पष्ट हो गया है कि नियमानुसार आबादी भूमि शासकीय भूमि की श्रेणी में आती है और आबादी भूमि का क्रय विक्रय नहीं किया जा सकता फिर भी घोड़ाडोंगरी नगर परिषद क्षेत्र में आबादी भूमि का जमकर क्रय विक्रय हो रहा है और जमीन को बेचने के लिए नगर परिषद घोड़ाडोंगरी द्वारा बाकायदा एनओसी जारी की जाती है संबंधित पटवारी द्वारा भी जमीन के विक्रय के लिए नजरी नक्शा वगैरा बनकर दिया जाता है। जब शासन में बैठे नगर परिषद और राजस्व विभाग के कर्मचारी ही विक्रय के लिए यह दस्तावेज बना कर देते हैं तो फिर कार्यवाही किस पर होना चाहिए।
सबसे पहले तो नगर परिषद द्वारा एनओसी जारी करने वाले अधिकारी पर कार्रवाई होनी चाहिए जिन्होंने आबादी भूमि के विक्रय के लिए एनओसी बनाकर दे दी। संबंधित पटवारी पर भी कार्रवाई होना चाहिए जो आबादी भूमि विक्रय के लिए दस्तावेज या यूं कहें नजरी नक्शा बना कर देते हैं और उसे पर यह कहीं नहीं लिखते की आबादी भूमि शासकीय भूमि की श्रेणी में है और इसका क्रय विक्रय नहीं हो सकता।
घोड़ाडोंगरी नगर परिषद क्षेत्र में इसी मिली भगत के चलते आबादी भूमि में सैकड़ो प्लांट बिक चुके हैं बिक भी रहे हैं और नामांतरण भी हो रहे हैं। यही है कि एक अधिकारी नियमों का हवाला देकर रोक देता है तो दूसरा अधिकारी चुपचाप कब नामांतरण कर देता है पता ही नहीं चलता।
नगर परिषद घोड़ाडोंगरी क्षेत्र में आबादी भूमि पर खरीदी बिक्री का कार्य जोरों पर है लोगों ने जितनी जमीन के मालिक वो है नहीं उससे ज्यादा जमीन बेच रहे हैं फिर भी उन पर नकेल कसने में जिम्मेदार लेट लतीफी बरत रहे हैं।तहसीलदार घोड़ा डोंगरी ने आबादी भूमि 667 के नामांतरण को लेकर यह आदेश दिया है कि
प्रकरण का अवलोकन किया गया। आवेदित भूमि आबादी मद में दर्ज होने से शासकीय भूमि की श्रेणी में आती है जिसका अंतरण नहीं किया जा सकता अतः आबादी मद की आवेदित भूमि पर नामांतरण किया जाना संभव नहीं है। अतः आवेदक का आवेदनपत्र म. प्र.भू.रा. संहिता 1959 संशोधित 2018 की धारा 109, 110 में वर्णित प्रावधानों के तहत प्रचलन योग्य नहीं होने से निरस्त किया जाता है।
पक्षकारों को सूचना हो।
प्रकरण नस्तीबद्ध







