भीतराघात करने वालों पर पार्टियो की पैनी निगाह

विधानसभा चुनाव की डगर जैसे-जैसे पास आ रही है चुनावी माहौल गरमाता जा रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस बार वरिष्ठ नेतृत्व ने हर विधानसभा क्षेत्र में अपने पार्टी के पदाधिकारीयो की कार्यशैली पर निगाह रखने के लिए गांव-गांव में खुफिया तंत्र सक्रिय कर दिए हैं। जो पार्टी के पदाधिकारीयो की कार्य शैली पर निगाह रखे हुए हैं। पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त , निष्क्रिय, नाराज हर पदाधिकारीयो और गांव क्षेत्र में बखत रखने वाले लोगों की एक्टिविटी की जानकारी प्रदेश स्तर तक पहुंच रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भाजपा ने अपने विधायक प्रत्याशी घोषित करने के पहले एक सर्वे और कराया था । जिसमें जिन्हें टिकट नहीं दी जा रही वे अगर असंतुष्ट होते हैं तो कितना नुकसान पहुंचा सकते हैं उसका भी आकलन किया गया।

उसके बाद ही पार्टी द्वारा टिकट घोषित की गई । वर्तमान में घोषित बीजेपी प्रत्याशी गांव-गांव में लोगों से मिलकर जनसंपर्क कर रहे हैं ।वहीं स्थानीय स्तर के पार्टी पदाधिकारी एक्टिव नहीं है, नाराज हैं या पार्टी विरोधी गतिविधि में लिप्त है इसका पूरा खाका प्रदेश की हर विधानसभा सीट से प्रदेश स्तर तक जा रहा है। सूत्रों की माने तो इस बार का विधानसभा चुनाव कुछ अलग ही ढंग से लड़ा जा रहा है। पूरा मैनेजमेंट ऊपरी स्तर से संचालित हो रहा है और स्थानीय स्तर पर चल रही गतिविधियों की जानकारी प्रदेश स्तर तक पहुंच रही है। भाजपा ने इस विधानसभा चुनाव में सर्व को तवज्जो दी है। वही कांग्रेस भी विधानसभा चुनाव में सर्वे को ही महत्व दे रही है ।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस भी हर क्षेत्र की जानकारी पाने के लिए सर्वे के माध्यम से पार्टी पदाधिकारी और जनता का रुख भाँप रही है। भाजपा ने जहां टिकट घोषित कर दिए हैं वहां भाजपा से नाराज लोगों को कांग्रेस में लाने के लिए भी कांग्रेस के संपर्क सूत्र हर क्षेत्र में घूम रहे हैं ।जो ऐसे लोगों की जानकारी प्रदेश स्तर तक पहुंचा रहे हैं ।पार्टियों ने विधानसभा स्तर पर स्थानीय पदाधिकारीयो की कार्यशैली से पार्टीयो को होने वाले नुकसान से बचने के लिए इस बार खुफिया तन्त्रो पर ज्यादा मेहनत करते दिखाई दे रही है ।

भाजपा और कांग्रेस के सक्रिय खुफिया तंत्र हर विधानसभा क्षेत्र की महत्वपूर्ण जानकारी को प्रदेश स्तर तक पहुंचाने में लगे हुए हैं। इस बार दोनों ही प्रमुख पार्टियों ने विधानसभा क्षेत्र के गांव गांव में अपने खुफिया तंत्र सक्रिय किए हुए हैं । जिन्हें बकायदा इस कार्य का भुगतान किया जा रहा है।  इनके माध्यम से हर विधानसभा क्षेत्र पर पार्टियो के पदाधिकारी, विधानसभा के उम्मीदवारों की एक्टिविटी की जानकारी प्रदेश स्तर तक पहुंच रही है। जिला स्तर पर भी पार्टियो के नियुक्त खुफिया तंत्र गांव -गांव में फैले इन खुफिया तन्त्रो से जानकारी लेकर महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदेश स्तर तक पहुंचा रहे हैं।

इस बार के विधानसभा चुनाव के पार्टियों के मैनेजमेंट को देखकर ऐसा कहा जा सकता है कि हारा हुआ प्रत्याशी अपनी  हार का ठीकरा हर किसी के सिर पर नहीं फोड़ पाएगा । क्योंकि पार्टी पदाधिकारीयो के अलावा प्रत्याशी की कार्यशैली   की भी जानकारी प्रदेश स्तर पर पहुंच रही है।