सीप में जैसे मोती होता है वैसे ही शरीर में आत्मा है, संसार की ऐसी हालत रही तो 2036 तक ही जीवन संभव : आस्था दीदी

मानवी मूल्यों को बेचकर धन कमाने की होड़ कलयुग में लगी हुई है।

संसार का परिवर्तन पहले भी हुआ था अभी होना है अपनी बुद्धि को खाने पीने ओढ़ने से हटाओ और अध्यात्म की और ले जाओ

 

घोड़ाडोंगरी नगर के दुर्गा चौक में ब्रह्माकुमारी द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान प्रवचन के चौथे दिन आस्था दीदी ने कहा कि संसार एक वट वृक्ष की तरह है। वट वृक्ष अंदर से खोखला होता है जा रहा है ।पहले से ज्यादा ज्ञान कथाएं बढ़ती जा रही हैं। लेकिन परिवर्तन समाज में दिखाई नहीं दे रहा है। क्योंकि जो बोल रहा है वह उसे अपने जीवन में लागू नहीं कर पा रहा है । कथाएं हमारे मनोरंजन का माध्यम नहीं है ।सृष्टि का बीज परमात्मा है। ब्रह्माकुमारी संस्थान निराकार परमात्मा को मानते हैं सनातन धर्म को मजबूत करने का कार्य 145 देश में कर रहे हैं। हमारे अंदर जो प्राण हैं उनके पिता परमेश्वर हैं कलयुग में धर्म भी होगा कर्म भी होगा पर शर्म नहीं होगा। धर्म धंधा बन जाएगा

वेदों के जनमानस को समझने के लिए कई कथाएं बनाई गई। उनका मर्म समझने की बजाय उनका व्यर्थ अर्थ निकालकर समाज को दिग भ्रमित करने का कार्य चल रहा है। कथाओं को नहीं उनके अर्थ को समझे ।शरीर एक कपड़ा है पर इसको कपड़ा समझने की भूल नहीं करें । सीप में जैसे मोती होता है वैसे ही शरीर में आत्मा है ।आज घर-घर में आकर रावण बैठ गया है इस भूल में मत रहना कि कलयुग बच्चा है संसार की ऐसी हालत रही तो 2036 तक ही जीवन संभव है । ग्लोबल वार्मिंग रासायनिक खाद का प्रयोग पेड़ कट रहे हैं मोटर गाड़ियों से वायु प्रदूषण धरती पर कचरा फेंकना कभी सोचा था कोरोना आएगा । मौत से डर सभी को लगता है ज्ञानी बन जाओ तो अपने जीवन में परिवर्तन आएगा ।सुख आनंद की प्राप्ति होगी क्षीरसागर: कलयुग में संसार दुःख सागर बन गया है सतयुग में यही संसार क्षीरसागर सुखसागर था।

शेषनाग के पांच फन प्रकृति के पांच तत्व है कुछ साल पहले उत्तराखंड की त्रासदी पंजाब की भीषण बाढ़ आज कलयुग में प्रकृति के पांच तत्व अपनी मनमानी कर रहे हैं क्योंकि इंसान ने अपने स्वार्थ के लिए इन पांच तत्वों को नुकसान पहुंचा है। जिसका चरित्र अच्छा होता है उसके पास सब कुछ होता है आज धन-दौलत कमाने के लिए लोग चरित्र को बेच रहे हैं पहले कहते थे कि धन गया तो कुछ नहीं गया पर चरित्र गया तो सब कुछ चला गया। आज बड़े-बड़े पूंजीपति अपना धन लेकर महात्माओं के पास पहुंचते हैं मानवी मूल्यों को बेचकर धन कमाने की होड़ कलयुग में लगी हुई है।

दलदल में फंस जाओ तो निकलना मुश्किल होता है वैसे ही संसार की घर गृहस्ती दलदल है गृहस्ती के जीवन में कमल खिलाओ और ना जग को छोड़ो और ना ही हरि को छोड़ो यही भागवत गीता सिखाती है ।तभी परम आनंद आएगा कमल का फूल सीखाता है दलदल से ऊपर उठो । जीवन जीने की कला को सीखो जन्म से कोई भी ब्राह्मण नहीं होता है वह जीवन में ज्ञान प्राप्त होता है तब ब्राह्मण बनता है। गुण और कर्म के आधार पर चार वर्ण बने हैं जाति के आधार पर नहीं जो परमेश्वर को जान लेता है वही ज्ञानी है आज विकारों की आग में लोग जल रहे हैं ज्ञान गंगा के छीटे की जरूरत है सबसे शुद्ध जल गंगा जी का होता है इसलिए ज्ञान की तुलना गंगाजल से की गई है। विकारों से आत्मा जली हुई है ।जिसे मां कहते हैं उसे कष्ट नहीं देते उसे गंगा जमुना नर्मदा को प्रदूषित किया जा रहा है। सफेद ड्रेस शांति पवित्रता का प्रतीक है स्वच्छता सादगी ज्ञान की देवी सरस्वती का प्रतीक है हर शास्त्र ने कहा है कि मनुष्य तू मनुष्य बन। ब्रह्मा कुमारी संस्था रहती है कि नर से नारायण बनो । जहां नारी को अबला कहा जाता है ब्रह्माकुमारी संस्थान में सारी बागडोर नारी के ही हाथों में हैं आज टेंशन डिप्रेशन से ग्रस्त लोगों को ब्रह्माकुमारी संस्थान जाने की सलाह दी जाती है दिनचर्या अपनी अच्छी होगी तो बच्चों में भी वैसी ही आएगी अब हम आज हम सभी बारूद के ढेर पर बैठे हैं हिरोशिमा में 1945 में बम विस्फोट हुआ था आज भी संतान विकलांग पैदा होती हैं। तीन प्रकार से संसार का अंत होता है गृह युद्ध प्राकृतिक आपदा अंतर्राष्ट्रीय युद्ध गृह युद्ध के हालात आज ऐसे हैं कि कोर्ट में जाओ और देखो तो पता चलता है कैसे-कैसे केस चल रहे हैं जनसंख्या बड़ी है तो क्या समा पाएगी। वैज्ञानिक अचंभित हैं ग्रह नक्षत्र पृथ्वी अपनी स्थिति चेंज कर रहे हैं पृथ्वी वापस अपनी स्थिति में आने का प्रयास कर रही है । आज शरीर की सुरक्षा की नहीं आत्मज्ञान की सुरक्षा करने की आवश्यकता है ।अंतर राष्ट्रीय युद्ध छुटपुट चल रहे हैं बड़ा रूप लेंगे तो कुछ भी बचने वाला नहीं है संसार का परिवर्तन पहले भी हुआ था अभी होना है अपनी बुद्धि को खाने पीने ओढ़ने से हटाओ और अध्यात्म की और ले जाओ