मरना लगा रहेगा, जी तो लीजिए : श्री कृष्णाश्रय

बेटा लाखों के बजाय हजारों कमाए पर परिवार के साथ रहे। आज ऐसी स्थिति आ गई है की मृत्यु पर अंतिम संस्कार में भी बच्चे नहीं आते। गधे की तरह जीवन जी रहे हैं।

बाजार से खरीदी सब्जी लाकर में नहीं रखी जाती। नारी सनातन धर्म के लिए बहुमूल्य है।

मरना लगा रहेगा, जी तो लीजिए : श्री कृष्णाश्रय

घोड़ाडोंगरी। श्री सिद्धेश्वर महादेव मंदिर वीडियो चौक में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन पंडित श्री कृष्णा श्रय शास्त्री ने कहा कि जब तक ईर्ष्या मन में है तब तक भागवत की प्राप्ति नहीं होगी। हम दूध के धुले नहीं तब तक दूसरों की बात नहीं करना चाहिए । अगर खुद में कमी नहीं होती तो मृत्यु लोक में नहीं आते । बेटा लाखों के बजाय हजारों कमाए पर परिवार के साथ रहे। आज ऐसी स्थिति आ गई है की मृत्यु पर अंतिम संस्कार में भी बच्चे नहीं आते। गधे की तरह जीवन जी रहे हैं। बच्चों को संस्कार जरुर दें । देखे वीडियो

गुस्से में आकर निर्णय नहीं लेना चाहिए। काल की गति बड़ी अटपटी है। जीवन खत्म हुआ तो जीने का ढंग आया, जब समा बुझ गई तो महफिल में रंग आया सुंदर भजन सुनाया । नारी मर्यादा तोड़ती है तो नाश होता है सनातन में नारियों का सम्मान है। कपड़ो को सही पहनना बंधन नहीं है मर्यादा है । बाजार से खरीदी सब्जी लाकर में नहीं रखी जाती। नारी सनातन धर्म के लिए बहुमूल्य है। महिलाएं परिपूर्ण रहती है वही माता सुंदरी है जिसमें अपने बच्चों को संस्कार दिए।

बच्चा गर्भ में रहता है तब से संस्कार आते हैं। स्त्रियों को सदा मर्यादित रहना चाहिए। हर जीव पर दया करनी चाहिए ।माया को सब भज रहे हैं हरि को भजने में ही सुख की प्राप्ति होगी। कलयुग केवल नाम अधारा है केवल भजन करने से उद्धार हो जाएगा जिस घर में भाई-भाई में बनती है वह घर स्वर्ग के समान है। गरमा गर्मी से रिश्ते टूट जाते हैं। प्रेम का धागा टूटने पर नहीं जुड़ता । जोड़ने पर गांठ रह जाती है।

राजा परीक्षित को श्राप मिला था सातवें दिन मृत्यु का हमारे पास भी 7 दिन ही है। मुझे ऐसी लगन तू लगा दे मैं तेरे बिना पल भर भी ना रहूं सुंदर भजन सुनाया। मरना लगा रहेगा जी तो लीजिए भजन ने श्रोताओं का मन मोह लिया। उन्होंने कहा की बीमारी से एक मरता है भय से पांच मर जाते हैं। कुछ दवा काम करती है कुछ मनोबल काम करता है । गुरु और डॉक्टर सोच समझकर बनाना चाहिए। पानी पियो छान के और गुरु करो जान के ।गीता में स्पष्ट लिखा है कि यह संसार दुखलाय है इस भवसागर के पार जाना है तो भगवान की भक्ति करनी होगी । इंद्रिय कभी संतुष्ट नहीं होती। बारिश का पानी मिट्टी पर गिरते ही गंदा हो जाता है। वैसे ही मनुष्य माया के चक्कर में बर्बाद हो रहा है अपना मनुष्य जीवन बर्बाद कर रहा है।तुलसी पूजन कर तुलसी दिवस मनाया गया।