इस विधानसभा में जीत हार का अंतर 394 वोट का भी रहा है
विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां प्रारंभ हो चुकी है। हर उम्मीदवार अपने आपको जिताने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। सुबह से लेकर देर रात तक लोगो से संपर्क कर समर्थन जुटाने में प्रत्याशी लगे हुए हैं।
घोड़ाडोंगरी विधानसभा में अभी तक हुए चुनाव को देखा जाए तो यहां पर भाजपा और कांग्रेस में सीधी टक्कर होती देखी गई है। चुनाव परिणामों को देखें तो दोनों ही पार्टियों में हार जीत का अंतर कुछ हजार के बीच में ही सिमटकर रह जाता है ।अभी तक हुए 14 विधानसभा चुनाव के आंकड़े चौंकाने वाले हैं ।
जिले की सबसे बड़ी विधानसभा घोड़ाडोंगरी में 1962 के विधानसभा चुनाव में मात्र 394 वोट के अंतर से हार जीत हुई थी। इसी तरह 1967 में 4816 वोट के अंतर से हार जीत हुई। 1972 में 7242 वोट के अंदर से हार जीत हुई ।
1977 में 4846 वोट के अंतर से हार जीत हुई । 1980 में 3097 वोट के अंतर से हार जीत हुई । 1985 में 2973 वोट के अंतर से फैसला हुआ।
1990 में 20883 वोट के अंतर से हार जीत हुई ।उसके अगले चुनाव में यह आंकड़ा 1993 में सिमटकर केवल 2817 वोटो का रह गया ।1998 में 7563 मतों के अंतर से हार जीत हुई।
2003 में 13735 वोट के अंतर से हार जीत का फैसला आया । 2008 में भी यह आंकड़ा सिमटकर 4127 वोट के अंतर पर आ गया । 2013 के विधानसभा चुनाव में 8084 वोटो के अंतर से हार जीत का फैसला आया।
2016 में 13182 वोटो के अंतर से हार जीत का फैसला आया। 2018 के चुनाव में 17927 वोट के अंतर से हार जीत का फैसला आया। इस बार के विधानसभा चुनाव में प्रमुख राजनीतिक पार्टी भाजपा और कांग्रेस ने नए उम्मीदवारों को मौका दिया है। माना जाता है कि घोड़ाडोंगरी विधानसभा क्षेत्र के मतदाता अधिकांशत: नए उम्मीदवारों को पसंद करते हैं ।
यहाँ लोग आपसी हँसी – मजाक में कहते भी है कि पहचानने के बाद वोट नही देते ।अभी तक देखा जाए तो हर पार्टी ने इस विधानसभा सीट को जीतने के लिए नए चेहरों को मौका दिया है और जनता ने भी उन्हें पसंद किया है।
इस बार स्थिति ऐसी है कि दोनों ही प्रमुख पार्टियों ने नए चेहरों को मौका दिया है। जो रात दिन लोगों के बीच जाकर अपने पक्ष में समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं। लेकिन चुनाव को केवल
इतने दिन शेष बचे हैं कि कोई भी उम्मीदवार चाहे तो भी घोड़ाडोंगरी विधानसभा क्षेत्र के 365 मतदान केदो के मतदाताओं तक जाकर संपर्क नहीं कर सकता ओर इस विधानसभा क्षेत्र में मात्र कुछ हजार वोटो से होने वाली हार जीत ने समर्थकों को चिंता में डाल दिया है ।







