नावालिग लड़की के साथ बलात्संग करने के जघन्य एवं सनसनीखेज प्रकरण में आरोपी को आजीवन कारावास

 

7 वर्षीय नावालिग लड़की के साथ बलात्संग करने के जघन्य एवं सनसनीखेज प्रकरण में आरोपी राधेश्याम उर्फ राधू को ह्यी आजीवन कारावास और 5000 रुपये के जुर्माने की सजा

माननीय अपर सत्र न्यायालय, भैंसदेही, जिला-बैतूल ने 7 वर्षीय नावालिग लड़की के साथ बलात्संग करने के आरोपी राधेश्याम उर्फ़ राधू पिता साहेबलाल बारपेटे, उम्र 30 निवासी ग्राम चिचोलीढाना, थाना- भैंसदेही, जिला बैतूल को धारा 342, 376 ए.बी. भादवि एवं धारा 5 (एम), 6 पाक्सो एक्ट में दोषी पाते हुए धारा 342 भादवि में 1 वर्ष के कठोर कारावास एवं 1000 के अर्थदंड से तथा धारा 5(एम), 6 पाक्सो एक्ट में आजीवन कारावास और 5000 रुपये के अर्थदंड से दण्डित किया है माननीय न्यायालय ने अपने निर्णय में यह भी आदेशित किया है कि अभियुक्त राधू उर्फ़ राधेश्याम उसके शेष प्राकृत जीवन के लिए कारावास में रहेगा। उल्लेखनीय इस प्रकरण को राज्य शासन द्वारा जघन्य एवं सनसनीखेज प्रकरण के रूप में चिन्हित किया गया था। इस प्रकरण में म.प्र. राज्य की ओर से अभियोजन का संचालन सहायक जिला अभियोजन अधिकारी, भैंसदेही, जिला-बैतूल श्री मनवीर सिंह ठेनुआ द्वारा किया गया है।

अभियोजन का मामला

अभियोजन का मामला संक्षेप में इस प्रकार है कि अभियोक्त्री की बड़ी बहन फरियादी ने थाना भैंसदेही में इस आशय की रिपोर्ट लेख करायी थी कि वह दिनांक 16/10/23 को दिन के लगभग 11 बजे अपनी चारो बहनों के साथ व मोहल्ले के बच्चो के साथ अपने घर के सामने खेल रही थी। तभी अभियुक्त राधू उर्फ़ राधेश्याम वहा पर आया था और उसकी छोटी बहन अभियोक्त्री से लाड करने का कहने लगा था। उसी समय वह मोहल्ले बच्चो के साथ दुर्गा जी के दर्शन करने के लिए गांव में चली गयी थी और अभियोक्त्री और अभियुक्त राधू उर्फ राधेश्याम वही पर रुक गए थे। वह और बच्चे दर्शन करके वापस आये तो उन्होंने देखा कि अभियोक्त्री वहा पर नही दिख रही थी और उसके घर का दरवाजा बंद था।

उन्होंने घर का दरवाजा खोलने का प्रयास किया लेकिन दरवाजा नही खुला। इसके बाद उन्होंने घर के पीछे से जाकर बागुड तोड़कर घर के पीछे के दरवाजे में हाथ डाल कर साकल खोली। दरवाजा खुलने पर उन्होंने देखा कि घर के तीसरे कमरे में कोई व्यक्ति कथडी ओढ़कर सोया हुआ था। उन्होंने वहां सोये व्यक्ति की कथड़ी खींचकर देखा कि अभियोक्त्री की स्लेक्स निकली हुई थी, वह कथड़ी पर लेटी हुई थी और उसके

बाजू में ही अभियुक्त राधू लेटा हुआ था और उसकी भी पेंट निकली हुयी थी । अभियुक्त राधू का एक हाथ अभियोक्त्री की बाथरूम पर था। उसने अभियुक्त को चिल्लाया तो वह वहा से भाग गया । उसके चिल्लाने की आवाज सुनकर वहा पर मोहल्ले के अन्य व्यक्ति आ गये। अभियोक्त्री ने उसकी बाथरूम में दर्द होना बताया था ।

अभियोक्त्री की बड़ी बहन फरियादी की सूचना के आधार पर थाना भैंसदेही में अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना की गयी। प्रकरण में आवश्यक विवेचना पूर्ण कर अभियोग पत्र माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया ।

प्रकरण का विचारण माननीय अपर सत्र न्यायालय, भैंसदेही, जिला-बैतूल द्वारा किया गया । प्रकरण में म.प्र.राज्य की ओर से अभियोजन का संचालन करते हुए सहायक जिला अभियोजन अधिकारी, भैंसदेही, जिला बैतूल श्री मनवीर सिंह ठेनुआ ने माननीय न्यायालय के समक्ष अभियोजन मामले को संदेह से परे प्रमाणित किया और अपने तर्क प्रस्तुत किये । अभियोजन के तर्कों से सहमत होते हुए माननीय न्यायालय ने अभियोजन मामले को संदेह से परे प्रमाणित मानकर अभियुक्त राधेश्याम उर्फ़ राधू पिता साहेबलाल, उम 30, निवासी ग्राम चिचोलीढाना, थाना-भैंसदेही, जिला बैतूल को धारा 342, 376 ए. बी. भादवि एवं धारा 5 (एम), 6 पाक्सो एक्ट में दोषी पाते हुए धारा 342 भादवि में 1 वर्ष के कठोर कारावास एवं 1000 के अर्थदंड से तथा धारा 5 (एम), 6 पाक्सो एक्ट में आजीवन कारावास और 5000 रुपये के अर्थदंड से दण्डित किया है। माननीय न्यायालय ने अपने निर्णय में यह भी उल्लेख किया है कि आजीवन कारावास का अभिप्राय अभियुक्त के शेष प्राकृत जीवन के लिए कारावास होगा ।