नरेंद्र सारडा (नेहरू) एवं उनकी धर्मपत्नी मंजू सारडा ने अपने 58 वर्ष जीवन बीत जाने और शादी होने के बाद अभी तक 4 अलग अलग स्थानों पर भागवत कथाएं आयोजित करवाई
पीपरी/ उदयनगर के धार्मिक भक्त दांपत्य ने की अनुकरणीय घोषणा सभी वर्ग समाज परिजन एवं धार्मिक भक्तों के किया स्वागत सम्मान।
उदयनगर पोलाखाल निवासी स्व.सत्यनारायान सारडा
स्व.इंद्राबाई सारडा के सुपुत्र नरेंद्र सारडा (नेहरू) एवं उनकी धर्मपत्नी मंजू सारडा ने अपने 58 वर्ष जीवन बीत जाने और शादी होने के बाद अभी तक 4 अलग अलग स्थानों पर भागवत कथाएं आयोजित करवाई है, जिसमें पंडित नारायण शास्त्री के मुखारविंद से कथा का वाचन किया गया , पहली भागवत कथा अयोध्या में कराई गई थी, दूसरी कथा मनकामनेश्वरी नर्मदा मंदिर पीपरी में, तीसरी कथा अयोध्या रामलला की नगरी में , एवं चौथीकथा हनुमान मंदिर प्रांगण
उदयनगर में आयोजित की गई साथ ही इस कथा के साथ नानी बाई का मायरा भी उन्होंने करवाया है, दंपति ने अपने जीवन काल में एक ब्राह्मण बेटी की शादी भी अपने खर्चे से करवाई है ,एवं श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर उदयनगर मे विराजित गणेश भगवान की स्थापना भी दंपति के द्वारा करवाई गई है , श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर उदयनगर परिसर पर दोपहर मे भागवत कथा एवं शाम को नानीबाई का मायरा प्रतिदिन सप्त दिवस में आयोजित हुआ, इस शुभ अवसर पर ईश्वर की प्रेरणा और गुरुजी के आशीर्वाद से दंपति ने घोषणा की है कि उनके जीवनकाल समाप्त होने के बाद जो निजी निवास बड़वाह रोड उदयनगर में स्थित है,
उसे श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर समिति, श्री राम रामायण मंडल समिति उदयनगर को दान कर रहा हूं , हम दोनों के जीवन काल के बाद इस भवन का जो भी देखरेख करना है वह श्री राम रामायण मंडल समिति उदयनगर संभालेगी, हम अपना मकान मंदिर समिति को दान में देते हे,भगवान जी के श्री चरणों में अर्पित करते हे, तालियो की गड़गड़ाहट ने सभी दपत्ति का स्वागत किया इस घोषणा के बाद समूचे उदयनगर में एवं परिजनों में हर्ष है , बोल बम कावड़ यात्रा संयोजक गिरधर गुप्ता, ने कथा के आखिरी दिन भागवत कथा के आचार्य श्री नारायण प्रसाद जी शास्त्री एवं उनके सभी साथि गुरुजनों का शाल, श्री फल, माला से सम्मान किया, साथ इस अनुकरणीय कार्य के लिए सारडा दंपती का भी सम्मान किया, इस आयोजन में मुख्य रूप से मुन्न बाई सारडा, ओमप्रकाश सारडा, संगीता
सारडा,मोहनलाल जाखेटीया, श्री राम रामायण समिति के लोग,नाथूलाल पाराशर सतीश मेहता जुगल माहेश्वरी,जीवन दांगी,गोपाल मानध्नया सावित्री मानधन्या ,रामजीलाल माहेश्वरी,बबलू यादव, आदि हजारों भक्तों ने कथा का श्रवण का लाभ लिया।







