“विष्णुपुरी खान में सकंट के बादल”

पाँच माह में बंद होगी खदान

मनोज गढ़वाल

 

परासियाः-पेंच क्षेत्र की एक ओर भूमिगत विष्णुपुरी खदान में सकंट के बादल छा रहे हैं।

अगले पाँच माह में खदान बंद की जा सकती है, पर्यावरण क्लीयरेंस को लेकर खदान में उत्पादन बंद किया जा सकता है, पूर्व से ही घाटे में चल रहा पेंच क्षेत्र की एक ओर खदान बंद होने से उत्पादन कम होगा और घाटा बढ़ेगा, इस चिंता को लेकर श्रमिक संगठन बी.एम. एस. ने नव निर्वाचित सासंद विवके बंटी साहू को स्थिति से अवगत कराया है. श्रमिक संगठन बी.एम.एस. ने इस सन्दर्भ में प्रेस कान्फ्रेंस कर पेंच कन्हान की बंद होती खदानों पर चिंता व्यक्त की वहीं जिन खदानों में कोयला स्टाक है उन्हें पुनः प्रारम्भ करने की मांग रखी है। इस पर सासंद विविक बंटी साहू ने त्वरित ही कोयला मंत्री एवं पर्यावरण मंत्री से चर्चा कर कारवाई किए जाने का आश्वासन श्रमिक संगठन

पदाधिकारियों को दिया है। इसके पूर्व कन्हान क्षेत्र से भी तानसी मोहन कॉलरी को भी बंद किया जा चुका है कन्हान में एक मात्र भूमिगत शारदा खान संचालित है पेंच कन्हान में नाम मात्र खदानें संचालित है खदानों पर ही क्षेत्र का रोजगार एवं व्यापार आधारित है, खदाने बंद होने से क्षेत्र उजड़ता जा रहा है। पेंच की विष्णुपुरी खदान को शीघ्र ही पर्यावरण क्लीयरेंस नहीं मिला तो अगले पाँच माह बाद खदान से उत्पादन बंद हो सकता है, जिससे पेंच के घाटे का स्तर ओर बढ़ेगा साथ ही व्यापार रोजगार पर भी बुरा असर पड़ेगा। पेंच कन्हान खदानों को वस्तु स्थिति को लेकर सासंद विवेक बंटी साहू से भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारियों ने

विस्तृत चर्चा की है। सासंद ने सगंठन पदाधिकारियों को आश्वस्त किया कि खदानों को लेकर सकारात्मक प्रयास कर चालु रखा जाऐगा। प्रेस कान्फ्रेंस में भारतीय मजदूर संघ उपाध्यक्ष, कोल प्रभारी नारायण राव बराठकर ने बताया कि विष्णुपुरी खान में 57 टन कोयला भंडारित है इसमें से 45 टन कोयला उत्पादित किया जा सकता है. इसी तरह तानसी में 60 लाख टन, जिससे 35-40 टन कोयला निकाला जा सकता है, मोहन कॉलरी में 66 लाख टन धाउ 21 लाख तथा भाखरा में 25 लाख टन कोयला है जिसका उत्पादन किया जा सकता है। इसके अलावा नई परियोजनाओं में नारायणी एक्सटेशन, नदंन एक्सटेशन, मोहन फेस की फाईल लंबित है। जिन्हें प्रारंभ करने प्रयास किये जाने से क्षेत्र में रोजगार की संभावनाए बनेगी साथ ही क्षेत्र का व्यापार भी बना रह सकता है।

विष्णुपुरी नं. 1 बंदः आसपास में मौजूद विष्णुपुरी नं. एक एवं नं. दो खदाने है, विष्णुपुरी नं. एक पाँच वर्ष पूर्व बंद कर दी गई है। वहीं नं. दो में भी एक वर्ष पूर्व आग लगने से कार्य प्रभावित हुआ था, यहाँ लगभग 400 कर्मचारी कार्यरत है प्रतिदिन 300 टन कोयला 3 शिफ्ट

में उत्पादन किया जाता है. 1 वर्ष पूर्व प्रोडक्शन एरिया 4-A और डिपलेरिंग एरिया वन-सी निकलता है. आग लगने से लगभग 6 हजार टन कोयला छूट गया एरिया को सील किया जा चुका है, जहरीली गैस कार्बनमोनो आक्साईड का रिसाव होने से खदान 2 पर भी प्रश्न चिन्ह लग गए है, दोनों ही खदानों को ओपन कास्ट किए जाने भी कार्यावाही जारी है, इसको लेकर भूमि अधिग्रहण की कार्यवाई भी जारी है। भविष्य में भूमिगत खदान को बंद कर ओपनकास्ट खदान में तब्दील किया जा सकता है। वर्तमान में पर्यावरणीय क्लीयरेंस को लेकर अनेक खदानों का कार्य प्रभावित होता रहा है।

पेंच-कन्हान क्षेत्र कोयला खदानों पर ही आधारित है यहाँ सवालिस कम्पनी के द्वारा भूमिगत खदानें चलाई गई बाद में राष्ट्रीयकरण उपरान्त कम नई खदाने खोली गई साथ ही पुरानी खदानें लगातार बंद होती गई जिससे शनें, शनेंः क्षेत्र का रोजगार एवं व्यापार प्रभावित होता गया। क्षेत्र को जीवित रखने नई सरकार नव निर्वाचित सासंद से क्षेत्र वासियों को काफी उम्मीदे हैं, कोयला क्षेत्र को पुनः जीवित करने सरकार को सकरात्मकता दिखानी होगी।