गुरु रविदास जी की वाणी को जन जन में पहूंचाने वाले परम संत मंडला वाले गुरु जी थे समाज सुधारक*
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संत शिरोमणि गुरु देव रविदास जी महाराज जी के भजन, भाव, अध्यात्मिक वाणीयों के प्रचार व संदेश वाहक परम श्रद्धेय संत श्री शिवकुमार जी (मंडला वाले) जो कि जिला रायसेन ग्राम टिमरावन तहसील देवरी मध्यप्रदेश में गुरु रविदास जी महाराज का मंदिर/धर्मशाला का निर्माण कर वही पर वर्षों से अपनी कर्म भूमि बना कर समाज में फैली कुरीतियों, बुराईओं और मानव भेदभाव जैसी प्रथा के उन्मूलन करने के लिए मंडला वाले गुरु जी यहाँ पर स्थाई रूप से रहकर समाज कल्याण के कार्य करने के लिए समर्पित भाव से जनकल्याण काम कर जन मानस को जागरूक करने लगे।
मंडला वाले गुरु जी जिला रायसेन में रहते हुए जिला नरसिंहपुर, जिला होशंगाबाद, में इतने अपने अध्यात्मिक कार्य से जन प्रिय हो गयें की उनकी ख्याति, अपने प्रवचनों के माध्यम से हजारों लोगों ने उन्हें अपना महान क्रांतिकारी व जीवन परिवर्तन करने जैसे महान गुणों के कारण शिष्य बन गयें। संत जी सदैव सादी भेषभूषा व सरल , सौम्य व्यवहार के कारण न सिर्फ मध्यप्रदेश में अपितु भारत में जाने पहचानें लगें। उनकी भाषा जनप्रिय होकर मधुरता से संत रविदास जी, संत कबीर साहेब जी, संत तुकाराम जी, संत नामदेव जी सहित ज्योतिबा फूलें जी, बाबा गाडसे जी, विरसा मुडा जी, और बहुजन समाज में जन्मे सैकड़ों संत, गुरुओं, महात्मा महान क्रांतिकारी शहीदों की सामाजिक उत्थान की वाणी व महान क्रांतिकारी कार्यों को घर घर पहुँचा कर सच्चे संदेश
वाहक बनकर समाज में बदलाव करने और सुधार में दिनों रात काम किया करते थे। संत जी ने मांस मदिरा पान कर रहे लोगों से इस बुराई से अवगत कराते हुए छुड़वाने जैसे काम अति प्रसंसनीय है। वह ज्ञान ध्यान व समरसता के प्रचंड रुप से जानकर थे। वह पांव-पांव चलकर जनजागृति करते थे, संत का रुप वास्तव में कैसा हो वह आज के पांखड फैलाने वाले लोगों के मुंह करारा जवाब है कि संत शिवकुमार जी गाँव शहर घर-घर जाकर सत्संग कर गुरु देव रविदास जी के प्रचार करते थे। उन्होंने कभी मंच, आसन, कुर्सी साऊंड माईक जैसी तामझाम की व्यवस्था किसी से भी नहीं चाही। इसी का परिणाम है कि वह सम्पूर्ण रविदास वंशीय समाज में मंडला वाले गुरु देव के रूप में
लोकप्रिय परम संत के पद से जाने लगे। वह स्वयं संत रविदास जी की जयंती अपने आश्रम के अलावा गाँव गाँव में मनाने का महान कार्य करते थे। वह सामाजिक सामूहिक विवाह गरीब कन्याओं के आदर्श विवाह जैसे पुण्य के कार्य करते थे।
संत श्री शिवकुमार मंडला वाले गुरु जी जब भी चीचली तहसील गाडरवारा जिला नरसिंहपुर आते थे तो वह देश की आज़ादी के महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जो कि रविदास वंशीय अमर शहीद वीर मनीराम अहिरवार जी के शहीद परिवार के उत्तराधिकारी मूलचन्द मेधोनिया के घर आकर शहीद वीर मनीराम अहिरवार जी की शूरवीरता को नमन कर श्रद्धांजलि अर्पित करते थे। शहीद परिवार को हिम्मत देते थे कि कभी न
कभी हमारी कौम के महान क्रांतिकारी शहीद वीर मनीराम अहिरवार जी को राष्ट्रीय शहीद का दर्जा प्राप्त जरूर होगा। उनका स्पष्ट रूप से कहना था कि मनीराम अहिरवार जी ने देश खातिर तो जान गवाई पर कारण यह था कि अंग्रेज मनीराम जी से बोल रहे थे कि तुम अपनी समाज के लोगों को सेना में भर्ती कराओं जो हमारे सामान ढोने की गुलामी करेंगे, तथा दूसरी ओर यह दबाव उत्पीड़न देकर अंग्रेज थे रहे थे कि तुम्हारे गोंडवाना राजमहल चीचली की गुप्त जानकारी दो न देने पर वीर मनीराम जी को अपनी ही जेल में दफन कर दिया था। जिनकी शहादत को मंडला वाले गुरु नमन किया करते थे।
परम श्रद्धेय संत श्री शिवकुमार जी (मंडला वाले गुरु जी) का परिनिर्वाण दिनांक 5 जून 2024 को हो गया है। जिनको सम्मान पूर्वक उनके अनुयायी व शिष्यो ने समाधि दी गई, जिनके नेकी के महान कार्यों के कारण दिनांक 22 जून 2024 को संत कबीर जयंती के पावन अवसर पर ग्राम टिमरावन तहसील देवरी जिला रायसेन में श्रद्धांजलि सभा, भंडारा आयोजन उनके शिष्यों द्वारा आयोजित किया जा रहा है। *ऐसे महान संत जो कि जीवन भर मानवता के कल्याण में लगे रहें जिन्होंने आज के संत,बाबाओं जैसा लाखों रुपये को न किसी से लिए और न ही धन दौलत
कमाई जो मानव कल्याण की पूंजी है वह सब रविदास वंशीय कौम को समर्पित करने वाले मेरे परम पूज्य गुरु देव जी के चरणों में कोटि कोटि नमन एवं अमर शहीद वीर मनीराम अहिरवार जी के परिवार की ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित है*।







