श्रीराम के जयकारों से गूंजा ग्राम जावरा, अक्षत कलश का हुआ भव्य स्वागत; घर-घर पहुंच रहा आमंत्रण, भगवामय हुआ पूरा ग्राम

आठनेर – श्रीराम के जयकारों से गूंजा ग्राम जावरा, अक्षत कलश का हुआ भव्य स्वागत; घर-घर पहुंच रहा आमंत्रण, भगवामय हुआ पूरा ग्राम

अयोध्या में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा के निमित्त राम भक्तों को आमंत्रित करने के लिए भेजे गए अक्षत कलश का आठनेर खण्ड के ग्राम जावरा में विभिन्न जगहों पर स्वागत किया गया। बजरंग मंदिर से कलश पूजन के साथ रामभक्तों को आमंत्रित किया गया। बच्चों द्वारा रामदरबार की झांकी निकाली गई कलश के स्वागत के साथ जय श्री राम के नारे लगे।

यह कोई साधारण कलश यात्रा या शोभायात्रा नहीं अपितु हमारे प्रभु श्री राम जी की जन्मभूमि के 500 वर्षों के लंबे संघर्षों की विजय की एक गर्वमय, पौरुषमय, कहानी का सार है
#श्रीराम_जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र आयोध्या से आये पवित्र पूजित अक्षत कलश को रामभक्तों ने अपने सिरोधार्य कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।

सदियों से रामभक्तो के भागीरथ प्रयास से ही अयोध्या में आराध्य प्रभु श्री राम जी का भव्य मंदिर बनने का स्वप्न साकार हो सका है
धर्म की पुनर्स्थापना के लिए संघर्ष हमेशा से होता आया है, कभी-कभी सृजन के लिए यह आवश्यक भी होता है अयोध्या में राम मंदिर के गर्भगृह में पूजी गई अक्षत कलश की भव्य मंगल कलश यात्रा निकाली गई थी भगवान राम सबके आदर्श हैं, वे राष्ट्र निर्माता और राष्ट्र जागरण के सतत प्रेरणा स्रोत हैं. जब तक हम भगवान श्रीराम का आदर्श अपने सामने रखेंगे, तब तक कोई भी हमारे देश, धर्म और संस्कृति को परेशान नहीं कर पाएगा. इसलिए अयोध्या में बनने वाला मंदिर सिर्फ राम मंदिर नहीं, बल्कि राष्ट्र मंदिर है

प्रभु श्रीराम करीब 500 सालों के संघर्ष के बाद 22 जनवरी को जन्म स्थान पर बन रहे भव्य मंदिर में विराजमान होंगे. श्रीराम जन्मभूमि के लिए 76 बार संघर्ष हुआ. इस संघर्ष में हर भाषा, वर्ग, समुदाय और संप्रदाय के लोगों ने सहभागिता की थी. 25 पीढ़ियों के बलिदान, त्याग और समर्पण के प्रतिफल स्वरूप मिले इस भव्य आयोजन की साक्षी वर्तमान की पीढ़ी बनेगी, जिन्होंने वर्तमान के संघर्ष और विजय को प्रत्यक्ष देखा है. अयोध्या में केवल राम मंदिर की ही नहीं, बल्कि राष्ट्र मंदिर और राष्ट्रीय गौरव की नींव पक्की हो रही है. पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति का सूर्योदय हो रहा है. श्रीराम जन्मभूमि का संघर्ष विश्व का सबसे लंबा संघर्ष है.

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर जब श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बनाना शुरू किया गया था, तब देश के 12.5 करोड़ परिवार यानी 65 करोड़ राम भक्तों ने मंदिर निर्माण में निधि समर्पण कर सहयोग दिया. जिस उत्साह से दो साल पहले सकल हिंदू समाज ने मंदिर निर्माण निधि समर्पण अभियान में हिस्सा लिया, उससे दोगुने उत्साह से वो प्राण प्रतिष्ठा की तैयारी में जुटा हुआ है. आगामी 22 जनवरी को भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा के दिन पूरे विश्व के 5 लाख से ज्यादा मंदिरों में संपन्न होने वाले कार्यक्रमों के लिए 12.5 करोड़ से ज्यादा परिवारों

को श्रीराम जन्मभूमि में पूजित पीले अक्षत (चावल) देकर निमंत्रित करेंगे. जावरा वासियों को भी इस भव्य आयोजन के साक्षी बनने का निमंत्रण दिया जाएगा.

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