भोपाल। भारत के दलित साहित्यकारों में बहुचर्चित जाने माने साहित्यकार, उपन्यासकार, गजल, गीत और विभिन्न विषयों पर लेखन करने वाले वरिष्ठ समाजसेवी एवं उत्तर प्रदेश सरकार से शिक्षा निदेशक पद से अवकाश प्राप्त स्वतंत्र लेखन जिनकी अभी तक सैकड़ों पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है।
देश के विभिन्न सामाजिक संगठनों और शासकीय पद सम्मान अवार्ड इत्यादि पुरस्कारों से सम्मानित श्री श्यामलाल राही प्रियदर्शी जी ने अपने लेखन में समाज को एक दिशा दी है। वह हमेशा वंचितों के सरोकारों की पैरवी करते हुए लेखन करते है। तथा जवान युवा पीढ़ी को सशक्त मार्ग दर्शन देकर साहित्य से रुवारु करने में किंचित मात्र संकोच नहीं करते है। सदा उम्दा साहित्य, कविता और रचनात्मक कार्य में सभी के मानों की बात अपने शब्दों में पिरोकर एक अच्छा विचारवान साहित्य सेवा कर रहे है।
स्मरणीय हो कि श्री राही जी देश के उन शोधकर्ताओं में से एक है जिन्होंने मध्यप्रदेश के आजादी में सन् 19 42 को महात्मा गांधी जी के आवाहन पर अंग्रेजों द्वारा गोंडवाना राजा श्री शंकर प्रताप सिंह जूदेव जी चीचली तहसील गाडरवारा जिला नरसिंहपुर के राजमहल को लुटकर कब्जा करने आयें फिरंगियों को युद्ध के दौरान लोहे के चना चबाने को मजबूर किया। तथा अकेले ही वीर मनीराम अहिरवार जी ने अंग्रेजों को लहूं लुहान कर गांव से खदेड़ने में सफल हुये और युद्ध में जीत हासिल की। अपने गोंड राजा के महल को लुटने से बचाया व गोंडी धर्म, संस्कृति के रक्षार्थ शहीद हुये। अंग्रेजों ने उन्हें धोखाधड़ी कर गुप्त जेलखाना लें गये और वहां उनसे गोंड राजमहल की गुप्त जानकारी न देने पर उनके प्राण ले लिया। वह भी देश की माटी को चुमते हुये अपने वतन पर जान न्यौछावर कर सम्पूर्ण देश को गौरवान्वित कर गये।
ऐसे महान क्रांतिकारी वीर मनीराम अहिरवार जी को देश के लिए शोध पत्र देकर उन्हें राष्ट्रीय शहीद का दर्जा व उनके वारिसान परिवार को सुविधा उपलब्ध कराने व सरकार को मांग कर समर्थन करने वाले वरिष्ठ साहित्यकार मनीषी श्री श्यामलाल राही जी का गजल संग्रह खुशबू ए इश्क का प्रकाशन होने पर शहीद परिवार की ओर से हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।







