धार्मिक आयोजन में बारिश की बूंदे अमृत समान : श्री कृष्णाश्रय शास्त्री
भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं को देखने के लिए भगवान भोलेनाथ की धरती पर आते थे।
धार्मिक आयोजन में बारिश की बूंदे अमृत समान : श्री कृष्णाश्रय शास्त्री
घोड़ाडोंगरी । नगर के सिद्धेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन की कथा सुनते हुए पंडित श्री कृष्णा श्रय शास्त्री ने कहा कि धार्मिक आयोजन में बारिश की बूंदे पड़ जाती है तो यह वर्षा अमृत वर्षा की तरह होती है दुख में तो सब प्रभु को याद करते हैं सुख में याद करोगे तो दुख काहे को आएगा।
उन्होंने गिरिराज जी पूजन के बारे में बताते हुए कहा कि प्रभु श्री कृष्ण ने अपनी छोटी उंगली के नाखून पर गिरिराज पर्वत उठा लिया था। केवल सात वर्ष की आयु में उन्होंने गिरिराज पर्वत को अपनी उंगली पर 7 दिन उठा रखा और इंद्रदेव को जब पता चला कि साक्षात भगवान की महिमा है तो वह माफी मांगने श्री कृष्ण के पास पहुंचे तो उन्होंने तत्काल इंद्र को क्षमा भी कर दिया । भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं को देखने के लिए भगवान भोलेनाथ की धरती पर आते थे। ब्रज में हर गांव में भगवान भोलेनाथ के मंदिर हैं। गिरिराज पर्वत को उठाने के कारण भगवान श्री कृष्ण को गिरिराज के नाम से भी जाना जाता है। ऋषि अगस्त को जब सीता मैया ने भोजन पर बुलाया था तो उन्होंने इतना भोजन किया कि सारे भंडार खत्म हो गए जब तुलसी पत्र उनकी थाली में भरोसा गया तब उनकी भूख शांत है और इतने तृप्त हुए की पानी भी नहीं पीने की जगह रही। भगवान श्री कृष्णा ने अगस्त ऋषि को पानी के लिए बुलाया । श्री कृष्ण के गिरिराज पर्वत उठाने के बाद गोपियों ने कहा कि प्रभु हमने तो आपकी छवि गिरिराज पर्वत के साथ अपने हृदय में धारण कर ली है। यमुना में कालिया नाग के मर्दन और धेणुका शुर असुर की बलराम जी द्वारा अंत की कथा सुनाई। बारिश के कारण आज की कथा का यही समापन किया गया। कल श्रीमद भागवत कथा का समापन ओर भंडारे का आयोजन किया गया है।







