माननीय अनन्य विषेष न्यायालय, (पॉक्सो एक्ट) 2012 बैतूल (म.प्र.), ने 17 वर्षीय अनुसूचित जनजाति नाबालिग युवती का व्यपहरण कर उसके साथ बार-बार बलात्कार करने वाले आरोपी दिलीप कनौजे पिता मंगल कनौजे, उम्र-33 वर्ष, थाना चिचोली, जिला-बैतूल (म.प्र.) को दोषी पाते हुए, धारा 3(2)(अ) एससी/एसटी समाहित धारा 3(1)(ब)(प)(पप) एससी/एसटी में आजीवन कारावास एवं 2,000रू. जुर्माना, 376(2)(एन) भादवि समाहित धारा 5(एल),5(जे)(पप)/6 पॉक्सो एक्ट में 20 वर्ष का कठोर कारावास एवं 5,000रू. का जुर्माना, धारा 366 भादवि में 05 वर्ष कठोर कारावास एवं 1,000रू. के जुर्माने तथा धारा 363 भादवि व धारा 3(2)(अं) एससी/एसटी एक्ट में 03 वर्ष का कठोर एवं 1,000रू. के जुर्माना से दण्डित किया गया। प्रकरण में म.प्र. षासन की ओर से जिला अभियोजन अधिकारी श्री एस.पी.वर्मा एवं वरिष्ठ सहायक जिला अभियोजन अधिकारी/अनन्य विषेष लोक अभियोजक श्री ओमप्रकाष सूर्यवंषी द्वारा पैरवी की गई।
घटना का विवरण इस प्रकार है कि दिनांक 05-07-2019 को पीड़िता के पिता द्वारा आरक्षी केन्द्र चिचोली में इस आषय की रिपोर्ट लेख करायी कि दिनांक 26-08-2019 को रात करीब 09ः00 बजे वह अपनी पत्नी और बच्चो सहित खाना खा कर घर में सोये हुए थे और रात करीब 10ः00 पानी पीने के लिए जागे, तो उन्होंने देखा कि पीड़िता उसके बिस्तर पर नहीं थी, वह बिना बताये कहीं चली गयी थी। उसकी तलाष उन्होंने आसपास की लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। पीड़िता के पिता की रिपोर्ट पर थाना चिचोली द्वारा अज्ञात व्यक्ति के विरूद्ध अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। विवेचना के दौरान दिनांक 30-09-2020 को पीड़िता दस्तयाब की गयी। उसका मेडिकल परिक्षण कराया गया, उससे पूछताछ की गयी तथा उसके मजिस्टेªट न्यायालय में धारा 164 द.प्र.सं. के कथन कराये गये। पीड़िता ने दस्तयाब होने पर घटना का खुलासा किया था कि वह आरोपी दिलीप को पिछले 2-3 वर्षों से जानती पहचानती है और उसका जन्म दिनांक 21-06-2002 है, आरोपी दिलीप उसे मण्डीदीप लेकर गया था और शादी करूंगा कहकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाये थे और जिससे वह गर्भवती हो गयी और उसने एक बच्ची को जन्म दिया तथा यह भी बताया कि आरोपी दिलीप ने उससे शादी कर ली। घटना स्थल का नक्षा-मौका बनाया गया, उम्र एवं जाति से संबंधी आवष्यक दस्तावेज प्राप्त किये गये। प्रकरण में जप्तषुदा सेम्पलों को डीएनए जांच हेतु एफएसएल भेजा गया। आवष्यक अनुसंधान पूर्ण कर अभियोग पत्र माननीय अनन्य विषेष न्यायालय (पॉक्सो एक्ट) बैतूल म.प्र. के समक्ष विचारण हेतु प्रस्तुत किया गया। विचारण मे अभियोजन द्वारा पैरवी करते हुए पीड़िता एवं उसके परिजनों की साक्ष्य करायी गयी तथा डीएनए परीक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत की गयी, जिसमें पीड़िता की नवजात बच्ची का जैविक पिता आरोपी को होना पाया गया है। जिससे यह स्पष्ट हो गया कि आरोपी द्वारा ही पीड़िता के नाबालिग रहने के दौरान शारीरिक संबंध स्थापित किये गये थे, जिससे पीडिता गर्भवती हुई और उसने एक बच्ची को जन्म दी, जिसका पिता आरोपी है। इस प्रकरण में आरोपी द्वारा पीड़िता से विवाह भी कर लिया गया, मगर पीड़िता के साथ नाबालिग रहने के दौरान शारीरिक संबंध स्थापित किया जाना प्रमाणित होने से अभियोजन का मामला युक्तियुक्त संदेह से परे प्रमाणित पाकर माननीय न्यायालय द्वारा आरोपी को दंडित किया गया। माननीय न्यायालय ने पीड़िता को 2,00,000रू. प्रतिकर राषि दिलाने जाने के लिए आदेषित किया है।
Comments are closed.