*बेटी के जन्मदिन को बनाया परोपकार का अवसर, रक्तदाताओं ने भी दिल खोल कर रक्तदान कर बिटिया को दी शुभकामनाएं*

प्रमोद सूर्यवंशी

*बेटी के जन्मदिन को बनाया परोपकार का अवसर, रक्तदाताओं ने भी दिल खोल कर रक्तदान कर बिटिया को दी शुभकामनाएं*

रक्तदान और आमला आज एक दूसरे के पर्याय बन चुके है, इसकी बानगी हर एक रक्तदान शिविर में देखने को मिलती है। और अब तो रक्तदान के प्रति शहर में इतनी जागरूकता आ गई है कि शहरवासी रक्तदान करने के नित नए नवाचार करने लगे है। ऐसा ही नवाचार रविवार को भी देखने मिला जब शहर के युवा व्यवसायी राजा राठौर द्वारा उनकी बेटी मिशिका के जन्मदिन पर लगातार दूसरे वर्ष सार्थक पहल करते हुए जन्मदिन के अवसर को रक्तदान शिविर के साथ साझा किया। मिशिका के जन्मदिन पर नवरात्रि का सुखद संयोग भी था, इस अवसर पर रक्तदाताओं ने मन भर कर रक्तदान कर मिशिका को शुभकामनाएं प्रदान की।

राठौर परिवार एवं जनसेवा कल्याण समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित रक्तदान शिविर में कुल 80 यूनिट रक्तदान जागरूक रक्तदाताओं द्वारा किया गया। आयोजन समिति के राजा राठौर व राहुल धेण्डे ने बताया कि रक्तदान के प्रारंभ से ही जो उत्साह रक्तदाताओं में था वो अपने आप में अद्वितीय था। सागर चौहान व गोल्डी भाटिया का कहना है कि शहर की सभी सामाजिक समितियों व सेवाभावी नागरिकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई एवं रक्तदाताओं का हौसला बढ़ाया।

अमित यादव एवं नितिन ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि सिविल हॉस्पिटल में आयोजित इस रक्तदान शिविर में अधिकांश रक्तदाता उपवास भी थे परन्तु रक्तदान के प्रति उनकी सजगता अनूठी थी, उपवास वाले रक्तदाता रक्तदान करते हुए भवानी स्वरूपा मिशिका के जन्मदिन पर इस देवी सेवा की तरह मान रहे थे।
भावेश मालवीय ने बताया कि आमला के लिए बड़े गर्व की बात है कि विगत दस दिनों में आमला में तीन रक्तदान शिविर आयोजित हुए,जिसमे 160 यूनिट रक्तदान हुआ, ये भी अपने आप में अनूठा आंकड़ा है। साथ ही नवरात्रि में आयोजित इस शिविर की खासियत ये रही कि मातृ शक्तियों ने भी बढ़-चढ़कर रक्तदान किया,जिनमे युवा महिला रक्तदाता बड़ी मात्रा में रक्तदान करने पहुँची और शिविर को सफल बनाया। रक्तदान शिविर के अंत मे राजा राठौर

द्वारा सभी रक्तदाताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आप सभी की सहृदयता ने मेरी बेटी मिशिका के जन्मदिन को सार्थक बना दिया। जनसेवा कल्याण समिति ने भी सभी शहरवासियों से आग्रह किया कि राजा राठौर की तरह सभी शहरवासी भी अपने व अपने परिजनों के विशेष दिनों को इसी तरह रक्तदान के आयोजन के साथ मनाया जाए तो ये एक नई परम्परा बन जायेगा और जरूरतमंदों को रक्त मिलने में आसानी रहेगी

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