सब धन कमाने में लगे हैं पर ले जा कौन पा रहा :श्री कृष्णाश्रय शास्त्री जी महाराज है।
बच्चों को अच्छी शिक्षा के साथ संस्कार देना भी जरूरी है
श्रीमद् भागवत कथा सिद्धेश्वर महादेव मंदिर घोड़ाडोंगरी में दूसरे दिन पंडित श्री श्री कृष्णाश्रय शास्त्री जी महाराज ने भक्तों को श्रीमद् भागवत कथा के गुण रहस्य की जानकारी देते हुए कहा का की बच्चों को अच्छी शिक्षा के साथ संस्कार देना भी जरूरी है ।
तीर्थ में स्नान करने का जो फल मिलता है वही फल श्रीमद् भागवत कथा श्रवण करने से मिलता है। जिसने जन्म लेकर भगवान का पूजन नहीं किया उसने जन्म लेकर केवल अपनी मां को कष्ट दिया। सब धन कमाने में लगे हैं पर ले जा कौन पा रहा है।
जो भी कार्य हो उसमें तो लग गया तो वह काम नहीं हो पता । अच्छे कर्म करने में ज्यादा सोचना नहीं चाहिए। माता को बच्चों के अवगुण छिपाना नहीं चाहिए । माता के हाथ में है कि वह अपने बच्चों को ठंडा पानी देने वाली सुराही की तरह बनाएं या फिर कुछ और।
धन जिसके पास नहीं है उसे धनवान सुखी लगता है धनी भी दुखी है भक्ति ही ऐसा मार्ग है जिसमें सुख पाया जा सकता है। मनुष्य जन्म बड़ी मुश्किल से मिलता है इसे यूं ही बर्बाद नहीं करें यह जीवन क्षणभंगुर है कल होगा या नहीं होगा इसका भरोसा नहीं है ।
हर काम करते-करते भजन कर सकते हैं भक्ति की कोई आयु सीमा नहीं है अपना अपने को काटता है तब ज्यादा पीड़ा होती है जब तक ठोकर नहीं लगती तब तक व्यक्ति नहीं संभालता।
अपना कुल अपनी परंपराओं को नहीं छोड़ना चाहिए। धुंधकारी की कथा का उन्होंने वर्णन किया ।उन्होंने कहा की भागवत कथा श्रवण के भेद के कारण फल में भी भेद आ जाता है। व्रत का अर्थ है पूर्ण निष्ठा ।
सत्य सोच दया दान उदार मंथन का अर्थ बताया। झूठा खाने से प्रेम बढ़ता तो गली के कुत्ते एक साथ खाते हैं तो प्रेम से रहते । परोपकार से बड़ा कोई पुण्य नहीं है। मच्छर से बचना आसान है लेकिन ईर्ष्या के मच्छर से बचना बहुत मुश्किल है। सैकड़ो लीटर दूध किंचित मात्र खटाई से फट जाता है। हम कलयुग के प्रथम चरण में है तो ईश्वर की पूजा देखने को मिल रही है। वेदव्यास ने चार वेद एक महाभारत 17 पुराण की रचना के बाद भी संतुष्टि नहीं मिल रही थी । भागवत कार्य करने से संतुष्टि जरूर मिलेगी।







