मतदाता कन्फ्यूज्ड है❓

प्रदेश में विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां प्रारंभ हो गई है । विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों ने अपने नामांकन फॉर्म जमा कर दिए हैं । कई प्रत्याशियों ने तो एक बार नहीं कई बार रैली निकाल कर नामांकन फार्म जमा किए। अपने पक्ष में समर्थन जताने के लिए प्रत्याशी गांव गांव जाकर मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं। प्रत्याशियों की दिनचर्या को देखा जाए तो ऐसा लगता है कि इनसे व्यस्त आज के समय में कोई नहीं है। सुबह जल्दी उठकर कार्यकर्ताओं से मिलकर क्षेत्र के दौरे पर निकल जाते हैं। देर रात्रि तक वापस आते हैं। प्रत्याशी इतने बिजी हैं कि उन्हें लोगों के फोन उठाने तक की फुर्सत नहीं है। रात दिन घनघोर जनसंपर्क के बावजूद क्षेत्र में चुनावी माहौल शांत है । चौक चौराहों पर लोगों के बीच आपसी चर्चा का विषय चुनाव नहीं है। जहां एक साथ कई लोग मिल जाते हैं वह भी चुनावी बातों पर चर्चा नहीं कर रहे हैं ।

गांव-गांव में जाकर देखने पर देखा गया कि लोग चुनाव के संबंध में बात ही नहीं कर रहे ।सब के लिए अन्य बातें महत्वपूर्ण है ।चुनावी चर्चाओं के नाम पर शून्यता है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि मात्र दो सप्ताह मतदान को रह गए हैं और चुनावी सरगर्मियां शांत है ।पार्टी कार्यकर्ताओं की भूमिका को देखें तो उनकी भी भूमिका केवल पार्टी के कार्यक्रम अटेंड करने तक की रह गई है । अपनी पार्टी की मीटिंग होने पर कार्यकर्ता बैठक में जाते हैं बड़े नेताओं को सुनते हैं और वापस अपने निजी कामों में लग जाते हैं । जिस वार्ड मोहल्ले की जवाबदारी जिनके कंधों पर है वह भी शांत से नजर आ रहे हैं। बड़े नेताओं की सभा में पार्टी के लोग कार्यकर्ता नेता जाते हैं और फिर वही सन्नाटा छा जाता है।

आमतौर पर देखा गया है कि विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी को लेकर भी नाराजगी रहती है । जिसके कारण मतदाता किसी विशेष प्रत्याशी से नाराजगी के कारण दूसरे पक्ष को मतदान कर उसे जीता देता है । लेकिन इस बार पार्टियों ने भी इस समस्या का हल निकालने के लिए सर्वे को ज्यादा तवज्जो दी। गांव-गांव में मतदाताओं के बीच सर्वे कराया गया ।लोगों की पसंद के अनुरूप प्रत्याशियों को तवज्जो दी गई ।ऐसी परिस्थितियों में प्रत्याशियों के प्रति नाराजगी की भी स्थिति देखने को नहीं मिल रही है । इन सब परिस्थितियों ने अब  मतदाता को सोचने पर विवश कर दिया है और ऐसी परिस्थितियों में किसके पक्ष में मतदान करना है इसको लेकर शायद मतदाता भी सोच में पड़ गया है और चुप्पी साधे बैठा है ।

इतना शांत माहौल चुनाव को लेकर आज तक नहीं देखा गया। जानकारों की माने तो ऐसा लगता है मतदाता कन्फ्यूज्ड है। पिछले विधानसभा चुनाव को देखा जाए तो मतदाताओं ने करीब एक महीने पहले ही निर्णय कर लिया था और आपसे बातों में जाहिर भी कर देते थे कि उनकी मंशा क्या है। पर इस बार ऐसा कुछ भी देखने में नहीं आ रहा है ।आम जनता किसी भी पार्टी प्रत्याशी के बारे में कुछ भी कहने की अपेक्षा मौन है। लोगो की चुप्पी को लेकर यह चर्चाएं भी आम राजनीतिज्ञ कर रहे हैं की मतदाता कन्फ्यूज्ड है ❓