बालिका के साथ छेडछाड़ करने वाले आरोपीगण को 03-03 वर्ष का कठोर कारावास

 

माननीय अनन्य विषेष न्यायालय, (पॉक्सो एक्ट) 2012 बैतूल (म.प्र.), ने 17 वर्षीय नाबालिग बालिका के साथ छेडछाड़ करने वाले आरोपी सौरभ उर्फ गब्बर पिता शंकर लोट, उम्र-22 वर्ष, निवासी-बैतूल, जिला-बैतूल को धारा 7/8 पॉक्सो एक्ट समाहित धारा 354 भादवि के अपराध में दोषी पाते हुए 03 वर्ष के कठोर कारावास एवं 2,000रू. का जुर्माना एवं धारा 354(घ) समाहित धारा 11/12 पॉक्सो एक्ट के अपराध में दोषी पाते हुए

03 वर्ष के कठोर कारावास एवं 2,000रू. के जुर्माना तथा आरोपी आषीष पिता महेष सारवान, उम्र-22 वर्ष, निवासी-बैतूल, जिला बैतूल (म.प्र.) को दोषी पाते हुए धारा 354(घ) समाहित धारा 11/12 पॉक्सो एक्ट के अपराध में दोषी पाते हुए 03 वर्ष के कठोर कारावास एवं 2,000रू. के जुर्माना से दण्डित किया गया। प्रकरण में म.प्र. षासन की ओर से जिला अभियोजन अधिकारी श्री एस.पी.वर्मा एवं वरिष्ठ सहायक जिला अभियोजन अधिकारी/अनन्य विषेष लोक अभियोजक श्री ओमप्रकाष सूर्यवंषी द्वारा पैरवी की गई।

प्रकरण की जानकारी देते हुए अभियोजन मीडिया सेल प्रभारी अमित राय (एडीपीओ) ने बताया कि पीड़ित 17 वर्षीय बालिका ने दिनांक 23-07-2020 को पुलिस थाना कोतवाली बैतूल में उपस्थित होकर इस आषय की प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करवायी कि उसे कक्षा 10वीं में सप्लीमेंट्री आयी है, जिसकी पढ़ाई के लिए वह अपने घर से आना-जाना करती है। आते-जाते समय आरोपी सौरभ उर्फ गब्बर एवं आषीष उसका पीछा करते है एवं उस पर छीटाकसी कर उससे बात करने का दबाव बनाते है, उसने दोनों को 15 दिन पहले डाटा था और सब बातें उसने अपनी मम्मी-पापा को बताया है, जिसके बाद दोनों कुछ दिन तक चुप रहे,

लेकिन फिर से 03 दिनों से लगातार उसका पीछा कर रहे है और अर्नगल बाते कर रहे है। आज शाम 05ः30 बजे जब वह पढ़ाई करके वापस लौट रही थी, तब आरोपी सौरभ ने पीछे से आकर उसका बायां हाथ पकड लिया था और बोला था कि तू मुझ से बाते क्यों नहीं करती है। उसने अपना हाथ छुड़ाया और मदद के लिये चिल्लायी, इतने में उसके दूर की बुआं आ गयी, तो आरोपी वहां से भाग गया। थोड़ी दूर आगे आरोपी आषीष ने उसे अपनी बाईक पर बैठाकर ले गया। आवष्यक अनुसंधान पूर्ण कर अभियोग पत्र माननीय अनन्य विषेष न्यायालय (पॉक्सो एक्ट) बैतूल म.प्र. के समक्ष विचारण हेतु प्रस्तुत किया गया। अभियोजन ने अपना मामला युक्तियुक्त संदेह से परे प्रमाणित किया, जिस पर माननीय न्यायालय द्वारा आरोपीगण को दोषसिद्ध पाकर दंडित किया गया।

 

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