यहां अपने ही हराते हैं

प्रवीण अग्रवाल

प्रदेश में चुनावी सरगर्मियां प्रारंभ हो चुकी है । मतदान को कुछ ही दिन शेष रह गए हैं। ऐसे में चुनावी चर्चाओं का दौर हर चौक चौराहे पर देखा जा सकता है । बैतूल जिले की घोड़ाडोंगरी विधानसभा को लेकर लोगों में चर्चाएं हैं कि यहां पर अपने ही हराते हैं अन्य पार्टी अपने दमखम पर नहीं जीतती । जब अपने ही बेगाने हो जाते हैं तो विपक्षी पार्टी को जीत का ताज पहना देते हैं । घोड़ाडोंगरी विधानसभा को लेकर जो प्रमुख चुनाव चर्चाओं में रहे उनमें 1990 में हुए विधानसभा चुनाव भी चर्चाओं में रहे हैं । उस समय कांग्रेस ने हर्षलता सिबलुनको घोड़ाडोंगरी विधानसभा से टिकट दिया था। जो घोड़ाडोंगरी विधानसभा क्षेत्र की रहवासी नहीं थी ऐसा माना जाता है और उनका टिकट मिलने से कांग्रेसी भी खासे नाराज थे । जिसके कारण कांग्रेसियों ने भी अपने प्रत्याशी के समर्थन में क्षेत्र में जनसंपर्क नहीं किया था । चर्चाओं की माने तो उस समय के भाजपा प्रत्याशी ने सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी।

इसी तरह 2003 का विधानसभा चुनाव भी चर्चाओं में है । जब कांग्रेस से दो बार के विजई प्रत्याशी पूर्व मंत्री प्रताप सिंह उईके मैदान में थे और प्रताप सिंह ने अपने कार्यकाल में जनता के बीच कुछ ऐसी छवि बनाई थी कि शाहपुर ,भोरा, चिचोली क्षेत्र से लगे गांव में कई गांव में लोग उनके पांव धोकर पानी पीते थे। लोगों द्वारा मिले मान सम्मान का उनमें कुछ गुरुर आ गया था ऐसा चर्चाओं में है। कहा जाता है कि घोड़ाडोंगरी में उन्होंने कुछ ऐसा कह दिया था की इधर से वोट नहीं भी मिलेंगे तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता मैं जीतूंगा। चर्चाएं हैं कि उनकी यह बात का असर घोड़ाडोंगरी तहसील क्षेत्र के गांवो में हुआ और उन्होंने उस चुनाव में लगभग 13 हजार 735 वोट से हार का सामना करना पड़ा था ।

कुछ ऐसी ही चर्चाओं में घोड़ाडोंगरी विधानसभा का 2018 का भी विधानसभा चुनाव जाना जाता है । जब भाजपा प्रत्याशी गीता उइके का भाजपा के लोगों ने ही अंदरुनी विरोध कर उन्हें 17 हजार 927 वोट से हार का सामना करना पड़ा था । ऐसे ही चुनाव के कारण लोगों में चर्चाएं हैं कि यहां प्रमुख पार्टी को अपने ही लोगों के कारण हार का सामना करना पड़ता है

वर्तमान में भी विधानसभा चुनाव की की सरगर्मियां प्रारंभ है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों ने इस बार शायद ऐसे ही अंदरूनी विरोध को थामने के लिए नए प्रत्याशियों को मौका दिया है । दोनों ही पार्टीयों ने गांव-गांव में लोगों से सर्वे कराकर नए उम्मीदवारों को मौका दिया है। इस विधानसभा से भाजपा से मंगल सिंह प्रमुख दावेदार के रूप में जाने जा रहे थे ।उनकी टिकट कटने से वह भी नाराज दिखाई दिए ।अपनी नाराजगी उन्होंने पार्टी के बड़े नेताओं तक पहुंचाई । कुछ ऐसी ही स्थिति कांग्रेस में भी देखने में आई विधायक ब्रह्मा भलावी यहां से प्रमुख दावेदार के रूप में जाने जा रहे थे और निष्पक्ष छवि के ब्रह्मा भलावी की टिकट कटने की संभावना भी लगभग काम ही थी। अंतिम दौर में उनकी टिकट भी कट गई । जिसको लेकर वह अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ जी तक भी पहुंचे। नाराज होकर फेसबुक पर उनकी शेरो शायरी लोगों में चर्चा का केंद्र बनी रही।

आखिरकार अंत में वह भी कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में चुनाव मैदान में उतर गए हैं। कुछ ऐसी ही स्थिति भाजपा में भी देखी जा रही है । यहां भी मंगल सिंह कुछ समय तक नाराज रहने के बाद अब भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में चुनाव मैदान में उतर गए हैं। इस बार का विधानसभा चुनाव कुछ ऐसा देखा जा रहा है कि दोनों ही पार्टियों में कोई आंतरिक विद्रोह दिखाई नहीं देता । दोनों ही पार्टिया बड़े ही जोर जोर से अपने उम्मीदवार के समर्थन में गांव गांव में जाकर जनसंपर्क कर रही हैं ।इन सब परिस्थितियों के कारण घोड़ाडोंगरी विधानसभा चुनाव के परिणाम इस बार चौंकाने वाले होंगे ।

क्षेत्र में भाजपा और कांग्रेस के पदाधिकारी ,कार्यकर्ता पूरी मेहनत के साथ अपने पक्ष में समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं। जिससे दोनों ही पार्टी के लोग अपने प्रत्याशी की जीत का दावा कर रहे हैं और मतदान के बाद परिणाम आने पर ऊंट किस करवट बैठेगा। रिजल्ट किसके पक्ष में आएगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन यह निश्चित है कि इस बार के विधानसभा के चुनाव में दोनों ही पार्टी के कार्यकर्ताओं, पदाधिकारी को अपनी मेहनत के दम पर बिना किसी का विरोध किये कितने वोट अपने पक्ष में ले जाते हैं यह पता चल जाएगा ।