प्रदेश की 76 हजार गिट्टी खदाने बंद” “नियमों में उलझे केशर संचालक”

मनोज गढ़वाल

परासिया :- प्रदेश भर की लगभग 76 हजार गिट्टी खदानों की रॉयल्टी बंद होने से केशरों

में गिट्टी उत्पादन बंद पड़ा हुआ है, गिट्टी उत्पादन बंद पड़े होने से प्रदेश भर में चल रहे शासकीय कार्यों में बाधा उत्पन्न हो रही है, बिल्डिंग निर्माण, सड़क निर्माण से लेकर अन्य शासकीय कार्यों की गति अत्यन्त धीमी पड़ गई है, यहाँ शासकीय आदेश तथा नए नियमों की अनिवार्यता के चलते केशर संचालक भी उलझ कर रह गए हैं। डिया से सिया की अनिवार्यता के आदेश उपरांत विगत पाँच माह से लगभग 76 हजार गिट्टी खदाने बंद पड़ी हुई है, गिट्टी की पर्याप्त अनुपलब्धता से निर्माण कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं, भौमिकी तथा खनिकार्य अन्तर्गत संचालित

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गिट्टी खदानों की रॉयल्टी शासन द्वारा बंद किए जाने से गिट्टी परिवहन पूर्णतः बंद पड़ा हैं, जिसके चलते प्रगतिरत निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे हैं, इसको लेकर कुछ पटदारों केशर संचालकों ने न्यायालय की भी शरण ले रखी है, किन्तु डिया से सिया की अनिवार्यता संचालकों की गले की फांस बन गया है, इस प्रक्रिया में संचालकों को 2 से 3 माह का समय लग जाना है जिसमें उनकी आर्थिक नुकसानी के अलावा संचालित निर्माण कार्य काफी प्रभावित होंगे । सुरक्षा की दृष्टिगत केशर संचालकों को नए नियमों के अन्तर्गत खदान के चारों ओर पक्की फेन्सिग, नाली निर्माण, जल छिड़काव व्यवस्था, टीन सेट, लेवर रूप ऑफिस मजदूरों के सुरक्षा उपकरण, पौधा

रोपण, खदान में जीपीएस सिस्टम, गारलैंड ड्रेन, सैटलिंक टैंक तथा अन्य व्यवस्थाएँ पूर्ण रूप से अनिवार्य की गई है, खदान संचालकों का कहना है कि शासन के आदेशानुसार संचालित खदानों में पूर्व से ही सारी व्यवस्थाएँ संचालित की जाती रही है, केशर संचालकों के अनुसार राज्य सरकार में साथ विहित करार को निष्पादित किया जा रहा है, तथा करार के आधार पर पट्टेदार पट्टे से उद्भूत होने वाले अनिवार्य भाटक, स्वमिस्त

रॉयल्टी भूतलभाटक और शौध्यों का नियमित तथा समय पर भुगतान किया जाता रहा है, शासन के निर्देशों का नियमित पालन कर खदान संचालित की जाती रही है, गिट्टी उत्पादन विगत 5 माह से बंद होने से प्रगतिरत निर्माण कार्यों में अवरोध हो रहा है बाजार में गिट्टी उपलब्ध नहीं है समय सीमा में शासन को निर्माण कार्य पूर्ण करके दिए जाने में कठिनाईयाँ होगी, शासन को शिथिलता बरतते हुए गिट्टी निर्माण की अनुमति देकर अग्रिम कार्यवाही की जानी चाहिए ताकि शासकीय कार्य प्रभावित न हो |