भंडारे के साथ हुआ श्रीमद् भागवत कथा का समापन

धन की तीन गति होती है योग भोग और रोग।

बच्चों को संस्कार जरुर दें। आज दिनों दिन वृद्ध आश्रम की संख्या बढ़ रही है। आज भी नहीं संभले तो स्थिति भयानक होगी।

भंडारे के साथ हुआ श्रीमद् भागवत कथा का समापन

घोड़ाडोंगरी । नगर के सिद्धेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का आज रविवार को समापन हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में आसपास के अंचलों से भी लोग आयोजन में पहुंचे ।अंतिम दिन की कथा पंडित श्री कृष्णश्रय शास्त्री ने भजन मुझे तुमने दाता बहुत कुछ दिया है से शुरुआत करते हुए कहा कि जहां खड़े हैं उससे पीछे देखेंगे तो पाएंगे कि हमसे सुखी कोई नहीं है।

जानवर भी बच्चे पैदा कर देते हैं। हम दूसरों का कल्याण कर सकते हैं । धर्म कर्म कर सकते हैं। कुत्ते की मर्यादा है देहली के बाहर। कुत्ता घर में अंदर नहीं आना चाहिए। सनातन धर्म में तवे की आखिरी रोटी कुत्ते की है। कथा भी उन्हीं को सुनने को मिलती है जिन्हें प्रभु की कृपा प्राप्त होती है। अहंकार प्रभु से दूर कर देता है। भागवत में 18000 श्लोक है ।श्री कृष्ण की रासलीला में भोले बाबा भी शामिल होते थे ।

कंस के बुलाने पर मथुरा पहुंचे कृष्ण ने कुब्जा नामक महिला का उद्धार किया ।कंस वध का वर्णन किया। उग्रसेन को राजा बनाया। राम जी का अवतार हुआ था तो उन्हें शिक्षा लेने भेजा गया था यह बताने के लिए की शिक्षा कितनी जरूरी है । बच्चों को संस्कार जरुर दें। आज दिनों दिन वृद्ध आश्रम की संख्या बढ़ रही है। आज भी नहीं संभले तो स्थिति भयानक होगी। रामायण हर घर में सप्ताह में एक दिन 5 चौपाई जरूर पढ़ना चाहिए ।रामायण हमें निज धर्म पर चलना सिखाती है ।

जरासंध को 17 बार हराने ने के बाद जरासंध 18वीं बार ब्राह्मणों की सेना लेकर आया तो भगवान ब्राह्मण के हत्या के पाप से बचने के लिए रन छोड़कर भाग गए थे तो रणछोड़ दास नाम पड़ा । विदर्भ देश के राजा की पुत्री रुक्मणी से विवाह की कथा सुनाएं। उन्होंने कहा कि जब तक कोई बात पूरी पता नहीं हो उसके बारे में नहीं कहना चाहिए। निंदा करने से पाप लगता है। जो वस्तु पुत्री को दे दिए उसे पर पिता का हक नहीं रहता। रात का भोजन परिवार के साथ जरूर करना चाहिए ।बच्चों को डाँटे तो सही पर इतना प्रेशर नहीं दे की बचपन भूल जाए ।धन की तीन गति होती है योग भोग और रोग।

दान देने में तीन बातों का ध्यान रखना चाहिए दान सही जगह जाकर लगे नहीं तो उसके उसका पाप भी दानी को मिलता है । आंख बंद करके दान नहीं देना चाहिए । पात्र को ही दान करना चाहिए । उन्होंने बताया कि दान ऐसा दो जो सर्वश्रेष्ठ हो जहां जितनी आवश्यकता हो उतना ही दान दें अपनी समर्थ के अनुसार दान करें सुदामा चरित्र का वर्णन किया।

प्रथम गुरु माता होती है गुरु की कृपा से ही आज हम कथा सुन पा रहे हैं जीवन में गुरु का होना जरूरी है। संत का अपमान नहीं होना चाहिए। कलयुग में भगवान कहां अवतार लेंगे बताया ।भागवत के प्रथम और अंतिम श्लोक का उच्चारण करने से श्रीमद् भागवत का पुण्य मिलता है।