कब करेंगे अधिकारी क्रेता विक्रेता के खिलाफ एफ आई आर : घोड़ाडोंगरी में बिक रही आबादी भूमि

नगर परिषद घोड़ाडोंगरी में आबादी भूमि ओर इसको लेकर चल रहे विवाद चर्चा का केंद्र बने हुए है। नगर परिषद के सीएमओ को आबादी भूमि के नामांतरण की अनुशंसा करने के चक्कर में सस्पेंड करने का मामला भी चर्चाओं में छाया हुआ है । तहसीलदार द्वारा नामांतरण के कई मामले में दिये गए फैसले लोगों में चर्चा का केंद्र बने हुए है जिसमें अधिकारी ने नामांतरण के प्रकरण यह कहकर निरस्त कर दिये कि आबादी भूमि शासकीय भूमि की श्रेणी में आती है जिसका अंतरंण नहीं किया जा सकता । अधिकारी द्वारा स्पष्ट रूप से नियम का उल्लेख करते हुए प्रकरणो को निरस्त किया गया। चर्चा है कि कई अधिकारियों ने आबादी भूमि में जमीन की बिक्री को लेकर स्पष्ट कहा है कि आबादी भूमि शासकीय भूमि होती है और ऐसी भूमि को खरीदने और बेचने वाले दोनों के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट की जाएगी। फिर भी अधिकारियों की उदासीनता या कोई कार्रवाई नहीं करने के कारण आज तक आबादी भूमि को बेचने और खरीदने वाले पर किसी तरह की कार्यवाही नहीं की गई।

नगर परिषद घोड़ाडोंगरी क्षेत्र में आबादी भूमि पर खरीदी बिक्री का कारोबार बड़े स्तर पर चल रहा है। सिथति कुछ ऐसी है कि जितनी जमीन है नहीं उससे ज्यादा आबादी भूमि बिक चुकी है । जमीन का सीमांकन करने पहुंचने वाली टीम कई बार लिख चुकी है कि जमीन नापे कैसे जमीन नापने के लिए जरूरी चांदा, मुनारे वगैरा है नहीं फिर भी इन्हीं पटवारी की रिपोर्ट के आधार पर आबादी भूमि बिक रही हैं जब विवाद होता है तो अधिकारी जमीन नापने के लिए जो होना चाहिए वह नहीं है लिखकर मामले की इतिश्री कर देते हैं और जब जमीन बेचना होता है तो सारे कागज बनाकर दे देते हैं कुछ ऐसा ही खेल नगर परिषद घोड़ाडोंगरी क्षेत्र में चल रहा है।

आबादी भूमि का जब शासकीय भूमि की श्रेणी में आती है ओर इसका अंतरण नहीं हो सकता है तो फिर नगर परिषद रजिस्ट्री के आधार पर कैसे नामांतरण कर रही है ❓


 

Comments are closed.