*स्वरोजगार अपनायेंगे, देश समृद्ध बनायेंगे. उद्यमिता अपनायेंगे, बेरोजगारी भगायेंगे*

 

*स्वरोजगार अपनायेंगे, देश समृद्ध बनायेंगे. उद्यमिता अपनायेंगे, बेरोजगारी भगायेंगे*
_नगर पालिका मजदूर संघ ने किया स्वदेशी आन्दोलन पखवाडा शहीद बाबूगेनू बलिदान दिवस का आयोजन।_
सारनी। स्वदेशी आन्दोलन पखवाडा शहीद बाबूगेनू बलिदान दिवस का आयोजन 12 दिसंबर को नगर पालिका सभाकक्ष में किया गया। ’नगर पालिका मज़दूर संघ के जिला अध्यक्ष के के भावसार मुख्यवक्ता के रूप उपस्थित हुए। उन्होंने स्वदेशी विचार पर प्रकाश डालते हुए उक्त आंदोलन के बारे में जानकारी दी। उपस्थित लोगों को स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करने की संकल्प दिलाया। भारत को आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग सहयोग करने की अपील की।

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि स्वदेशी अर्थात स्वआधारित जीवन शैली, भारत की आत्मनिर्भता, स्वालम्बन और संप्रभुता के लिये स्वदेशी बहुत आवश्यक है। स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गांधी और बालगंगाधर तिलक ने स्वदेशी को प्रमुख हथियार के रूप में उपयोग करते हुये, समाज में स्वभाषा, स्वभूषा, स्वधर्म, स्वसंस्कृति तथा स्वदेश के प्रति गौरवपूर्ण भाव जागृत करने के लिये श्स्वदेशी आन्दोलनश् प्रारम्भ किया था। परिणाम स्वरूप एक गोदी श्रमिक बाबूगेनू ने गरीबी की हालत में रहते हुये भी स्वदेशी आन्दोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया। जब मुम्बई की गोदी (बंदरगाह) से विदेशी वस्त्रों से लदे ट्रक खाना होने लगे तो स्वदेशी आन्दोलन के अगुआई बाबूगेनू ने 12 दिसम्बर 1930 को अपना विरोध प्रगट करते हुये

एक ट्रक के सामने लेट गये। क्रूर अंग्रेज सर जेण्ट ने अपनी क्रूरता की पराकाष्टा दिखाते हुये स्वदेशी आन्दोलन को कुचलने की दृष्टि से ट्रक (लॉरी) बाबूगेनू के ऊपर चढ़ाकर कुचल दिया परिणाम स्वरूप विदेशी वस्तुओं का विरोध करते हुये बाबूगेनू ने स्वेदेशी के लिये अपने प्राणो का त्याग कर बलिदान हो गये। बाबूगेनू देश एवं समाज के समक्ष स्वदेशी के लिये अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। इसलिये भा.म.संघ, एक सामान्य गोदी मजदूर शहीद बाबूगेनू की स्मृति में उनके बलिदान दिवस 12 दिसम्बर पर स्वदेशी आन्दोलन के रूप में, स्वदेशी पखवाडा मनाते हुये स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग और विदेशी वस्तुओं के वहिष्कार हेतु समाज में जनजागरण अभियान चलाता है।

*द्वारा केके भावसार, अध्यक्ष नगर पालिका मजदूर संघ*

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