जाने कब मना रहे मकर सक्रांति पर्व,महत्व
*इस वर्ष ता:- 14/1/2023 शनिवार को केवल पतंग उत्सव होगा और मकर संक्रांति का त्योहार रविवार ता:-15/1/2023 को मनाया जाएगा, जानिए मकर संक्रांति का महत्व और महिमा क्या है…*
यह मकर संक्रांति सूर्य की पूजा का त्योहार है, जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है, उस अवधि को मकर संक्रांति कहा जाता है, और इसके साथ खरमास भी समाप्त हो जाता है, और सभी शुभ कार्यों की शुभ शुरुआत भी की जाती है, पुराणों के अनुसार, सूर्य मकर संक्रांति से दक्षिणायन से उत्तरायण की तरफ चलता, ढलता है, और ऐसा शुभ संयोग प्राप्त होता है ।
आइए देखें मकर संक्रांति का इतिहास और महत्व,
*मकर राशि में सूर्य का प्रवेश,* ता:-14/1/ 2023 शनिवार की रात्रि समय 08.57 बजे से शुरू होगा । ईस वजह से दूसरे दिन सुर्योदय के बाद माना गया है, ता:-15/1/2023 रविवार को समय सुबह 07:17 बजे से शाम 05: 45 बजे तक का पुण्य काल है, और महा-पुण्य काल समय, ता:- 15/1/2023 रविवार को समय सुबह 07: 17 बजे से सुबह 09: 00 बजे तक होगा, जिसकी अवधि 01 घंटे 42 मिनट तक है,
पुण्य काल और महापुण्य काल के दौरान स्नान करना और दान करना शुभ माना जाता है, जिसमें गाय और घास, कुत्ते और रोटी, पक्षीओ को दाना, चिट्टीयों को नगरां, गरीबों को अन्नदान, वस्त्रदान आदि शामिल हैं । देव मंदिरों को भी दान दिया जाता है, और इस दिन तिल्ली, गन्ना और तिल्ली गुड़की बनी वस्तुओं का दान किया जाता है, ईस दिन किया गया दान पुण्य आम दिनों में किये गए दानों से कइ गुना यादा और सर्वोपरि माना गया है,
मकर संक्रांति हिंदू धर्म में एक बहुत ही खास त्योहार है । यह त्योहार वसंत के आगमन का भी प्रतीक है, जो पौष के महीने में मनाया जाता है जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में जाता है, इस वर्ष का यह त्योहार ता:-15/1/2023 मनाया जाएगा, कई जगहों पर इसे खिचड़ी उत्तरायण और लोहड़ी या लोहरी भी कहा जाता है । मकर संक्रांति के साथ ही मौसम भी बदलना शुरू हो जाता है । इसके अलावा मकर संक्रांति के दिन नौ ध्यान या सात ध्यान की खिचड़ी बनाना भी विशेष महत्व का माना जाता है । इस दिन सूर्य पूजा, स्नान दान का विशेष महत्व बताया गया है । मकर संक्रांति से खरमास की समाप्ति के साथ एक नए महीने की शुरुआत का प्रतीक है,







