120 किलोमीटर की कावड़ यात्रा से घोड़ाडोंगरी लौटे 52 कावड़ियों का स्टेशन में हुआ भव्य स्वागत रावण द्वारा स्थापित की गई थी शिवलिंग

120 किलोमीटर की कावड़ यात्रा से घोड़ाडोंगरी लौटे 52 कावड़ियों का स्टेशन में हुआ भव्य स्वागत
रावण द्वारा स्थापित की गई थी शिवलिंग
प्रतिवर्ष सुल्तानगंज में गंगा जी का जल लेकर देवघर तक पैदल कांवड़ यात्रा कर बैधनाथ धाम में करते है जलार्पण

(घोड़ाडोंगरी ) नगर के रेल्वे स्टेशन में सोमवार को अलग ही माहौल देखने को मिला जहाँ बाजे गाजे के साथ नगर वासियों ने आधा सैकड़ा से अधिक कावड़ियों का भव्य स्वागत किया
इस दौरान नगर वासियों ने बाजे गाजे के साथ फूल माला और तिलक लगाकर कांवड़ियों का स्वागत किया ज्ञात हो पिछले एक हफ्ते पहले प्रतिवर्ष अनुसार घोड़ाडोंगरी एवम बगडोना, पाथाखेड़ा,मुलताई ,नागपुर,के आधा सैकड़ा कावड़िया बोल बम समिति घोड़ाडोंगरी के बैनर तले बिहार सुल्तानगंज में उत्तर वाहिनी गंगा जी से जल लेकर झारखंड में स्तिथि देवघर में बाबा

बैजनाथ के नाम से प्रसिद्ध ज्योतिलिंग में जल अर्पण करते है इस यात्रा के बारे में बोल बम समिति के संयोजक विकास अग्रवाल ने बताया की कावड़ यात्रा में सभी बम भाई पूर्ण रूप से ब्रम्हचर्य का पालन करते हुए चलते है और 120 किलोमीटर की यात्रा के दौरान कांवड़ को नीचे नही रखा जाता यदि रास्ते मे नींद या शौच की स्तिथि बनी तो नहा कर ही कावड़ को हाँथ दुबारा हाँथ लगाया जाता है इस पूरी यात्रा के दौरान कावड़िया नंगे पैर चलते

है साथ ही ब्रश ,साबुन तेल,क्रीम का उपयोग करने पर पाबंदी रहती है पूरी यात्रा में सभी भक्त बस बोल बम बोल बम के नारे के साथ भोले जी भक्ति में डूबकर चलते है विकास अग्रवाल ने बताया कि इस वर्ष घोड़ाडोंगरी से 52 कावड़िया गए थे जो राजस्थान के चिड़ावा संघ के साथ लगभग 150 कावड़िया के ग्रुप में बाबा बैजनाथ को जलार्पण करते है

विकास अग्रवाल बताते है कि बाबा बैजनाथ की स्थापना स्वयं नारायण ने की थी और रावण ने अभिषेक कर पूजन किया था यहां बने पूरे मन्दिर का निर्माण भगवान विश्वकर्मा जी ने किया था और पूरे विश्व मे सभी मंदिरों में त्रिशूल लगा रहता है लेकिन एक मात्र यही मन्दिर है जहां मन्दिर में पंचशूल लगा हुआ है जो स्वयं रावण द्वारा यहां लगाया गया था