सीज़न में बोरवेल खुदवाने से लेकर धान-गेहूं की कटाई के समय हार्वेस्टर ढूंढने तक, किसानों को हमेशा भारी मशीनों की उपलब्धता को लेकर परेशानी होती रही है। खासकर बोरवेल मशीन और पोकलेन जैसे महंगे उपकरण केवल कुछ ठेकेदारों के पास होते हैं और उनसे संपर्क करना आसान नहीं होता। इसी समस्या के समाधान के लिए जिले में SHETU नाम का एक ऐप काम कर रहा है।
“SHETU” एक मोबाइल और इंटरनेट आधारित व्यवस्था है जो किसानों को उनके आसपास मशीन मालिकों से जोड़ती है। इस ऐप पर किसान अपनी जरूरत के अनुसार बोरवेल मशीन, कंबाइन हार्वेस्टर, पोकलेन, या अन्य कृषि उपकरणों की खोज कर सकते हैं। मशीन मालिक और ठेकेदार भी इस पर अपनी मशीनों की जानकारी डालते हैं, जिससे किसान सीधे उनसे संपर्क कर पाते हैं।
खेड़ी सांवलीगढ़ के किसान भरत सिंह बताते हैं, “पिछले साल मैंने खेत में नया बोरवेल खुदवाने के लिए दो हफ्ते तक अलग-अलग ठेकेदारों के पीछे भागा। किसी की मशीन दूसरे गाँव में लगी थी तो किसी ने बहुत ज्यादा पैसे मांगे। इस बार मैंने “SHETU App” पर देखा तो पास के रोंढा गाँव में ही एक ठेकेदार मिल गया। उसने तीन दिन में काम पूरा कर दिया।”
हार्वेस्टर की मांग धान और गेहूं की कटाई के मौसम में सबसे ज्यादा रहती है। सोहागपुर के किसान शंकर लाल कहते हैं, “अप्रैल-मई में गेहूं काटने का समय बहुत छोटा होता है। अगर बारिश आ गई तो फसल खराब हो जाती है। “SHETU App” से पता चल जाता है कि आसपास के किन गाँवों में हार्वेस्टर उपलब्ध है और किराया क्या है। ”
पोकलेन मशीन की जरूरत तालाब खुदाई, मिट्टी भराई और खेत समतलीकरण के काम में पड़ती है। आठनेर के पोकलेन मालिक कीर्तेश बताते हैं, “मैंने अपनी मशीन की जानकारी इस ऐप पर डाली है। अब मुझे 30-40 किलोमीटर दूर के गाँवों से भी काम के लिए फोन आने लगे हैं। पहले काम ढूंढने के लिए गाँव-गाँव जाना पड़ता था।”
SHETU App पर मशीन की उपलब्धता के अलावा किराया दर, मशीन मालिक का मोबाइल नंबर, और उसकी गाँव की दूरी जैसी जानकारी दिखती है। किसान सीधे मशीन मालिक से बात कर समय और काम तय कर सकते हैं।
भुगतान और अन्य व्यवस्था किसान और मशीन मालिक के बीच सीधे होती है।
कृषि विभाग के सहायक निदेशक ने बताया कि ऐसी तकनीकी व्यवस्थाओं से किसानों को महंगी मशीनों तक पहुंच आसान हो सकती है। यह पहल अभी शुरुआती चरण में है और धीरे-धीरे जिले के अन्य ब्लॉकों में भी विस्तार कर रही है।







