विषेष न्यायालय, (पॉक्सो एक्ट) 2012 बैतूल (म.प्र.), ने 14 वर्षीय नाबालिग बालिका के साथ बार-बार बलात्कार करने वाले आरोपी अजय पिता लक्ष्मण सहारे, उम्र-26 वर्ष, निवासी-थाना सारणी, जिला बैतूल (म.प्र.) को दोषी पाते हुए, धारा 5(एल)/6 पॉक्सो एक्ट समाविष्ट धारा 376(3),376(2)(एन) भादवि में आजीवन कारावास एवं 7,000रू. के जुर्माने से दण्डित किया गया। प्रकरण में म.प्र. षासन की ओर से जिला अभियोजन अधिकारी श्री एस.पी.वर्मा एवं वरिष्ठ सहायक जिला अभियोजन अधिकारी/अनन्य विषेष लोक अभियोजक श्री ओमप्रकाष सूर्यवंषी द्वारा पैरवी की गई।
घटना का विवरण इस प्रकार है कि पीड़िता की मां ने दिनांक 13-11-20218 को थाना सारणी में आकर इस आषय की गुमइंसान रिपोर्ट लेखबद्ध करायी कि उसकी पुत्री पीड़िता दिनांक 12-11-2018 को करीब शाम 05ः00 बजे बिना कुछ बताये घर से कहीं चली गयी है। उन्होनें ने पीड़िता की तलाष आसपास एवं रिष्तेदारी में की किंतु पीड़िता का कहीं कुछ पता नहीं चला। विवेचना के दौरान पुलिस द्वारा पीड़िता को दिनांक 14-11-2018 को दस्तयाब किया गया। पीड़िता के धारा 161 एवं 164 द.प्र.सं. के कथन लेखबद्ध किये गये। जिसमें पीड़िता द्वारा बताया कि आरोपी अजय सहारे ने उसे जबरदस्ती राखड डेम जंगल तरफ ले गया और उसके साथ बार-बार बलात्कार किया। परंतु विचारण के दौरान न्यायालय में पीड़िता ने आरोपी के द्वारा उसे जबरदस्ती राखड़ डेम के जंगल तरफ ले जाने एवं उसके साथ बलात्कार किये जाने के संबंध में कथन नहीं किये। विवेचना के दौरान पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया था, आरोपी को गिरफ्तार किया गया। पुलिस थाना सारणी द्वारा आवष्यक अनुसंधान पूर्ण कर विवेचना उपरांत अभियोग पत्र माननीय अनन्य विषेष न्यायालय (पॉक्सो एक्ट) बैतूल म.प्र. के समक्ष विचारण हेतु प्रस्तुत किया गया। विचारण में अभियोजन ने अपना मामला युक्तियुक्त संदेह से परे प्रमाणित किया, जिसके आधार पर माननीय न्यायालय द्वारा आरोपी को दोषसिद्ध पाकर दंडित किया गया।
न्यायालय में पीड़िता रही पक्षविरोधीः-
न्यायालय में विचारण के दौरान पीड़िता ने अभियोजन कहानी का समर्थन नहीं किया एवं उसके साथ बलात्कार की घटना होने से इंकार किया, परंतु अनुसंधान के दौरान पुलिस अधिकारी द्वारा तैयार किये गये दस्तावेजों एंव संकलित की गयी वैज्ञानिक साक्ष्य डीएनए रिपोर्ट के आधार पर पीड़िता के साथ आरोपी द्वारा शारीरिक संबंध स्थापित किया जाना प्रमाणित पाया गया, उम्र संबंधी दस्तावेजों के आधार पर पीड़िता 14 वर्ष की आयु की बालिका होना अभियोजन द्वारा प्रमाणित किया गया। प्रकरण में पीड़िता के द्वारा पक्ष समर्थन न किये जाने पर भी पीड़िता के साथ आरोपी के द्वारा बनाये गये शारीरिक संबंध के लिए आरोपी अजय सहारे को दोषी पाते हुए माननीय न्यायालय द्वारा आजीवन कारावास एवं जुर्माने से दण्डित किया गया।







