*कपालभाति: सिर्फ एक क्रिया नहीं, संपूर्ण स्वास्थ्य का विज्ञान – आचार्य गौरव*

 

*बैतूल :* आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली, तनाव और गलत खान-पान के बीच अगर कोई एक योग क्रिया है जो शरीर और मन दोनों को एक साथ शुद्ध कर सकती है, तो वह है कपालभाति। यह मानना है विशेषज्ञ योग गुरु आचार्य गौरव का।

आचार्य गौरव के अनुसार, कपालभाति को अक्सर लोग सिर्फ वजन घटाने की तकनीक समझ लेते हैं, लेकिन इसका अर्थ और प्रभाव इससे कहीं अधिक गहरा है। संस्कृत में ‘कपाल’ का अर्थ है माथा और ‘भाति’ का अर्थ है चमकना। अर्थात वह क्रिया जिससे माथे पर तेज और चमक आती है।

> “कपालभाति प्राणायाम नहीं, बल्कि षट्कर्म की एक शुद्धि क्रिया है। इसका सीधा संबंध हमारे मस्तिष्क, फेफड़ों और पाचन तंत्र से है,” आचार्य गौरव ने बताया।

*कपालभाति के 5 बड़े लाभ जो आचार्य गौरव ने बताए:*

*1. मेटाबॉलिज्म और वजन नियंत्रण:* इसके नियमित अभ्यास से पेट की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं, पाचन अग्नि तेज होती है और शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी कम होने लगती है।

*2. मन की शुद्धि और तनाव से मुक्ति:* तेज श्वास-प्रश्वास से मस्तिष्क में ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ता है, जिससे नकारात्मक विचार, चिंता और अवसाद कम होते हैं।

*3. फेफड़ों की क्षमता में वृद्धि:* यह फेफड़ों की सफाई करती है और अस्थमा, एलर्जी और सांस से जुड़ी समस्याओं में अत्यंत लाभकारी है।

*4. चेहरे पर प्राकृतिक तेज:* रक्त परिसंचरण बेहतर होने से चेहरे पर प्राकृतिक चमक आती है और कपाल यानी माथा शुद्ध होता है।

*5. शरीर का डिटॉक्स:* यह शरीर से 80% तक टॉक्सिन्स को श्वास के माध्यम से बाहर निकालने में मदद करती है।

*कैसे करें? आचार्य गौरव की सलाह:*
पद्मासन या सुखासन में सीधे बैठें। लंबी गहरी सांस लें और फिर पेट को अंदर की ओर खींचते हुए नाक से तेज गति से सांस बाहर छोड़ें। सांस लेने की प्रक्रिया अपने आप होगी, पूरा ध्यान सिर्फ सांस छोड़ने पर रखें। शुरुआत में 30 स्ट्रोक के 3 राउंड से शुरू करें।

*सावधानी भी जरूरी:*
आचार्य गौरव ने स्पष्ट किया कि उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, हर्निया, गर्भवती महिलाएं और पेट की सर्जरी वाले लोगों को कपालभाति का अभ्यास किसी योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए। खाली पेट सुबह इसका अभ्यास सबसे उत्तम माना जाता है।

अंत में उन्होंने कहा, “कपालभाति सिर्फ 10 मिनट का अभ्यास है, लेकिन इसका असर पूरे दिन आपके शरीर और विचारों पर रहता है।”

 

*कपालभाति: सिर्फ एक क्रिया नहीं, संपूर्ण स्वास्थ्य का विज्ञान – आचार्य गौरव*

*बैतूल :* आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली, तनाव और गलत खान-पान के बीच अगर कोई एक योग क्रिया है जो शरीर और मन दोनों को एक साथ शुद्ध कर सकती है, तो वह है कपालभाति। यह मानना है विशेषज्ञ योग गुरु आचार्य गौरव का।

आचार्य गौरव के अनुसार, कपालभाति को अक्सर लोग सिर्फ वजन घटाने की तकनीक समझ लेते हैं, लेकिन इसका अर्थ और प्रभाव इससे कहीं अधिक गहरा है। संस्कृत में ‘कपाल’ का अर्थ है माथा और ‘भाति’ का अर्थ है चमकना। अर्थात वह क्रिया जिससे माथे पर तेज और चमक आती है।

> “कपालभाति प्राणायाम नहीं, बल्कि षट्कर्म की एक शुद्धि क्रिया है। इसका सीधा संबंध हमारे मस्तिष्क, फेफड़ों और पाचन तंत्र से है,” आचार्य गौरव ने बताया।

*कपालभाति के 5 बड़े लाभ जो आचार्य गौरव ने बताए:*

*1. मेटाबॉलिज्म और वजन नियंत्रण:* इसके नियमित अभ्यास से पेट की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं, पाचन अग्नि तेज होती है और शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी कम होने लगती है।

*2. मन की शुद्धि और तनाव से मुक्ति:* तेज श्वास-प्रश्वास से मस्तिष्क में ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ता है, जिससे नकारात्मक विचार, चिंता और अवसाद कम होते हैं।

*3. फेफड़ों की क्षमता में वृद्धि:* यह फेफड़ों की सफाई करती है और अस्थमा, एलर्जी और सांस से जुड़ी समस्याओं में अत्यंत लाभकारी है।

*4. चेहरे पर प्राकृतिक तेज:* रक्त परिसंचरण बेहतर होने से चेहरे पर प्राकृतिक चमक आती है और कपाल यानी माथा शुद्ध होता है।

*5. शरीर का डिटॉक्स:* यह शरीर से 80% तक टॉक्सिन्स को श्वास के माध्यम से बाहर निकालने में मदद करती है।

*कैसे करें? आचार्य गौरव की सलाह:*
पद्मासन या सुखासन में सीधे बैठें। लंबी गहरी सांस लें और फिर पेट को अंदर की ओर खींचते हुए नाक से तेज गति से सांस बाहर छोड़ें। सांस लेने की प्रक्रिया अपने आप होगी, पूरा ध्यान सिर्फ सांस छोड़ने पर रखें। शुरुआत में 30 स्ट्रोक के 3 राउंड से शुरू करें।

*सावधानी भी जरूरी:*
आचार्य गौरव ने स्पष्ट किया कि उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, हर्निया, गर्भवती महिलाएं और पेट की सर्जरी वाले लोगों को कपालभाति का अभ्यास किसी योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए। खाली पेट सुबह इसका अभ्यास सबसे उत्तम माना जाता है।

अंत में उन्होंने कहा, “कपालभाति सिर्फ 10 मिनट का अभ्यास है, लेकिन इसका असर पूरे दिन आपके शरीर और विचारों पर रहता है।”

Leave A Reply

Your email address will not be published.