हम आमला वाले किसी के सुख से सरोकार रखे न रखे पर किसी के दुख में बिना देर किए पहुँच जाते है
हम आमला वाले किसी के सुख से सरोकार रखे न रखे पर किसी के दुख में बिना देर किए पहुँच जाते है—
(दुख!दर्द!वेदना!मातम!शोक!कष्ट!विषाद!व्यथा!तकलीफ!संताप!त्रास!अवसाद!पीड़ा!ग्लानि…..)
अपने बेटे की मृत्यु पर तड़पती एक माँ की आंखों में आज हमने ऊपर लिखे सारे शब्द देखे, प्रयागराज निवासी आलोक कुमार गौड़ (17वर्ष) का ट्रेन से गिरकर दुखद निधन हो गया। दो दिन से उनका शव आमला हॉस्पिटल में था, आज उनका परिवार आमला पहुँचा, और पूरा परिवार इस पीड़ा से बेसुध सा था। इस पर परेशानी ये कि दो दिन से मृत बेटे का जल्द अंतिम संस्कार भी करना था। हालांकि उनके पास अंतिम संस्कार के लिए पैसे तो थे,परन्तु बेटे की पीड़ा से सुध-बुध और ऐसी मानसिक स्थिति नही थी कि वे कुछ कर सके, जनसेवा कल्याण समिति को ये दुख भरी सूचना मिली तो समिति सदस्य राहुल धेण्डे,सुजल
साहू,शुभम एस.के,चंदन जैन,सुजल चौहान,अमन जाधव तुरंत हॉस्पिटल पहुँच गए, और बिना विलंब किये मृत युवक के अंतिम संस्कार की व्यवस्थाओं में जुट गए, एवं तुरंत सारी सामग्री जुटाकर शव को मोक्षधाम लेकर पहुँचे, और अंतिम संस्कार की विधि पूर्ण होने तक परिवार के साथ रहे।
बेटे की मौत से तड़पते परिवार ने जनसेवा कल्याण समिति को भीगी आंखों से धन्यवाद दिया और आमलावालो का इस दुख भरे दौर में साथ देने के लिए आभार व्यक्त किया।
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