राज्य आनंद संस्थान द्वारा खेड़ी के नर्सिंग कालेज में एक दिवसीय अल्पविराम कार्यशाला आयोजित*

नरेंद्र मालाकार खंडवा से

 

*आनंद का स्रोत बाहर नही हमारे भीतर ही मौजूद है* मास्टर ट्रेनर गणेश कानडे

खंडवा:- मध्य प्रदेश राज्य आनंद संस्थान,आनंद विभाग द्वारा ग्राम खेड़ी स्थित प्रतिभा कालेज आफ प्रोफेशनल स्टडीज में गुरुवार को एक दिवसीय अल्पविराम कार्यक्रम आयोजित किया गया ।इसमें 75 नर्सिंग छात्र छात्राओं ने भाग लिया।इन्हे स्वयं से स्वयं की मुलाकात करना और अपने भीतर झांक कर देखना ।अपने स्वयं के गुण दोष देखना और अपनी अंतरात्मा की आवाज पर स्वयं में सुधार करना सिखाया गया।
राज्य आनंद संस्थान के मास्टर ट्रेनर गणेश कानडे ने कहा की स्वयं में सुधार हेतु मौन की शक्ति से स्वयं में सुधार की यह पद्धति प्राचीन काल से ही हमारे जीवन का हिस्सा रही है।

जिसका उपयोग हमारे महान पूर्वज करते रहे हे।आज के भागदौड़ भरे जीवन में हम जीवन जीने की यह शैली भूल चुके है।इसलिए इस प्रकार के प्रशिक्षण की आवश्यकता पड़ रही है। सच तो यह है की हम जीवन जीना भूल गए है। खुशी और आनंद का स्रोत हमारे भीतर है और हम बाहर खोज रहे है। इसलिए हमे आनंद की खोज में बाहर नही बल्कि अपने भीतर की यात्रा करना है।अल्पविराम इसका एक बेहतर माध्यम है।इसे अपने जीवन का हिस्सा बनाने की जरूरत है।
कार्यक्रम की शुरुआत एक सुंदर सी प्रार्थना इतनी शक्ति हमें देना दाता से की गई।तत्पश्चात सभी ने अपना नाम,बचपन का नाम और अपनी अभिरुचि बताई ।अपने शौक बताए।इसके बाद उन्हें मास्टर ट्रेनर गणेश कानडे द्वारा मौन की शक्ति और मौन रहने के लाभ बताए गए।इस मौन के माध्यम से स्वयं से संपर्क करना,स्वयं में सुधार करना और जीवन जीने की दिशा प्राप्त करना आदि के बारे में बताया गया। श्री कानडे ने जीवन का लेखा जोखा करना सिखाया गया।उन्हे चार प्रश्न दिए गए ।जीवन में उनकी मदद किस किस ने की है।उन्होंने किस किस की मदद की है।वही उन्हे किस किस ने दुख दिया हे और उन्होंने किस किस को दुख दिया है।इसके बाद शांत समय दिया गया।प्रतिभागियों ने अपनी शेयरिंग की। जिसके आधार पर उन्हें तनाव मुक्त रहने और आनंदपूर्ण जीवन जीने हेतु प्रति दिन 24 घंटे में एक बार अल्प विराम करने अर्थात कुछ समय मौन रहना सिखाया गया। वही मदद करने वाले के प्रति कृतज्ञता और दुख देने वाले को माफ करने और दूसरे को दिए गए दुख के लिए उससे माफी मांगने की कला बताई गई।

*मास्टर ट्रेनर नारायण फरकले ने अपने जीवन रूपी गिलास में झाककर कील,पैसा,गुटखा,मिर्च,केंची,पत्थर जेसे प्रतीक निकाल कर स्वयं को पारदर्शी रखना सिखाया**
मास्टर ट्रेनर नारायण फरकले ने मुक्ति का पथ विधि के माध्यम से अल्पविराम के माध्यम से स्वयं के गिलास में झांककर पहले से और बेहतर और पारदर्शी बनने हेतु विभिन्न प्रतिको के माध्यम से ईर्ष्या,द्वेष,जलन, घृणा, नफरत,बदले की भावना,ओर कठोरता को बाहर निकले हेतु प्रतिदिन अल्पविराम करने का स्वयं का उदाहरण प्रस्तुत किया।
समापन पर सभी को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।इस अवसर पर प्राध्यापक निक्की शर्मा,खुशबू सावनेर,ज्योत्सना गाठिया,पवन वाजपेयी,मोनिका खांडे,आदि उपस्थित थे।

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