पीपरी = देवास जिले की
उदयनगर तहसील के पीपरी ग्राम से 8 किलोमीटर दूर,ग्राम पंचायत पोटला में स्तिथ विश्व प्रसिद्ध धरोहर दुनिया का 8 वा अजूबा देखने को मिलता है, जिसका नाम है कावड़िया पहाड़ यह एक प्राकृतिक स्थल है, जो की सात पहाड़ों का दृश्य लकड़ी के टीले नुमा रूप में जमा हुआ पत्थरों का प्राकृतिक स्थान है । करीबन तीन-चार किलोमीटर में 7 पहाड़ बने हुवे है, कावड़िया पहाड़ के बारे में किवदंती है कि पांडव के समय में मैया नर्मदा से भीम ने शादी का प्रस्ताव रखा था परंतु मैया नर्मदा ने भीम के प्रस्ताव पर एक शर्त रखी थी और कहा था कि
अगर शर्त जीत सकोगे तो मैं शादी करूंगी यह शर्त यह थी कि शाम से सुबह तक जब पूरी रात्रि में मुर्गा प्रातः कालीन समय में बोलेगा तब तक मेरे प्रवाह को रोकना होगा तो में शादी करूंगी, भीम ने शर्त स्वीकार कर ली शाम से मैया नर्मदा के प्रवाह को रोकने के लिए इस प्रकार के पत्थरों को जमाने का कार्य प्रारंभ किया परंतु प्रातः 4:00 बजे के पूर्व मुर्गे ने आवाज लगा दी और वह मैया के प्रवाह को रोकने में असफल रहा, शादी नहीं हुई मैया नर्मदा इस पहाड़ से 4 किलोमीटर की दूरी पर बह रही है जो की धाराजी घाट के नाम से विश्व प्रसिद्ध स्थल है ,यहां से जल मार्ग से ओंकारेश्वर की दूरी मात्र 15/20
किलोमीटर की है वैज्ञानिकों के अनुसार पुराने जमाने में हजारों वर्ष पूर्व भूकंप आया होगा और जमीन से जो लावा निकला वह इस रूप में जमा हो गया और बाद में ऐसे पत्थर पहाड़ बन गए यह , पत्थर 5 से 10 मीटर के लंबे चतुर्थ कोण, पंच कोण, शत कोण के हैं, अलग अलग पत्थरों में आवाज भी अलग अलग प्रकार की आती है , यह स्थान अपने आप में एक अजूबा है इन पहाड़ों के बारे में डॉक्टर वाकणकर ने सन 1973 में क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता भगवान दास गुप्ता, पूर्व विधायक डॉक्टर तेजसिंह सेंधव , के साथ आकर बताया था कि इस प्रकार के
पहाड़ विश्व में सिर्फ दो ही जगह पर है एक भारत और दूसरा न्यूजीलैंड में परंतु भारत में तीन-चार किलोमीटर में इस प्रकार का होना एक मनमोहक एवं अजूबा है , क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता एवं मैया नर्मदा भक्त गिरधर गुप्ता का मानना है कि पांडव के जमाने की बात काफी हद तक सत्य हो सकती है , परंतु उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि एक प्रकृतिक अजूबा स्थल तक पहुंचने के लिए आज भी तीन चार किलोमीटर कच्चे रास्ते से हो कर गुजरना पड़ता है, साथ ही आसपास तीन-चार किलोमीटर में विश्राम करने ठहरने के लिए भी पर्यटक विभाग
की और से कोई व्यवस्था नहीं है । अगर शासन प्रशासन जनप्रतिनिधि इस और ध्यान देकर यहां तक पक्का मार्ग बनाकर ठहरने के लिए व्यवस्था करवा दे तो, सेलानियो की आवाजाही बड़ेगी और क्षेत्र की आर्थिक स्थिति भी सुधरेगी, एक बढ़िया रेस्ट हाउस बना तो शासन को आय भी होगी पर्यावरण प्रेमी को सुविधा भी मिलेगी ग्रामीण अंचलों में जो समीप के
ग्राम पोटला ,पीपरी, धाराजी के लोगों को रोजगार भी मिलेगा साथ ही धाराजी एवं कावड़िया पहाड़ जैसे स्थान तक देश-विदेश के लोग भी आने लगेंगे इस और अगर ध्यान दिया जाए तो वास्तव में नजारा और ही अलग होगा ।







