सारनी में विद्युत संयंत्र के आउटसोर्स कर्मचारी श्रमिकों की बैठक संपन्न ।
ठेका कर्मियों के वेतन से हो रही 10 हजार रूपए महीने की चोरी वासुदेव शर्मा
सारनी । सतपुडा ताप विद्युत संयंत्रों सारणी के आउटसोर्स (ठेका) कर्मियों की बैठक राम मंदिर प्रांगण में ऑल डिपार्टमेंट आउटसोर्स, अस्थाई कर्मचारी मोर्चा मप्र के अध्यक्ष वासुदेव शर्मा की उपस्थिति एवं बैतूल से अनीता पाल, राम यादव भी साथ रहीं। बैठक में राम भरोसे गुलाम, सियाराम यादव, कमोद यादव, दीपक साहू, शंकर नारनवरे, शेर सिंह, महेंद्र पचौरी, विशाल रोतिया, गजेंद्र विश्वकर्मा, अखिलेश साबित बडी संख्या में कर्मचारी शामिल हुए। बैठक में उपस्थित कर्मचारियों ने वेतन में अनियमितताएं, श्रेणी प्रमोशन न होने, नौकरी से निकालने जैसी बातें बताईं। नपा बैतूल, सारनी एवं घोड़ाडोंगरी के कर्मचारियों ने भी अपनी समस्याएं बताईं।
बैठक में ठेका कर्मचारियों से बातचीत करते हुए वासुदेव शर्मा ने कहा कि आप लोगों को केंद्र सरकार का न्यूनतम वेतन मिलना चाहिए, लेकिन दे रहें कलेक्टर दर, यही सबसे आपके साथ सबसे बडा अन्याय है, इसे समाप्त कराने के लिए संगठित होकर संघर्ष करना होगा, तभी आपके साथ हो रहा आर्थिक अन्याय समाप्त होगा।
अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने जानकारी दी कि पावर प्लांटों में काम करने वाले ठेका श्रमिक कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन अकुशल को 20,358 रूपए, अर्द्ध कुशल को 22,568 रूपए, कुशल को 24,804 एवं उच्च कुशल को 26,910 रूपए महीना वेतन मिलना चाहिए, यह सरकार द्वारा तय वेतन है, जिसके आप हकदार हैं लेकिन कंपनी आप लोगों से 10-12 हजार में काम करा रही है, इस तरह आपके वेतन से 10 हजार रूपए महीने की चोरी हो रही है, इसे चोरी नहीं लूट कहना ज्यादा ठीक होगा, दो आपके साथ हो रही है। आपके वेतन में हो रही यह चोरी रुकनी चाहिए और आपको आपकी मेहनत का पूरी कीमत मिले, इसके लिए हम लोग मप्र में ठेका श्रमिकों को संगठित कर संघर्ष का निर्माण कर रहें हैं जिसमें आप लोगों का साथ आना भी जरूरी है।
शर्मा ने कहा कि ठेका श्रमिकों के साथ अन्याय सिर्फ प्लांट में ही नहीं हो रहा, कोयला खदानों के ठेका श्रमिक भी अन्याय के शिकार हैं, इस करह कंपनियां, अघिकारी एवं सरकार मिलकर ठेका श्रमिक कर्मचारियों का शोषण सभी विभागों में कर रही है, जिसे समाप्त कराने के लिए कामगारों की व्यापक एकता जरूरी है, जल्दी ही आपको पूरा न्यूनतम वेतन मिले इसके लिए अभियान चलाया जाएगा।







