ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने मनाई लोह पुरुष कहलाने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल जन्म जयंती एवं इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि
घोड़ाडोंगरी ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने मनाई लोह पुरुष कहलाने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल जन्म जयंती एवं इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि lरानीपुर l घोड़ा डोंगरी ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष नरेंद्र कुमार महतो के तत्वाधान में आज ग्राम हीरावाड़ी में सीताराम पटेल की आवास पर सरदार वल्लभभाई पटेल एवं भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की छाया प्रति के सामने दीप प्रज्वलित कर सरदार वल्लभभाई पटेल की जन्म जयंती मनाई गई इस मौके पर ब्लॉक अध्यक्ष नरेंद्र कुमार महतो ने उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भारत के लौह पुरुष कहलाने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल के जन्म दिवस को हम राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाते हैं। इस दिन भारत के एकता और अखड़नता की सुरक्षा करने का प्रण लिया जाता है। सरदार पटेल भारत के पहले गृह मंत्री थे, जिन्हें उनकी हिम्मत और गजब की लीडरशिप के लिए प्यार से सरदार बुलाया जाता है।
इन्हें अखण्ड भारत के निर्माण के लिए जाना जाता है। आजादी के बाद भारत को एक राष्ट्र बनाने के लिए इन्होंने पूरे भारत में घूमकर सभी रजवाड़ों को एक कर आज के भारत का निर्माण किया था। इसलिए साल 2014 से इनके जन्मदिन को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन इनकी हिम्मत, नेतृत्व और भारत की अखण्डता को मनाया जाता है। इसी अवसर पर जानते हैं सरदार पटेल के जीवन से जुड़ी कुछ खास बातों के बारे में।
सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 में गुजरात के नादियाद जिले में हुआ था। इनके पिता का नाम झवेरभाई पटेल और माता का नाम लाडबा बेन था। इनके पिता किसान थे। सरदार पटेल के बारे में कहानी मशहूर है कि वे इंग्लैण्ड जाकर वकालत पढ़ना चाहते थे। इनके इंग्लैण्ड की टिकट वी.जे. पटेल के नाम से थी। जब इन्हें पता चला कि इनके बड़े भाई भी इंग्लैण्ड जाकर वकालत की पढ़ाई करना चाहते हैं, तो इन्होंने खुशी-खुशी अपनी टिकट उन्हें दे दी। ऐसी निस्वार्थ भावना के धनी थे पटेलइस कारण कहलाए पटेल…सरदार पटेल ने 1928 में बारडोली में अंग्रेजों के बढ़ाए गए जमीन के कर के खिलाफ किसानों को एक-जुट कर आंदोलन किया था। बारडोली में सुखा पड़ने की वजह से किसान कोई फसल नहीं उगा पाए थे और इस वजह से वे कर नहीं चुका सकते थे। अंग्रेजी सरकार से विनती करने पर भी वे कर माफ करने को राजी नहीं हुए। तब वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में बारडोली के किसानों नें आंदोलन शुरू किया, जिसे बारडोली आंदोलन के नाम से जाना जाता है। यह आंदोलन सफल हुआ और तब से वल्लभभाई पटेल को सरदार कहा जाने लगा।
ऐसे बने भारत के लौह पुरुष…
आजादी के बाद लगभग 500 से भी अधिक रजवाड़े, जो स्वतंत्र रूप से अपने क्षेत्र पर राज कर रहे थे, उन्हें सरदार पटेल ने भारतीय यूनियन में शामिल किया। वह भी बिना किसी प्रकार की हिंसा का सहारा लिए हुए। उनकी इस सराहनीय इच्छाशक्ति और भारत को एकजुट करने के दृढ़ संकल्प के कारण इन्हें भारत का लौह पुरुष कहा जाता है कार्यक्रम के अंत में भारत की आयरन लेडी इंदिरा गांधी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी एक अजीम शख्यियत थीं। उनके भीतर गजब की राजनीतिक दूरदर्शिता थी। इंदिरा का जन्म 19 नवंबर, 1917 को हुआ। पिता जवाहर लाल नेहरू आजादी की लड़ाई का नेतृत्व करने वालों में शामिल थे। वही दौर रहा, जब 1919 में उनका परिवार बापू के सानिध्य में आया और इंदिरा ने पिता नेहरू से राजनीति का ककहरा सीखा।
मात्र 11 साल की उम्र में उन्होंने ब्रिटिश शासन का विरोध करने के लिए बच्चों की वानर सेना बनाई। 1938 में वह औपचारिक तौर पर इंडियन नेशनल कांग्रेस में शामिल हुईं और 1947 से 1964 तक अपने प्रधानमंत्री पिता नेहरू के साथ उन्होंने काम करना शुरू कर दिया। ऐसा भी कहा जाता था कि वह उस वक्त प्रधानमंत्री नेहरू की निजी सचिव की तरह काम करती थीं,l में मुख्य रूप से घोड़ा डूंगरी विधानसभा कांग्रेस प्रत्याशी राहुल उईके, घोड़ाडोगरी ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष नरेंद्र कुमार महतो, घोड़ाडोंगरी मंडलम अध्यक्ष अशोक राठौड़, पूर्व सरपंच नंदकिशोर उईके, विक्रांत महतो, दुष्यंत महाले, हरप्रीत सोनू खनूजा, सरपंच मनोज धुर्वे, रानीपुर मंडलम अध्यक्ष शिवनाथ यादव, प्रहलाद धुर्वे, कन्हैया राठौर राजेश नरे, राजू बढ़िया, अनिल झल्लारे, संजू जावलकर सहित एक सेकंड़ा से अधिक कांग्रेसी कार्यकर्ता मौजूद थे







