भगवान को मानने वाले तो बहुत है पर भगवान की मानने वाले कौन हैं :योग शक्ति आस्था दीदी

 

घोड़ाडोंगरी। श्रीमद् भगवत गीता ज्ञान प्रवचन के तीसरे दिन योग शक्ति आस्था दीदी ने अपने प्रवचन में कहा कि पिता की पहचान पाना बहुत जरूरी है शिवजी को शराब गांजा भांग जैसी नशीली वस्तुएं चढ़ाने की परंपराओं को छोड़ने का समय है शिव पुराण में ऐसा कहीं नहीं लिखा है।

प्रभु को चार प्रकार से भजते हैं एक जो संकट के समय याद करते हैं। इंसान की फितरत गिरगिट की तरह बदलने की है। भगवान से मन्नत मांगना सौदा करने के समान है ।प्रभु के दिए हुए गिफ्ट को प्रभु को लौटाना भक्ति नहीं है ।उनसे क्या छुपाना जिनके हाथ में डोरी है।

दो तरह के लोग हैं धन दौलत संतान मांगते हैं । परमात्मा से परमात्मा को ही मांग लो सब कुछ मिल जाएगा। 11वीं अध्याय में भगवान ने अपनी पहचान में बताया है कि एक ही सूर्य पूरे विश्व को उजाला दे रहा है। ऐसे हजारों सूर्य एक साथ प्रकट हो जाए कुछ ऐसा ही स्वरूप अर्जुन ने देखा परमात्मा के स्वरूप का वर्णन आज की कथा में करते हुए उन्होंने कहा कि परमात्मा निराकार है पर जब धरती पर आते हैं तब साकार रूप धारण करते हैं। जब तक दिव्य ज्ञान नहीं मिलेगा तब तक प्रभु की पहचान करना संभव नहीं है। बारिश में सूर्य नहीं आता तो कई प्रकार के कीड़े मकोड़े जन्म ले लेते हैं अंधेरा होगा तो ठोकरे खानी पड़ेगी जब परमात्मा का प्रकाश नहीं आएगा तब तक जीवन में अंधकार छाया रहेगा। बहुत कुछ गलत होने के कारण परमात्मा से दूरी है प्रकाश ही शिव है जो हमारे अंदर के अंधेरे को मिटा सकता है।

प्रभु का दर्शन करने के लिए अंदर की आंखें खुली होना जरूरी है। अलग-अलग संप्रदाय के लोग आपस में – मैं बडा की लड़ाई करते हैं अभिमान लोभ लालच में एक दूसरे का हक हथियाना ।इतने से ही इतना झेलना पड़ेगा ।मैं की भूख बढ़ जाती है ।अपने अंदर दिव्य गुण लाने पर ही धरती पर रामराज आएगा। सभी धर्म में परमात्मा को निराकार ही माना गया है भगवान से एक संबंध बना लेना चाहिए भगवान को मानने वाले तो बहुत है पर भगवान की मानने वाले कौन हैं। जिस दिन से भगवान की मानेंगे जीवन में जितने ताले लगे हैं सब खुल जाएंगे ।जिन्हें प्रभु मानते हैं उनके गुणों को अपने अंदर लाइए ऐसी भावना की डोर उसे परमपिता के प्रति रखें। भावना है तो पत्थर में भी भगवान प्रकट हो जाते हैं ।।जनसंख्या बाहुबल से बढ़कर है प्रभु का साथ जब हमारी बुद्धि में कोई बात नहीं आती है तो कहा जाता है की बुद्धि पर पत्थर पड़ गए हैं लेकिन जब इस पर राम नाम लिख दिया जाए तो यह भवसागर तर जाता है राम-राम कहने की बजाय अंतर मन में राम को बिठाना चाहिए।

शिवलिंग की तीन रेखाएं आदि मध्य और अंत को समझाती है स्थापना पालना विनाश तीनों। तीन पत्रों वाले बेलपत्र को ही शिवजी को चढ़ाया जाता है।