घोड़ाडोंगरी ब्लॉक की ग्राम पंचायत छुरी में सिनोटिया सेठ परिवार में चल रही भागवत कथा के द्वितीय दिवस भगवान विष्णु के वामन अवतार पर पंडित गुरु साहब शर्मा द्वारा भगवान विष्णु के वामन अवतार पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि के दिन भगवान विष्णु के पांचवे अवतार वामन देव ने जन्म लिया था। इस दिन को वामन द्बादशी के रूप में मनाया जाता है। उज्जैन से पधारे पंडित गुरु साहब शर्मा ने वामन देव की अवतरण और असुर राज बलि के उद्धार की कथा सुनाते हुए बताया कि
वामन अवतार की पौराणिक मान्यता के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि के दिन भगवान विष्णु के पांचवे अवतार वामन देव ने जन्म लिया था। इस दिन को वामन द्बादशी के रूप में मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार वामन अवतार के पूजन का विधान है। वामन द्वादशी पर वामन देव के अवतरण की कथा व भागवत पुराण का पाठ करना विशेष फलदायी है।दानवीर राजा का घमंड तोड़ने के लिए जब भगवान विष्णु ने लिया वामन अवतार
भगवान विष्णु के पांचवें अवतार हैं वामन. भगवान ब्राम्हण बालक के रूप में धरती पर आए थे और प्रहलाद के पौत्र राजा बलि से दान में तीन पग धरती मांगी थी. तीन कदम में वामन देव ने अपने पैर से तीनों लोक नाप कर राजा बलि का घमंड तोड़ा था
राजा बलि का घमंड तोड़ने के लिए भगवान विष्णु को लेना पड़ा वामन अवतार
राजा बलि का घमंड तोड़ने के लिए भगवान विष्णु को लेना पड़ा वामन अवतार
भगवान विष्णु का पांचवा अवतार वामन देव
राजा बलि का घमंड तोड़ने को लिया अवतार
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को वामन जयंती मनाई जाती है. इस साल यह जयंती 17 सितंबर 2021 दिन शुक्रवार को है. भागवत पुराण के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु ने ब्राम्हण बालक के रूप अवतार लिया था. वामन भगवान विष्णु के दशावतार में से पांचवे अवतार थे और त्रेता युग में पहले अवतार थे. भगवान वामन ने प्रहलाद के पौत्र राजा बलि का घमंड तोड़ने के लिए तीन कदम में तीनों लोक नाप दिए थे भागवत कथा के आयोजक सिनोटिया सेठ परिवार द्वारा क्षेत्र के श्रद्धालु भक्तों से भागवत कथा का रसपान करने का आग्रह किया है
भगवान विष्णु का पांचवां अवतार
वामन देव ने भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष द्वादशी को अभिजित मुहूर्त में श्रवण नक्षत्र में माता अदिति व कश्यप ऋषि के पुत्र के रूप में जन्म लिया था. भागवत पुराण के अनुसार अत्यन्त बलशाली दैत्य राजा बलि ने इन्द्र देव को पराजित कर स्वर्ग पर अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया था. भगवान विष्णु के परम भक्त प्रहलाद के पौत्र और दानवीर राजा होने के बावजूद, राजा बलि एक भिमानी राक्षस था. बलि अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर देवताओं और ब्राह्मणों को डराया व धमकाया करता था. अत्यन्त पराक्रमी और अजेय बलि अपने बल से स्वर्ग लोक, भू लोक तथा पाताल लोक का स्वामी बन बैठा
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