जीवन चलने का नाम,चलते रहो सुबह-शाम’

प्रमोद सूर्यवंशी

एक संस्था जिसका एंथम गीत है ‘जीवन चलने का नाम,चलते रहो सुबह-शाम’

मन्ना डे व महेंद्र कपूर द्वारा गाये इस प्रेरक गीत को वास्तविक रूप आमला की जनसेवा कल्याण समिति और उसके सेवाभावी सदस्य दे रहे है, और समिति के निर्माण से अब तक वे लगातार चल रहे है मूक पशुओं की सेवा के लिए- घायल व्यक्तियों की मदद के लिए-रक्तदान जागरूकता के लिए-जनहित की हर समस्या के निदान के लिए।
आमला शहर में जनसेवा कल्याण समिति अब केवल एक समिति ही नही है अपितु शहरवसियो के लिए भरोसे और उम्मीद का एक जीवंत रूप भी है।
गरीबो की बीमारी में हॉस्पिटल-हॉस्पिटल भागना, सड़क पर तड़पते घायलों के लिए अपने काम छोड़ दौड़ पड़ना, किसी अंजान बीमार की तीमारदारी में उसका परिवार बन जाना,
दूसरो की परेशानी को खुद ही समझकर उसका निदान खोजने लगना, चोटिल पशुओं के उपचार के लिए बेसुध हो जाना और इन सबसे ज्यादा विशेष बात हर ग्रुप का ब्लड तो जैसे जेब मे लेकर चलते है ये लोग।

कई बार जब ब्लड बैंक भी सरेंडर कर देता है तो ये लोग काम आते है। किसी लावारिस लाश का अंतिम संस्कार सगे-सम्बन्धी बन करवाना, और मनुष्य तो मनुष्य, जानवरो के अंतिम संस्कार को भी सम्मानजनक तरीके से करवाने के लिए जनसेवा कल्याण समिति के सदस्य एक पैर पर तैयार रहते है, बंदर, गाय,कुत्ते,गधे, भैस एवं अन्य पशुओं को समिति अंतिम गति प्राप्त करवाते रही है।

शहर व आसपास सेवाकार्य करने के लिए समिति की अपनी व्यवस्थाएं है, जिसमे जनसेवा कल्याण समिति का फेसबुक पेज, व्हाट्सएप ग्रुप है, साथ ही पूरे शहर भर में फैले समिति के जिंदादिल सदस्य किसी व्यक्ति या पशु की परेशानी को महसूस करने के लिए मुस्तेद रहते है। व्हाट्सएप चलाते-चलाते जब अचानक मेसेज आ जाता है कि “अमुक व्यक्ति को,अमुक हॉस्पिटल में अमुक ग्रुप के ब्लड की आवश्यकता है,तब आमजन भले उस मेसेज को स्क्रॉल कर आगे बढ़ जाते है,पर समिति सदस्य बैचेन हो उठते है,और उन्हें तब तक चैन नही आता है जब तक वे उस ब्लड ग्रुप के रक्तदाता को ढूंढ नही लेते, वैसे ही रात के दो या तीन बजे भी इनके मोबाइल पर सूचना मिलती है कि बैतूल मार्ग या बोरदेही मार्ग पर कोई व्यक्ति घायल पड़ा है,तो ये अपनी नींद तकिये पर छोड़ उसकी मदद के लिए दौड़ पड़ते है। जनसेवा कल्याण समिति की इस सेवा भावना के लिए कई सारे राष्ट्रीय व प्रादेशिक स्तर के सम्मान उन्हें मिल चुके है, उनके प्रयास ही है कि आमला को अब रक्त राजधानी के रूप में पहचाने जाने लगा है।

*जनसेवा कल्याण समिति का सफर कैसे शुरू हुआ*
करीब एक दशक पहले की बात है शहर के जोश एवं आशाओं से भरे युवा अक्सर शहर की समस्याओं के लिए चिंतन किया करते थे, एक दिन वे सब इसी तरह न्यू मार्केट आमला में चाय की एक दुकान पर बैठे चर्चा कर रहे थे,कि उनके मन मे भाव आया कि कब तक दूसरों के भरोसे अपने शहर को छोड़ेंगे,क्यों न हम सब मिलकर ही एक संस्था बनाये जो सेवा,सहयोग एवं जन समस्याओं के लिए अग्रणी होकर कार्य करें, और इस तरह सेवा के आदर्श स्वर्गीय पंकज उसरेठे के नेतृत्व में जनसेवा कल्याण समिति का गठन हुआ, समिति ने स्वयं को संकल्पित किया कि जहां से मदद की आवाज आये वहां बिना विलम्ब के दौड़ पड़ना है, और आज दशक से ज्यादा बीत गया पर सेवा का वो जज्बा रत्ती भर भी कम न हुआ। इसी जज्बे का परिणाम है कि लगभग 30 से अधिक मानव शवो का अंतिम संस्कार, 60 से ज्यादा गौवंशो, लगभग इतने ही बंदरो के अंतिम संस्कार समिति करवा चुकी है। दर्जन भर से ज्यादा वे शव जिनके परिजन देश भर में विभिन्न शहरों में रहते है,वहां तक पहुँचाये गए, और रक्तक्रान्ति में तो सर्वविदित है कि समिति कितनी लाजवाब है। राहुल धेण्डे, सागर चौहान, अमित यादव,नितिन ठाकुर,अनिल सोनी, भावेश मालवीय,राजा राठौर शुभम खातरकर, प्रमोद पवार चंदन जैन सुजल साहू सिखर खतरकर सुजल चौहान शेखर साहू योगेश अजय नायडू वैभव देशमुख सोलंकी शफी खान,मोना कनोजे के साथ जनसेवा कल्याण समिति सतत सहयोग हेतू प्रयासरत है।

राहुल धेण्डे:- जनसेवा कल्याण समिति अब भरोसे का पर्याय बन चुकी है और हम प्रयासरत है कि इस भरोसे पर खरे उतरे सदा।

सागर चौहान:- हमारी समिति का नाम भले ही जनसेवा हो, पर जनसेवा के साथ पशुसेवा व पर्यावरण से जुड़े कार्यो के लिए भी हमारी समिति का प्रत्येक सदस्य संकल्पित है।

अमित यादव:- एक दशक से भी ज्यादा समय हो गया समिति के प्रयास बिना रुके जारी है, और ईश्वर से प्रार्थना है कि समिति के प्रत्येक सदस्य को इसी तरह सामर्थ्य प्रदान करते रहे,ताकि हम जनसेवा के कार्यो में सदा जुटे रहे।

नितिन ठाकुर:- कई बार आधी रात को घायल व्यक्ति या घायल पशु की सहायता के लिए फोन आते है,पर एक जिम्मेदार समिति के रूप में कोई भी सदस्य इस पर खीझता नही, बल्कि भगवान का धन्यवाद देता है कि सेवा के पुण्य कार्य के लिये उन्होने हमे चुना।

भावेश मालवीय:- सेवा कार्यो के लिए कई बार ऐसा भी होता है जब समिति सदस्यों में से किसी को ऑफिस से छुट्टी लेनी पड़ती है तो किसी को अपनी दुकान बंद कर घटना स्थल पर पहुँचना होता है तो कोई अपना काम बीच मे छोड़ कर आ जाता है, पर मदद को कभी नजर अंदाज नही करते।
मदद के लिए संपर्क सूत्र 7000294413
9826997475

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