खेत की मेड़ पर सागौन लकड़ी की बागुड़ बनाने तथा घर के पीछे बाड़े में सागौन की लकड़ी रखने वाले आरोपी को 6 माह का सश्रम कारावास एवं अर्थदण्ड से दंडित किया गया:-
माननीय न्यायालय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी बैतूल ने खेत की मेड़ पर सागौन लकड़ी की बागुड़ बनाने तथा घर के पीछे बाड़े में सागौन की लकड़ी रखने वाले आरोपी सुंदर सिंग पिता मन्नू उईके, उम्र-65 वर्ष निवासी ग्राम- चिखलार थाना कोतवाली, जिला बैतूल को धारा 33(1)(क) भारतीय वन अधिनियम 1927 के अपराध में दोषी पाते हुये 6 माह के सश्रम कारावास एवं 2000/- रू के जुर्माने से दंडित किया गया। प्रकरण में म.प्र. शासन की ओर से ए.डी.पी.ओ. अजीत सिंह के द्वारा पैरवी की गई। प्रकरण की पैरवी में सहा0ग्रेड-03 शषीकांत सोनारे द्वारा विषेष सहयोग प्रदान किया गया।
घटना का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है कि दिनांक 10.01.2017 को वन परिक्षेत्र बैतूल कोे मुखबिर सूचना प्राप्त हुई कि सुंदर सिंग ने अपने खेत की मेड़ पर सागौन लकड़ी की बागुड़ लगाई तथा सागौन लकड़ी अपने घर पर छुपा कर रखी है। उक्त सूचना पर वनपरिक्षेत्र बैतूल द्वारा दल गठित कर सूचना के आधार पर ग्राम चिखलार में सुंदर सिंग के खेत पर पहुंचे जहां खेत के चारो ओर सागौन लकड़ी की बागुड़ लगी पाई
गई। सागौन लकड़ी को मौके पर ही जप्त कर जप्तिनामा बनाया गया। संुदर सिंग के घर की तलाषी ली गई तो उसके घर के पीछे पुराने मकान के बाड़े में कुल 28 नग सागौन की लकड़ी बरामद हुई थी। मौके पर ही बरामद लकड़ियों की नाप-जोप कर जप्त किया गया। मौके की कार्यवाही का मौका पंचनामा तैयार किया गया। आरोपी सुंदर सिंग मौके पर मौजुद नही था। उसके परिवार की सदस्या नेहा द्वारा बताया गया कि
यह सागौन की लकड़ी सुंदर सिंग द्वारा जंगल से लाई गई है। आरोपी संुदर सिंग के विरूद्ध वन अपराध दर्ज कर प्रकरण विवेचना में लिया गया। संुदर सिंग को गिरफ्तार किया गया तथा उससे पुछताछ कर संस्वीकृतिकारक कथन लेख किये गये जिसमें उसने अपराध स्वीकार करते हुए सागौन लकड़ी के सबंध में कोई दस्तावेज न होना तथा सागौन लकड़ी जंगल से काटकर लाना बताया। प्रकरण की समस्त कार्यवाही वन
परिक्षेत्र अधिकारी बैतूल के निर्देषन में वनरक्षक योगेष चौधरी द्वारा की गई थी। आवष्यक विवेचना उपरांत आरोपी के विरूद्ध परिवाद पत्र तैयार कर माननीय न्यायालय के समक्ष विचारण हेतु प्रस्तुत किया गया। विचारण के दौरान अभियोजन ने अपना मामला युक्तियुक्त संदेह से परे प्रमाणित किया जिसके आधार पर न्यायालय ने आरोपी संुदर सिंग कोे उक्त दंड से दंडित किया।
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