बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों में भाजपा के भारी विरोध के बाद आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को महिलाओं के बारे में दिए गए अपने विवादास्पद बयान के लिए माफी मांगनी पड़ी। विधानसभा और विधान परिषद में इस मुद्दे को लेकर आज भारी हंगामा हुआ। भाजपा ने इस मुद्दे को लेकर सदन की कार्यवाही बाधित की। इस मामले में मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए भाजपा के सदस्य सदन के बीचो बीच आ गए और उनके खिलाफ नारेबाजी करने लगे।
विधानसभा में आज सुबह जैसे ही कार्यवाही शुरु हुई भाजपा के सदस्यों ने इस मुद्दे को उठाया। नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि सदन के भीतर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से दिया गया, बयान शर्मसार करने वाला है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को अपने पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है।
इसी दौरान मुख्यमंत्री सदन में आए और कहा कि कल उन्होंने सदन में जो बात कही थी वह महिलाओं की साक्षरता दर तथा उनके शिक्षित होने से परिवार में आने वाली प्रजनन दर में कमी को लेकर था। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका मकसद किसी की भी भावना को आहत करने का नहीं था। उन्होंने कहा कि अगर किसी भी भावना को उनकी बात से चोट पहुंची है तो वे माफी मांगते हैं। श्री कुमार ने कहा कि अपने स्वयं के बयान की निंदा करते हैं। विपक्ष को अब शांत हो जाना चाहिए। मुख्यमंत्री के बयान के बाद भी स्थिति शांत नहीं हुई। इसे देखते हुए अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी ने सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी।
अध्यक्ष ने नेता प्रतिपक्ष की बात पर कहा कि कोई बात असंसदीय है तो उसे कार्यवाही से निकाल दिया जाएगा। उन्होंने नाराज सदस्यों को अपनी सीट पर लौटने को कहा। अध्यक्ष ने कहा कि विपक्ष के सदस्य सदन में हंगामा करेंगे तो उन्हें कार्यवाही से बाहर निकाल दिया जाएगा।
विधान परिषद में भी ऐसी ही स्थिति देखने को मिली। सदन की कार्यवाही शुरु होते ही विपक्षी दल भाजपा के सदस्य सदन के बीच में आ गए और मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग करने लगे। सभापति देवेश चंद्र ठाकुर ने सदस्यों से बार-बार अपनी सीट पर जाने को कहा। शोर गुल के बीच ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी बात रखी। इसके बाद नारेबाजी जारी रहने के कारण सभापति ने सदन की कार्यवाही दोपहर 1 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
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