1 मिनट भी क्रोध पर कंट्रोल कर लिया जाए तो बड़े से बड़ा अपराध भी नहीं होगा ,आज कैदियों में 90% युवा है : आस्था दीदी

जब हम अपने अंदर परिवर्तन लाएंगे। नहीं तो भारत में राम राज्य केवल कल्पना बनकर रह जाएगा।

एक तरफ धरती मां की पूजा करते हैं दूसरी तरफ प्रदूषण और कचरा फैला रहे हैं। हमें परिवर्तन की जरूरत है। भारत माता के देश में माताओ की दुर्दशा हो रही है

घोड़ाडोंगरी

नगर के दुर्गा चौक में ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा के दूसरे दिन अपने प्रवचन में आस्था दीदी ने कहा कि परिवार में जैसा वातावरण होगा वैसी ही संतान होगी। यह समय परिवर्तन का है श्रीमद् भागवत गीता सभी बच्चों को पढ़ाई जानी चाहिए तभी परिवर्तन संभव है। आज मनुष्य में पाशविक बृत्ति बढ़ते जा रही है संसार जंगल जैसा होता जा रहा है ।

आज हम युवा दिवस सेलिब्रेट कर रहे हैं पर जब समाचार पढ़ते हैं कि कुछ युवाओं ने मिलकर एक युवती के साथ कुछ गलत किया है तो बड़ा ही दुख होता है । बाहरी प्रयास नारेबाजी भाषण सुनकर अच्छा लगता है । एक दिन याद करने से जीवन वैसा नहीं बनता अंतर शक्ति जागृत करनी होगी तभी परिवर्तन आएगा । राष्ट्रीय भोजन खिचड़ी है लेकिन जब बर्तन में पकती है तो बीमार ठीक होता है और दिमाग में पकती है तो अच्छे-अच्छे बीमार हो जाते हैं । सोशल मीडिया के इस दौर में भी ऐसे लोग हैं जो अध्यात्म से जुड़कर सब कुछ छोड़ने को तैयार हैं। क्या हम अपने जीवन में परिवर्तन नहीं ला सकते। बदला लेने से बेहतर है अपने आप को बदलना। कर्म अच्छे नहीं है तो प्रभु वरदान दे दे तो भी जीवन नहीं सुधरेगा। शिकायत करने से किस्मत नहीं बदलती कर्म करने से भाग्य बदलेगा। युवाओं के देश में कैदियों की संख्या में 90% युवा है।। 1 मिनट भी क्रोध को कंट्रोल कर लिया जाए तो बड़े से बड़ा अपराध होने से रुक जाएगा । जीवन में कुछ पढ़ो ना पढ़ो एक बार मृत्यु पुराण पढ़ना चाहिए । बुराई रूपी विचारों को मारने की शिक्षा श्रीमद् भागवत गीता देती है । मोह ही दुख देता है। भगवान तक भावनाएं पहुंचती है तो फिर बली की रीति को बदलना चाहिए ।समय के अनुसार चले जब आवश्यकता हो परिवर्तन कर लेना चाहिए ऐसी परंपरा को तोड़ दो जिससे किसी जीव का जीवन छिन जाए।

इंसान से लड़ने से कुछ नहीं होगा अपने विकारों को नष्ट करो। जहां सुख शांति प्रेम है वही स्वर्ग है । स्वर्ग अपने अंदर आएगा जब हम अपने अंदर परिवर्तन लाएंगे। नहीं तो भारत में राम राज्य केवल कल्पना बनकर रह जाएगा। एक तरफ धरती मां की पूजा करते हैं दूसरी तरफ प्रदूषण और कचरा फैला रहे हैं। हमें परिवर्तन की जरूरत है। भारत माता के देश में माताओ की दुर्दशा हो रही है । आत्मा के अंदर की बुराई को खत्म करना है तो ज्ञान जरूरी है। तुलसीदास जी को शब्द भेदी बाण लगा था रत्नावली ने तुलसीदास जी से कहा था कि जितना मोह मुझसे करते हो उतनी प्रभु से करते तो जीवन तर जाता ।

पुरुषार्थ का चंदन घीसोगे तो गुणो की खुशबू आएगी । ऐसे तो कई पतियो को पत्नी की डांट पड़ती है पर जो तुलसीदास जी को लगी वह फिर किसी को नहीं लगी। सभी आत्मा है जहां तिलक लगाते हैं वहीं आत्मा निवास करती है ।

धन सारा धरा रह जाएगा कर्म ही प्रभु तक पहुंचेंगे । मृत्यु अटल है अपने आप को आत्मा समझे। शरीर एक वस्त्र है जन्म रूपी दरवाजा मृत्यु पर बंद हो जाता है । सारा जीवन यदि पर अटका रहता है । जिस दिन आत्मा निकल जाती है उसे दिन उठाने के लिए चार लोग लगते हैं । शरीर कितना भी अच्छा हो आत्मा कभी रूपी सारथी निकल जाता है तो अर्थी बन जाता है । हमें शरीर पर नहीं आत्मा पर ध्यान देना चाहिए। आत्मा निकलने पर सभी अंग काम करना बंद कर देते हैं । अंदर बैठी आत्मा से ही सब होता है आत्मज्ञान प्राप्त करें और मृत्यु के भय से मुक्ति पाये। आत्मा शरीर रूपी कपड़े को त्याग कर नया शरीर याने नए कपड़े धारण करती है । यह अनिश्चितता का काल है 90 साल के युवा और 15 साल के बुजुर्ग भी हैं जिन में ना उत्साह है ना उमंग है टेंशन से भरे हैं ऐसे लोग युवा होकर भी बुजुर्ग हो जाते हैं ।

घर में जब शुभ कार्य होता है तो दीप जलाए जाते हैं देह के दीप में प्राणों की ज्योति है कलश पर नारियल रखे जाते हैं पांच पान के पत्ते पांच इंद्रियों हैं नारियल हमारा बाहरी आवरण है जिसे ज्ञान के दीप से तोड़ने पर अंदर सफेद और मीठा फल निकलता है। ज्ञान का घी होगा तो आत्मा की ज्योति जलेगी। बाहरी स्वरूप को भूलकर आत्म स्वरूप का सुमन पुष्प चढ़ाने का अर्थ है कि अपने मन को सुमन बनाकर भी प्रभु को अर्पित करना