सेंट्रल बैंक घोड़ाडोंगरी फ्रॉड कांड में 9 आरोपी पांढरा, पाथाखेड़ा ओर बैतूल के,महिला भी आरोपी
सेन्ट्रल किसान ऋण के रडिट कार्ड योजना एवं मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में फ्राड
छल पूर्वक अवैद्य निकासी कर अमानत में खयानत कर, बैंक के बहुमूल्य दस्तावेजों में छेड़छाड कर, फर्जी हस्ताक्षर एवं फर्जी हस्ताक्षरो को बैंक से नियम विरूद्ध निकासी के लिये उपयोग
बैतूल जिले के घोड़ाडोंगरी सेंट्रल बैंक में हुए फ्रॉड कांड में ईओडब्ल्यू ने 13 लोगों को आरोपी बनाया है। जिसमें 9 आरोपी बैतूल जिले के पांढरा, पाथाखेड़ा और बैतूल के हैं। इन लोगों के आरोपी बनने से बैंकों में दलाल की भूमिका निभाकर लोगों को लोन दिलाने में सक्रिय दलालों में हड़कंप मच गया है। वही इस कांड के सामने आने से बैंक के खाताधारको में भी चिंता की लहर है ।लोग अचंभित हैं कि जिस पर हम पूर्ण विश्वास करके अपने जीवन भर की जमा पूंजी जमा कर देते हैं ।वहां पर भी हमारे जीवन भर की कमाई कितनी सुरक्षित है। इस पर प्रश्न चिन्ह लगने लगे हैं।

आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो ने सेंट्रल बैंक में फर्जी कांड को उजागर किया है। उसको लेकर क्षेत्र में लोगों का मानना है कि आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो को जिन बैंकों में दलाल सक्रिय है उनकी समय-समय पर जांच करनी चाहिए। ताकि ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों और दलालों का चेहरा सामने आ सके। सेंट्रल बैंक घोड़ाडोंगरी के इस फ्राड कांड में 13 लोगों को आरोपी बनाया गया है । जिसमें ब्रांच मैनेजर अन्य कर्मचारियों के अलावा ऐसे लोग भी आरोपी बने हैं जो बैंक मैं दलाली कर कर भोले भाले ग्रामीणों को लूटने में लगे हुए हैं ।
इस जांच में सामने आया है कि
सेन्ट्रल बैंक इंडिया की शाखा घोड़ाडोंगरीके खाता धारक श्री रवि सीलू पुत्र श्री धनराज सीलू, श्री विजय वन्नाग्रेह पुत्र श्री चिरोंजीलाल बत्रा, श्री मनोज यादव पुत्र श्री मनीराम यादव, उमेश यादव पुत्र श्री मोहन यादव, श्री चौकीकर पुत्र श्री प्रतापदास चौकीकर श्री उमेश यादव पिता श्री झोने यादव, श्री प्रमोद सरवन पुत्र श्री हीरालाल सरवन, श्रीमती रूजा यादव पत्नी दिलीप यादव द्वारा आपस में आपराधिक षड़यंत्र करते हुए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के अंतर्गत, बिना व्यवसाय शुरू किए, जिस उद्देश्य के लिये ऋण दिया गया था, वह व्यवसाय प्रारंभ नहीं किया। उक्त ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया अनुसार बैंक अधिकारियों को ऋण स्वीकृत करने के पूर्व एवं पश्चात में स्थल निरीक्षण किया जाना आवश्यक था, लेकिन बैंक अधिकारियों ने बिना निरीक्षण के ऋण राशक खाता धारक को आहरित कर दी, क्योंकि मौके पर उक्त व्यवसाय प्रारंभ ही नहीं किए गए थें।
सेन्ट्रल बैंक इंडिया की शाखा घोड़ाडोंगरीकी खाता धारिका श्रीमती रूजा यादव पत्नी दिलीप यादवद्वारा मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना अंतर्गत आरओ वाटर प्लांट हेतु 2.90 लाख, 01 लाख एवं 07 लाख का लोन दिया गया था, उक्त रूजा यादनव बैंक में कार्यरत बिजनेस करस्पोंडेट दिलीप यादव की पत्नी थी, उक्त तीनों ऋण वाटर प्यूरीफाई प्लांट स्थापित करने हेतु लियें गयें थें एवं नियम विरूद्ध बगैर बैंक ऋण चुकायें एवं बिना अनुमति के विक्रय कर दियें गये। उक्त ऋणों में से 01 लाख रूपये की राशा यूनिट विक्रय होने के बाद की गई, जिससे स्पष्ट है की उक्त ऋणों की स्वीकृति एवं भुगतान में बैंक अधिकारियों की संलिप्तता थी, जिससे बैंक को 34,60, 176/- रूपयें की क्षति कारित हुई। दिलीप यादव जो की बैंक करेस्पोंडेंट था, के द्वारा उक्त ऋण में बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर ऋण राशन की अवैध निकासी की गई।
सेन्ट्रल बैंक इंडिया की शाखा घोड़ाडोंगरीके तत्कालीन शाखा प्रबंधक श्री पीयूष सैनी के स्वयं के बचत खाता क्र. 3689902764 में 11.07.2018 से 25.07.2021 तक कुल 89.14 लाख रूपये जमा कियें गयें जो की एक अनियमित संव्यवहार है। श्री दीपक सोलंकी के बचत खाता क्रमाक 32700079471 में खाता
धारक श्रीमती रूजा यादव द्वारा 1 लाख रूपयें दिनांक 23.09.2020 को चेक के माध्यम से जमा कियें गयें। जबकि उक्त खाता धारक को टर्म लोन स्वीकृत किया गया, इसी प्रकार उक्त श्री दीपक सोलंकी के खातों में अन्य खाता धारकों द्वारा भी पैसें जमा किये है। इसी प्रकार हेड केशीयर राजेश खासदेव के ओडी बैंक खातें मे दिनांक 11.07.2021 से 25.07.2021 के मध्य 13 बार में कुल 3.91 लाख रूपयें जमा कियें। श्री पीयूष सैनी एवं श्री दीपक सोलंकी के बैंक खातों में बिजनेस करस्पोंडेंट श्री दिलीप यादव द्वारा राषि जमा की गई है।
अतः उपरोक्त तथ्यों के आधार पर आरोपीगण श्री पीयूष सैनी, तत्कालीन शाखा प्रबंधक, श्री दीपक सोलंकी, सहायक प्रबंधक श्री राजेश खासदेव, हेड केशीयर, श्री मनीश चौहान, एकल खिड़की परिचालक, श्री दिलीप यादव, बैंककरेस्पोंडेट, श्री रवि सीलू, श्री विजय बत्रा, श्री मनोज यादव, श्री उमेश यादव, श्री पूरब चौकीकर, श्री प्रमोद सरवण, श्रीमती रूजा यादव, श्री उमेश यादव, के द्वारा आपस में आपराधिक षड़यंत्र करते हुयें, कूटरचित दस्तावेजों का उपयोग कर सेन्ट्रल किसान ऋण के रडिट कार्ड योजना एवं मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना
अंतर्गत खोले गए ऋण खातों से छल पूर्वक अवैद्य निकासी कर अमानत में खयानत कर, बैंक के बहुमूल्य दस्तावेजों में छेड़छाड कर, फर्जी हस्ताक्षर एवं फर्जी हस्ताक्षरो को बैंक से नियम विरूद्ध निकासी के लिये उपयोग किया जिससे इनके द्वारा प्रथम दृष्टया धारा-471, 468, 467, 420, 409, 120 भा. द.वि. तथा 13(1ए), 13(1)बी सहपठित 13 (2) भ्र.नि.अ. का अपराध घटित किया जाना पाया गया।







